Monday, 20 January 2014

उठो केजरीवाल!

उठो केजरीवाल, न मन में चिंता पालो,
भूलो बिन्नी दोष, अपना देश सम्हालो.
सरिता जल की राह में आते रहते पत्थर,
तीव्र धार से वे भी बन जाते अति लघुतर

***
निंदक नियरे राखिये, कहते सकल सुजान
निंदा से मल धोइये, नयी डिटर्जेंट जान
समझ न पाये आप को, राजनीति के घाघ,
कर्म निरंतर कीजिये, जनता में हैं आग. .
***
शत्रु सदा से होते है नर के प्रतिद्वंदी. .
दोस्त बिखर के होते हैं शत्रु के संगी.
एक विभीषण देख स्वर्ण लंका को जारे
भेद न होते अगर स्वजन न जाते मारे.
आप आप में आप जलेंगे दुश्मन सारे,
कोस कोस के खुद जल मर जाएँ सारे.
होती अगर न हार तजुर्बा होता कैसे,
तेज होत तलवार शान चढ़ावत जैसे

देना मत अभिमान, कहा था तुमने प्रभु से,
कसमे खाई थी तुमने मिट्टी ले भू से.
बड़े धुरंधर देखो तुझको टोक रहे हैं,
वेगवती धारा को कैसे रोक रहे हैं!
देश विदेश में तुमने जो अब नाम कमाया,
हुए कुपित सब देख ये सब है प्रभु की माया.
मदर टेरेसा ने तुझको जो सिखलाया था,
दुखियों की सेवा करना ही बतलाया था.

क्या होगा गर कुर्सी तेरी छिन जायेगी
नयी विपत्ति जन लोगों में फिर आयेगी.
होगा अगर चुनाव तुम्हे फिर जीत मिलेगी.
और अधिक लोगों की तुमको प्रीत मिलेगी.
बिन्नी जैसे लोग शक्ति-पद के लोलुप हैं,
उसे चढ़ाकर झाड़ शत्रुजन कैसे चुप हैं.
धोखा खाकर ही नर फिर से जग उठता है,
सोना होकर तप्त तेज ज्यादा दिखता है.
असल लड़ाई की घड़ी देखो आन पड़ी है,
केशव साथ में तेरे विपदा मही पड़ी है.
कौरव दल में दम्भ, साथ में सेना शक्ति
पांडव के संग सत्य और केशव की भक्ति.

विजय सत्य की होती, है सन्देश पुराना ,
छोटी मोटी विपदा से तू न घबराना.
हार जीत जीवन के पथ के दो पहलू हैं,
देख आज टी वी चैनेल में तू ही तू है.
भारत के जन में जागी है नूतन आशा,
सभी विरोधी फेंक रहे हैं तुझपर पासा.
अन्ना के वारिश तुम हो राहुल पर भारी
मोदी जी की तेज सिमटती दिखती सारी

पंत प्रधान सचिव सारे असमंजस में हैं,
सत्य आत्मबल निष्ठा तेरे अंकुश में है
जनता और जनार्दन भी है साथ तुम्हारे
किसकी हिम्मत है जो आकर तुझको मारे!. ,
किसकी हिम्मत है जो आकर तुझको मारे
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