Saturday, 21 October 2017

भात भात करते मर गई बच्ची

झारखंड के सिमडेगा से दिल को झकझोर देने वाली एक मामला सामने आया है जहां कुछ दिनों से भूखी 11 साल की एक बच्ची संतोषी की मौत हो गई. बताया ये जा रहा है कि स्थानीय राशन डीलर ने महीनों पहले उसके परिवार का राशन कार्ड रद्द करते हुए अनाज देने से इनकार कर दिया था. राशन डीलर की दलील थी कि राशन कार्ड आधार नंबर से लिंक नहीं है। इस बीच झारखंड में भूख से हुई संतोषी के मौत के मामले को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है. केंद्रीय उपभोक्‍ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि मामले की जांच के लिए जल्द ही एक केंद्रीय टीम राज्य का दौरा करेगी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संतोषी ने चार दिन से कुछ भी नहीं खाया था। घर में मिट्टी का चूल्हा था और जंगल से चुन कर लाई गई कुछ लकड़ियां भी। सिर्फ राशननहीं था. अगर होता, तो संतोषी आज ज़िंदा होती. लेकिन, लगातार भूखे रहने के कारण उनकी मौत हो गई. संतोषी अपने परिवार के साथ कारीमाटी मे रहती थी. यह सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड की पतिअंबा पंचायत का एक गांव है. करीब 100 घरों वाले इस गांव में इसमें कई जातियों के लोग रहते हैं. संतोषी पिछड़े समुदाय की थीं. गांव के डीलर ने पिछले आठ महीने से उन्हें राशन देना बंद कर दिया था. क्योंकि, उनका राशन कार्ड आधार से लिंक्ड नहीं था. संतोषी के पिताजी बीमार रहते हैं. कोई काम नही करते. ऐसे में घर चलाने की जिम्मेवारी उसकी मां कोयली देवी और बड़ी बहन पर थी. वे कभी दातून बेचतीं, तो कभी किसी के घर में काम कर लेतीं. लेकिन, पिछड़े समुदाय से होने के कारण उन्हें आसानी से काम भी नहीं मिल पाता था. ऐसे में घर के लोगों ने कई रातें भूखे गुजार दीं. कोयली देवी ने बताया, “28 सितंबर की दोपहर संतोषी ने पेट दर्द होने की शिकायत की. गांव के वैद्य ने कहा कि इसको भूख लगी है. खाना खिला दो, ठीक हो जाएगी. मेरे घर में चावल का एक दाना नहीं था. इधर संतोषी भी भात-भात कहकर रोने लगी थी. उसका हाथ-पैर अकड़ने लगा. शाम हुई तो मैंने घर में रखी चायपत्ती और नमक मिलाकर चाय बनायी. संतोषी को पिलाने की कोशिश की. लेकिन, वह भूख से छटपटा रही थी. देखते ही देखते उसने दम तोड़ दिया. तब रात के दस बज रहे थे.
सिमडेगा के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्रि इससे इनकार करते हैं. मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि संतोषी की मौत मलेरिया से हुई है. मंजूनाथ का कहना है कि संतोषी की मौत का भूख से कोई लेना-देना नहीं है. अलबत्ता उसका परिवार काफी गरीब है. इसलिए हमने उसे अंत्योदय कार्ड जारी कर दिया है. जलडेगा निवासी सोशल एक्टिविस्ट तारामणि साहू डीसी पर तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाती हैं. तारामणि साहू ने बीबीसी से कहा, “कोयल देवी का राशन कार्ड रद्द होने के बाद मैंने उपायुक्त के जनता दरबार मे 21 अगस्त को इसकी शिकायत की. 25 सितंबर के जनता दरबार में मैंने दोबारा यही शिकायत कर राशन कार्ड बहाल करने की मांग की. तब संतोषी जिंदा थी.
झारखंड के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने हालांकि मीडिया से बात चीत के दौरान यह स्वीकार किया है कि कोयली देवी के परिवार को आधार कार्ड के लिंक न होने के कारण कई महीने से राशन नहीं मिल पा रहा था। सरयू राय का बयान सच समझने के लिए पर्याप्त है।
राज्य के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने कहा कि सिमडेगा जिलाधिकारी 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी, इस मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में जब हम वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने की बात कर रहे हैं, ऐसे में 'भोजन के अधिकार' छीनने और भूख के कारण इस तरह की मौतें सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रही है। अभी हाल ही में भारत वैश्विक भूख सूचकांक में 119 देशों की सूचकांक में 100वें नंबर पर आया था, जो कि एशिया के कई देशों से पीछे है। झारखंड सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने जमशेदपुर में शनिवार को एक बड़ा फैसला लिया है. मंत्री ने मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के आदेश को निरस्त कर दिया है.
दरअसल, मुख्य सचिव ने फरवरी 2017 को खाद्य सामग्री उठाने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया था. साथ ही कहा था कि जिसके पास आधार कार्ड नहीं है उसे राशन नहीं मिलेगा. उस आदेश को खाद्य मंत्री सरयू राय ने शनिवार को निरस्त कर दिया. साथ ही कहा कि भारत सरकार द्वारा अगर 8 तरह के किसी भी प्रकार के पहचान पत्र दिए जाते हैं, तो उनको राशन दिया जाए. उन्होंने सभी राशन दुकानों में आदेश जारी कर दिया. इसके अलावा बच्चे की भूख से मौत मामले में मंत्री सरयू राय ने सवाल खड़ा किया है. हालांकि उन्होंने कहा कि इस घटना से राशन वितरण के मामलों का खुलासा हो रहा है. बच्चे की मौत की भी जांच होगी. उन्होंने कहा कि कहीं बच्चे के परिवार के लोगों के पास आधार कार्ड न रहने पर उनका राशन तो कहीं रोक नहीं दिया गया. साथ मंत्री ने यह भी कहा कि इन सभी मामलों की जांच कर दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
इसी बीच एक और दिल दहलाने वाली खबर आई है, जिसके लिए जिम्मेदार इस बार सरकारी अधिकारी नहीं, गांव के लोग हैं. बताया जा रहा है कि जिस महिला की बच्ची की मौत हुई थी, गांववालों ने उसे मारपीट कर गांव से बाहर निकाल दिया है. गांववालों का कहना है कि महिला ने अपनी बच्ची की मौत के बाद मीडिया को बयान देकर गांव की बदनामी करवाई है, इसलिए उसे गांव में रहने का हक नहीं है. अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 20 अक्टूबर की रात को सिमडेगा के करिमाती गांव में रहने वाली कोयली देवी के घर गांव की कुछ महिलाएं पहुंची. उन्होंने कोयली देवी के साथ मारपीट की और कहा कि उसने गांव का नाम बदनाम किया है. 21 अक्टूबर की सुबह किसी तरह से कोयली देवी अपने पास के गांव में सामाजिक कार्यकर्ता तारामणि साहू के घर पहुंची. तारामणि ने अखबार को बताया- कोयली को गांव से बाहर निकालने की कोशिश की गई और उसका सामान फेंक दिया गया. कोयली मेरे पास आई, जिसके बाद उसकी सुरक्षा के लिए एसडीएम को सूचना दी गई है. वहीं सिमडेगा के डिप्टी एसपी एके सिंह ने अखबार को बताया- जलडेगा के थाना इंचार्ज और बीडीओ को करिमाती गांव भेजा गया है. कोयली देवी को तारामणि साहू के घर से वापस उनके गांव करिमाती लाया गया है. पुलिस ने दावा किया है- घर में तोड़फोड़ के निशान नहीं मिले हैं. जांच में पता चला है कि गांव की कुछ महिलाओं से कोयली देवी की बहस हो गई थी. हालांकि कोयली देवी ने न तो इसकी कोई लिखित शिकायत की है और न ही किसी महिला की शिनाख्त की है. अगर ऐसा होता है, तो हम केस दर्ज कर कार्रवाई करेंगे. यह सब लीपा पोती ही कही जायेगी.
गांववालों, बदनामी इस बात से नहीं हो रही है कि सरकारी तंत्र में उलझकर एक बच्ची की मौत हो गई, बदनामी तो इस बात से हो रही है कि पूरा गांव मिलकर 11 साल की बच्ची को इतना भी खाना नहीं दिला सका कि उसकी सांसे चल सकें. इसलिए नाम और बदनामी की बात छोड़कर उस महिला के दुख में शरीक होने की कोशिश करो, जिसने अपनी बच्ची को खो दिया है. इस बात की कोशिश करो कि भविष्य में गांव में इस तरह की कोई घटना न हो, जिससे गांव की बदनामी हो. खबर यह भी है कि झाड़खंड में लगभग २५ लाख परिवारों को राशन कई महीनों से इसलिए नहीं मिल रहा है क्योंकि उनका राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं हुआ है या आधार कार्ड नहीं है. अब फैसला सरकार और प्रशासन को करना है कि कैसे वह एक गरीब और लाचार लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाते हैं या सिर्फ कागजों और आंकड़ों में ही गरीबी दूर होती रहेगी? निश्चित ही सरकार और प्रशासन के साथ सामाजिक संस्थाओं को भी अपना दायित्व पालन करना चाहिए. किसी भूखे को खाना खिलाने से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता.

-    जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर 

Sunday, 15 October 2017

गुरदासपुर में कांग्रेस की जीत के मायने

पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में BJP से सीट छीनने के बाद कांग्रेस ने चुटकी लेने के अंदाज में केंद्र सरकार और PM मोदी पर निशाना साधा है. कांग्रेस ने गुरदासपुर में मिली जीत का श्रेय पीएम मोदी को दिया है. रविवार को गुरदासपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए मतगणना हुई, जिसमें कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की है. कांग्रेस उम्मीदवार सुनील जाखड़ ने यहां अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के स्वर्ण सेलारिया पर 1 लाख 93 हजार 219 वोटों से जीत दर्ज की. सुनील जाखड़ को जहां 4 लाख 99 हजार 752 वोट, बीजेपी के सवर्ण सलारिया को 3 लाख छह हजार 533 वोट, तो वहीं AAP उम्मीदवार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सुरेश खजूरिया को महज 23 हजार 579 वोट मिले. इस दौरान 7 हजार 587 लोगों ने नोटा का बटना दबाया.
केरल से कांग्रेस नेता और प्रवक्ता टॉम वडक्कन ने कहा, "कांग्रेस की जीत के लिए मैं अभिनंदन दूंगा प्रधानमंत्री मोदी जी को, क्योंकि बहुत मेहनत किया उन्होंने. जहां-जहां वह जाते हैं लोगों को जोड़ने की बात नहीं करते, लोगों से प्रेम की बातें नहीं करते. उनको नजर आता है हिंदू, मुसलमान, सिख, इसाई. प्रतिशत में बात करते हैं वह. देशवासियों को हिंदुस्तानी समझना होगा, उनके दिल में बंटवारा मत लाइए." वडक्कन ने मोदी के गले लगाने को लेकर भी चुटकी ली. उन्होंने कहा, "भाषण देना एक बात होता है. भाषण आप बहुत दे सकते हैं कि वह मेरा दोस्त है, भले उस सज्जन से आप पहली बार मिले हों. सबसे गले मिलते हों, अच्छी बात है. लेकिन बात यह है कि गले मिलने से दिल नहीं मिलता. गले मिलने और दिल मिलने में फर्क है." वडक्कन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के साथ संबंध सुधरने का संकेत देने वाला ट्वीट करने पर कही. वडक्कन ने कहा, "अमेरिका और पाकिस्तान के बीच अच्छा रिश्ता है़. इन हालात में आप बार-बार बोलते जा रहे हैं कि हमारा रिश्ता बहुत अच्छा है, जवाब दे दिया ट्रंप ने."
दिवाली से ऐन पहले का संडे कांग्रेस के लिए 'सुपर संडे' साबित हुआ, जहां दो अलग-अलग उपचुनावों में कांग्रेस को मिली जीत पार्टी के लिए दिवाली का तोहफा लेकर आई। पंजाब और केरल की जीत से पार्टी में खुशी व उत्साह की लहर दौड़ गई। अर्से से जीत के लिए तरस रही कांग्रेस के लिए रविवार को मिली जीत किसी संजीवनी या टॉनिक से कम नहीं मानी जा रही। इस जीत का असर कांग्रेस के आम वर्कर्स के साथ-साथ कांग्रेस नेताओं पर भी पड़ेगा। माना जा रहा है कि जिस तरह से गुजरात राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस का खोया हुआ आत्मविश्वास कुछ लौटा था, उसमें गुरदासपुर की जीत कई गुना इजाफा करने जा रही है। चाहे गुजरात के मंडी चुनाव में कांग्रेस की जीत हो या हाल ही में नांदेड़ के स्थानीय चुनावों में कांग्रेस को मिली बंपर सफलता, ये सभी कांग्रेस के जमीनी वर्कर्स के लिए एक टॉनिक का काम कर रही हैं। माना जा रहा है कि संडे को केरल, खासकर गुरदासपुर की जीत कांग्रेस में एक नई ताकत व ऊर्जा भरेगी। कहीं न कहीं कांग्रेस में यह आत्मविश्वास जागेगा कि वह बीजेपी को सीधी टक्कर में हरा सकती है।
अगले सवा साल में देश में कई राज्यों में असेंबली चुनाव होने हैं। पहले गुजरात व हिमाचल और उसके बाद कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में चुनाव होने हैं। मजे की बात है कि ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है। माना जा रहा है कि इन जीतों का असर आने वाले असेंबली चुनावों में होगा। जहां कांग्रेस केंद्र व राज्य की बीजेपी सरकार की नाकामियों के खिलाफ उतरेगी। गुजरात में कांग्रेस पूरी आक्रामकता के साथ मैदान में पीएम मोदी, उनकी सरकार व बीजेपी को घेर रही है। अगर कांग्रेस इन चुनावों में अपना प्रदर्शन बेहतर करती है तो आने वाले आम चुनावों में वह मोदी नीत एनडीए व बीजेपी के लिए एक बड़ी चु़नौती बन सकती है।
गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा के प्रत्याशी को हराने के बाद कांग्रेस के नेता सुनील जाखड़ ने आज कहा कि भगवा पार्टी को अब भविष्य में मिलने वाली असफलताओं को भांप लेना चाहिए. उन्होंने कहा, “लोगों ने भाजपा को खारिज किया है और साथ ही अकाली (उनके सहयोगी) को भी आईना दिखाया है. लोगों ने अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में फिर से भरोसा दिखाया है और साथ ही नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया है.
मुख्यमंत्री ने गुरदासपुर के लोगों को आश्वस्त किया कि पार्टी अपना हर एक वादा पूरा करेगी और विकास के काम में तेजी लायी जायेगी. अमरिंदर ने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार में विश्वास जताने के लिये वह जनता के आभारी हैं और उन्होंने मतदाताओं के असीम प्रेम एवं समर्थन के लिये उनका शुक्रिया अदा किया. पंजाब के गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने भारी जीत दर्ज की है. गुरदासपुर लोकसभा सीट पर भाजपा के टिकट से विनोद खन्ना लगातार तीन बार सांसद चुने गए थे. इस लिहाज से बीजेपी को चुनावी नतीजे से भारी निराशा हुई है. पंजाब के फजिलका जिले के पंचकोसी गांव (अबोहर) में 9 परवरी 1954 को जन्मे जाखड़ ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की है. उनकी शुरुआती पढ़ाई अबोहर से हुई है. इसके बाद गवर्ममेंट कॉलेज चंडीगढ़ में उन्होंने पढ़ाई की. जाखड़ पूर्व लोकसभा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. बलराम जाखड़ के पुत्र हैं और किसान नेता माने जाते हैं. सुनील जाखड़ पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. सुनील जाखड़ पहली बार पंजाब के ओबहर सीट से विधायक बने. ओबहर सीट से सुनील जाखड़ ने वर्ष 2007 और 2017 में विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. कांग्रेस पार्टी ने इस वर्ष मई में सुनील जाखड़ को पंजाब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया. इससे पहले वे पंजाब कांग्रेस उपाध्यक्ष और मुख्य प्रवक्ता रहे हैं. वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते हैं. गुरदासपुर में मिली भारी जीत के बाद जाखड़ ने कहा कि लोगों ने इस चुनाव के जरिए मोदी सरकार की नीतियों का विरोध जताया. इस जीत के बाद पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने जाखड़ की जीत को दिवाली का उपहार बताया है. उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता ने इस जीत से कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को दिवाली का गिफ्ट दिया है.
बीजेपी नेताओं के मुताबिक हार के प्रमुख कारण...इस प्रकार गिनाये गए.
- कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने चुनाव लड़ा इसलिए पूरी पार्टी एकजुट होकर लड़ी
- बीजेपी का उम्मीदवार चयन सही नहीं था. चुनावों के बीच अकाली दल नेता और बीजेपी उम्मीदवार पर आरोप लगने से मामला बिगड़ा. और - जीएसटी को लागू करने से आ रही दिक्कतों से व्यापारी वर्ग नाराज था.
मतलब अब भाजपा के कुछ लोगों को समझ में आ रहा है कि नोट्बंदी और GST से लोग किस प्रकार परेशान थे और अभी भी हैं. बेरोजगारी और महंगाई बहुत बड़ा मुद्दा है जिसे भाजपा नेता और श्रीमान मोदी नकारते रहे हैं. केवल बातें करने और सपनों के सब्जबाग दिखलाने से जनता ज्यादा दिन भ्रमित नहीं रह सकती है. भाजपा के विकल्प के रूप में अभी भी कांग्रेस ही कही जायेगी. आम आदमी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों का जनाधार कमजोर हुआ है. कांग्रेस को कहीं कहीं राज्य स्तर पर क्षेत्रीय स्तर के पार्टियों से समझौते करने पड़ सकते हैं तभी वह आगामी राज्यों के चुनावों में भाजपा को टक्कर दे सकती है. यह जनादेश प्रधान मंत्री को भी आइना दिखने का काम करेगा क्योंकि वे अपनी पीठ आप ही ठोकते नजर आते हैं. हर विफलता के लिए कांग्रेस को कोसने और सफलता के लिए खुद की पीठ थपथपाने से बाज नहीं आते. धरातल पर कितना काम हुआ यह बातें या तो उन्हें बतायी नहीं जाती या वे जानकर भी अनजान बने रहते हैं. जयहिंद! जय लोकतंत्र!

-    जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर 

Friday, 13 October 2017

आंगनवाड़ी सेविका


आंगनवाड़ी बच्चों का पोषण, स्वास्थ्य और स्कूल से पहले की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक सामुदायिक कार्यक्रम है। आज के समय में इसके अंतर्गत वो गॉंव और झुग्गी झोपड़ियों की बस्तियॉं आती हैं जो सामाजिक और आर्थिक स्तर पर पिछड़े हुए हैं। इसके अंतर्गत 6 साल से कम के बच्चों को शामिल किया जाता है। आई.सी.डी.एस. के घटक विकास चार्ट के आधार पर –
(1) आहार की आपूर्ति
(2) टीकाकरण और विटामिन ए की आपूर्ति
(3) स्कूल से पहले की पढ़ाई
(4) स्वास्थ्य शिक्षा
(5) मांओं के लिए पोषण संबंधी शिक्षा
(6) स्वास्थ्य जांच। जिस समूह को इसका लाभ मिलना होता है उसे दो उपसमूहों में बांटा जाता है।
एक 36 महीनों से कम के बच्चों का समूह और दूसरा 36 से 72 महीनों तक की उम्र के बच्चों का समूह। छोटी उम्र वाले बच्चे घरों में अपनी मांओं के साथ रहते हैं। इसलिए उनके लिए यह कार्यक्रम तब तक बेकार रहता है जबतक कि उनके घरों में न जाया जाए। इनके लिये अंगनवाडी से टेक होम रेशन का पॅकेट मिलता है| 3 साल से बड़ी उम्र वाले बच्चे आंगनवाड़ी (जो कि खिलाने का केन्द्र और बालबाड़ी होती है) में समय बिताते हैं। ये आंगनवाड़ियॉं सुबह के समय चलती हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में टीकाकरण और आई.सी.डी.एस. के तहत स्वास्थ्य जांच होती हैं। आंगनवाड़ी की कार्यकर्ता थोड़ा बहुत पढ़ाने का काम करती हैं। ये कार्यकर्ता थोड़ी पढ़ी लिखी गॉंव की महिला होती हैं। एक और सहायक महिला खाना पकाने और खिलाने का काम करती है।
वृद्धि का रिकार्ड रखना
आई.सी.डी.एस. (इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विस) कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बच्चे के विकास का चार्ट बनाना होता है। यह इस अध्याय में पहले बताया गया है। अगर वजन सबसे ऊपरी लाइन से भी ऊपर आए तो इसका अर्थ होता है कि आमतौर पर वृद्धि अच्छी है। कभी कभी ऐसे अपवाद भी हो सकते हैं जिनमें बच्चे का भार सामान्य से ज़्यादा हो और अधिक भार स्वास्थ्य की समस्या बन जाए। ‘स्वास्थ्य का रास्ता’ क्षेत्र से नीचे के भाग में 2 हिस्से होते हैं जो क्रमश: कुपोषण की पहली, और दूसरी श्रेणियॉं दर्शाते हैं। वृद्धि चार्ट में से कोई निष्कर्ष निकालने से पहले यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि रेखा का अचानक नीचे गिरना, या आडी रहना उसकी पूरी स्थिति से ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है। अगर बच्चा पहले से ही कुपोषित है तो बेहतर आहार देकर उसे इस स्थिति से उबरने में मदद करने की ज़रूरत है। अचानक वजन कम होने का कारण बीमारी या सीधे सीधे कुपोषण हो सकता है। इसलिए जैसे ही आपको वृद्धि चार्ट में वजन में गिरावट दिखे, तुरंत इसके लिए कदम उठाएं।सभी बच्चों का वजन उस तरह से नहीं बढ़ता जैसा की चार्ट के हिसाब से बढ़ना चाहिए।
उम्र के हिसाब से वजन वृद्धी आलेख – लडके के लिए
उम्र के हिसाब से वजन वृद्धी आलेख – लडकीयों के लिए
कुछ बच्चे कुपोषण की पहली श्रेणी में ही रहते हैं। अगर बच्चा ठीक से खाना खा रहा है, खेलता है और चुस्त है तो चिंता की कोई बात नहीं है। परन्तु अगर बच्चा कुपोषण की दूसरी श्रेणी में है तो तुरंत कुछ न कुछ करने की ज़रूरत है। वजन के रिकार्ड के अलावा चार्ट में और भी काम की जानकारी होती है जैसे टीकाकरण आदि के बारे में। इसलिए आई.सी.डी.एस. कार्यक्रम में वृद्धि चार्ट का खास महत्व है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सबसे महत्वपूर्ण काम होता है नियमित रूप से बच्चे का वजन लेना और ज़रूरत के अनुसार पूरक आहार देना। इसकी तुलना में पोषण की जानकारी देना ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा है।
तीन साल की उम्र से कम के बच्चों को आई.सी.डी.एस. के कार्यकलापों से खास फायदा नहीं होता है। दोनों उपसमूहों में से यह उपसमूह ज़्यादा ज़रूरतमंद होता है। क्योंकि कम उम्र में ही पोषण की कमी और संक्रमण रोगो को पहचानना और उनका इलाज करना बेहतर होता है। आई.सी.डी.एस. कार्यक्रम का एक बड़ा फायदा यह हुआ है कि इससे बच्चों के अत्यधिक कुपोषण की पहचान और उसका नियंत्रण हो पाया है। इसका एक और फायदा यह हुआ है कि इससे बहुत सारी महिलाओं को बुनियादी स्वास्थ्य शिक्षा मिल पाई है।
बांह का छल्ला
हम मानक बांह छल्ला तरीके से भी कुपोषण की जांच कर सकते हैं। यह एक फिल्म का छल्ला होता है जिसका हरा भाग 13.5 सेंटीमीटर लंबा और लाल भाग 12.5 सेंटीमीटर लंबा होता है। इनके बीच का एक सेंटीमीटर का पीला भाग होता है। अगर एक बच्चे (जिसकी उम्र 13 से 36 महीने हो) का बांह का घेरा 13.5 सेंटीमीटर से ज़्यादा हो तो उसका पोषण का स्तर संतोषजनक मान सकते है। लाल भाग कुपोषण दर्शाता है। यानि की अगर घेरा लाल भाग के अंदर आता है तो बच्चा कुपोषित है। और पीला भाग दर्शाता है कि बच्चे का पोषण बस ठीकठाक है। बांह के छल्ले का तरीका केवल कुपोषण की जांच के लिए उपयोगी है इससे पोषण के स्तर की जांच नहीं हो सकती है। पोषण के स्तर की निगरानी केवल वृद्धि चार्ट के माध्यम से ही हो सकती है।
इसके अलावा आँगन वाड़ी सेविकाओं को सरकार के कुछ अन्य काम भी दिए जाते हैं. जैसे सर्वे का काम. राशन कार्ड वितरण का काम. जन जागरूकता का काम. सरकार द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जमीनी स्तर तक पहुँचाना.
पिछले दिनों मेरी मुलाकात कुछ आंगनबाड़ी सेविकाओं से हुई और अधिकांश लोगों का व्यवहार मुझे संतोषजनक लगा. उपर्युक्त चित्र मुनिया मुंडा आंगनवाड़ी सेविका और उनकी सहायिका का है. वह अपने ही घर में यह कार्यक्रम चलाती हैं. पिछले दिनों अपने राशन कार्ड की तलाश के दौरान इनसे मिला और इनसे प्रभावित होकर ही मैंने यह लेख लिखा ताकि आंगनवाड़ी सेविकाओं के बारे में जो गात धारणा बनी हुई है वह दूर हो सके. सभी एक से नहीं होते पर उनमे अधिकांश अच्छे लोग भी होते हैं तभी दुनिया चल रही है.
इनका मानदेय हर राज्यों में अलग अलग है. अभी हाल ही में दिली की केजरीवाल सरकार ने इनके मानदेय में बढ़ोत्तरी कर के लगभग १०००० रुपये कर दी है और सहायिका को ५००० रूपए है जबकि दूसरे राज्यों में इनकी आधी है, जो की इनके मिहनत के अनुसार बहुत ही कम कही जाएगी. हमारे देश का दुर्भाग्य है कि जो लोग जमीनी स्तर पर ज्यादा मिहनत का काम करते हैं उनकी सैलरी बहुत ही कम होती है. हमारे जैसे लोगों का का काम है ऐसे लोगों का उत्साह बढ़ाना और सोसल मीडया के माध्यम से आवाज उठाना ताकि सरकार तक आवाज पहुंचे… ज्ञानी जन अपनी राय जाहिर करेंगे.

Saturday, 7 October 2017

चित भी मेरी पट भी मेरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार देश में दिवाली जल्दी आ गई है. उन्होंने कहा कि शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के नियमों में कुछ राहत मिलने से छोटे और मझोले व्यापारियों को लाभ होगा. दीवाली की एक झलक मोदी जी के बडनगर दौरे में भी दिखी, ठीक वैसे ही जब श्रीराम लंका विजय कर अयोध्या लौटे थे. मोदी जी जो कहते हैं वही करते हैं या होता है... दो दिवसीय गुजरात दौरे पर आए मोदी ने कहा, "आज, हर जगह यह कहा जा रहा है कि जीएसटी परिषद में लिए गए फैसलों के चलते (शुक्रवार को) दीवाली 15 दिन पहले आ गई है. मैं खुश हूं." मोदी ने कहा कि छोटे व्यापारियों, व्यापारियों और निर्यातकों के लिए जीएसटी प्रावधानों में ढील देने का फैसला केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर नए कर व्यवस्था के कामकाज की समीक्षा करने के वादे के अनुसार था.
उन्होंने कहा, "हमने कहा था कि हम कमियों सहित तीन महीनों के लिए जीएसटी से संबंधित सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे और इस प्रकार जीएसटी परिषद में आम सहमति से फैसला लिया गया है."   प्रधानमंत्री ने द्वारका जिले के मोजक में देश के पहले और सबसे बड़े समुद्री पुलिस प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना करने की घोषणा की.
शुक्रवार की शाम को जीएसटी कांउसिल की दिन भर चली बैठक के बाद जिन चीजों को सस्ता करने की घोषणा की गई उनमें खाखरा भी था और नमकीन भी. उसमे सूखे आम की खटाई भी थी और धागे भी. उसमें टेक्सटाइल भी था पॉलियेस्टर और नॉयलॉन के धागे भी. इनमें से ज्यादातर चीजों पर जीएसटी की दर को घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया जो जीएसटी कानून के तहत टैक्स फ्री जरूरी वस्तुओं के बाद टैक्स की सबसे कम दर है. लेकिन विपक्ष अब सरकार की इस दरियादिली को गुजरात चुनाव से जोड़कर देख रहा है. विपक्ष्‍ा इसे ‘गुजरात सर्विस टैक्‍स’ बता रहा है.
शुक्रवार को ही ज्‍वेलर्स को राहत देने वाला ये फैसला भी किया गया कि दो लाख तक के गहनों की खरीद पर अब पैन कार्ड देना जरूरी नहीं होगा. ये भी फैसला हुआ कि जिन व्यापारियों का सलाना टर्नओवर 1.5 करोड़ से कम है उन्हें अब हर महीने के बजाए तीन महीने में एक बार जीएसटी रिटर्न भरना होगा. जीएसटी को लेकर निर्यातकों की भी कई शिकायतें दूर कर दी गईं. राहत भरे इन तमाम फैसलों के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को गुजरात दौरे पर चुनाव प्रचार के लिए चले गए, जहां जल्द ही विधानसभा के चुनाव  होने हैं. ये एक महीने के भीतर मोदी की तीसरी गुजरात यात्रा है.
अब ये बात किसी से छिपी नहीं है कि जिन चीजों पर जीएसटी कम करने में सरकार की मेहरबानी हुई है उनमें से कई चीजें ऐसी हैं जिनका गुजरात से सीधा रिश्ता है. खाखरा और नमकीन सबसे ज्याद गुजरात में ही खाया जाता है, कपड़ों के बनाने और निर्यात में गुजरात काफी आगे है और सूरत की डायमंड इंडस्ट्री की धाक सबको मालूम है. मोदी ने जीएसटी को गुड ऐंड सिंपल टैक्स का नाम दिया था, लेकिन शुक्रवार के फैसलों के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग इसे गुजरात सर्विस टैक्स नाम दे रहे हैं.
इसमें कोई शक नहीं कि जीएसटी की राहत में गुजरात के चुनाव का ख्याल रखा गया है. सरकार को लगातार ये रिपोर्ट मिल रही थी कि जीएसटी के लागू होने के बाद व्यापारियों को जो दिक्कत हुई है उससे उनके भीतर नाराजगी बढती जा रही है. गुजरात न सिर्फ नरेन्द्र मोदी का अपना राज्य है बल्कि व्यापार के मामले में देश में सबसे अग्रणी राज्यों में से है. इसलिए यहां से चुनाव नतीजों पर सबकी नजर होगी और बीजेपी के लिए गुजरात में सत्ता में बने रहना बेहद जरूरी है.
गुजरात चुनावों के लिए जीएसटी की राहत को लेकर सरकार पर विपक्ष से लेकर सहयोगी दलों की तरफ से चौतफा हमले हो रहे हैं. केन्द्र सरकार में बीजेपी के सहयोगी दल शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे ने कहा कि जीएसटी की दरों में बदलाव गुजरात चुनावों को देखते हुए किया गया है और ये दीवाली गिफ्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि पेट्रोल की कीमतों में राहत दिए जाने की जरूरत है और बीजेपी ने ये कदम इसलिए उठाया है क्योंकि उसे लोगों के गुस्से का अंदाजा था.
जीएसटी की दरों में बदलाव को मोदी ने गुजरात में दीवाली का तोहफा बताया तो हिमाचल चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि बिना सोचे समझे जीएसटी लागू करने की वजह से गुजरात में ही 30 लाख लोगों ने नौकरियां गंवाईं हैं. सरकार की आर्थिक नीतियों पर लगातार हमला बोल रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी कहा कि राजनीतिक फायदा लेने के लिए जीएसटी के दरों में बदलाव किया गया.
ज्ञातव्य है कि नोट बंदी और GST पर मोदी जी पर चारो तरफ से हमला हो रहा है. विपक्ष तो विपक्ष अब पार्टी के भीतर से भी आवाज उठाने लगी है. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रहे पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के अलावा अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा ने भी मोदी पर हमला करते हुए कहा कि नोट बंदी और GST हड़बड़ी में बिना पूर्ण तैयारी के लागू किया गया तो यह बात उस दिन पी एम को नागवार लगी थी और और उन्होंने इनलोगों की तुलना कर्ण के सारथी शल्य से कर दी जो कर्ण को युद्द के दौरान हमेशा हतोत्साहित करता रहता था. यशवंत सिन्हा ने भी पलटकर जवाब दिया था कि मैं शल्य नहीं भीष्म हूँ, पर मैं उनकी(भीष्म की) तरह भारतीय अर्थव्यवस्था का चीरहरण होते नहीं देख सकता. इसमे कोई दो राय नहीं कि नोट बंदी और GST लागू होने के बाद व्यापारियों की दिक्कतें बढ़ी हैं तो महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है. कई उद्योग धंधे या तो बंद हो चुके हैं या बंदी के कगार पर हैं. बेरोजगारी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. इससे नवयुवकों में रोष है. इसका प्रभाव सोसल मीडिया पर कई प्रकार की प्रतिक्रियाओं के रूप में उभरा है. राष्ट्रीय चैनल तो राम रहीम और हनीप्रीत में लोगों को उलझाकर रक्खा है. कुछ निष्पक्ष समाचार पत्र ख़बरें छाप रहे हैं ...उनपर भी बहुत तरह का दबाव डाला ही जा रहा है पर सोशल मीडिया मुखर हुआ है और कहीं न कहीं मोदी समर्थक भी मुंह खोलने पर मजबूर हुए हैं.
गुजरात और हिमाचल में भावी चुनाव को देखते हुए कुछ हद तक रोलबैक करने की कोशिश हुई है अब देखा जाय कि इसका असर आगामी चुनावों पर क्या पड़ता है. दरअसल विपक्ष धराशायी है और खंड-खंड में बंटा हुआ है. कोई नेता भी उभरकर सामने नहीं आ रहा इसलिए स्थिति चिंताजनक है. अगर मोदी जी इसी तरह अपने मन से या कुछ खासलोगों के हित में फैसले लेते रहे तो, हो चुका विकास और संकल्प से सिद्धि. कहावत है “उद्यमेन ही सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथै” ... कोरे नारे और सपनों से देश नहीं चलता. कम से कम रोटी, कपड़ा और मकान सबको चाहिए. हर हाथ को काम और उसका मिह्नताना तो चाहिए ही. मोदी जी मिहनत करते हैं, पर उन्हें कुछ विशेषज्ञों की सलाह भी अवश्य लेनी चाहिए. इरादा या नीयत अच्छा होने से भी कार्यकुशलता आवश्यक है. जाने-माने अर्थ शास्त्री लोग मोदी जी की आलोचना कर चुके हैं, पर मोदी जी सुने, समझें, माने तब न! वैसे मोदी जी की कार्यशैली, वक्तृत्व कला से सभी प्रभावित हैं और अंत-अंत तक ऐसा कुछ कर गुजरते हैं ताकि आम जनता का फैसला उनकी तरफ हो. बाकी काम उनके चाणक्य अमित शाह कर ही देते हैं. फिलहाल जन समर्थन के साथ चलना आम जन की मजबूरी है. फिर भी गलत का विरोध तो होना ही चाहिए. निम्न मध्यवर्ग हमेशा परेशान रहता है. उम्मीद के जानी चाहिए कि निम्न-मध्यवर्ग के हितों की रक्षा होगी
-  --   जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.


Saturday, 30 September 2017

अथ श्री भागवत कथा

विजय दशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मोदी सरकार की जमकर तारीफ तो की लेकिन राष्ट्रवादी नीतियों पर. संघ प्रमुख ने अपने एक घंटे से ज्यादा की स्पीच में जहां मोदी सरकार की राष्ट्रवादी नीतियों का जिक्र करते हुए जमकर सराहना की, वहीं आर्थिक नीतियों पर संदेह जताया. साथ ही सरकार को आर्थिक नीतियों पर फिर से विचार करने की सलाह भी दे डाली. संघ के स्थापना दिवस पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए भागवत ने सबसे पहले मुंबई हादसे का जिक्र किया और संवेदना व्यक्त की. मुंबई हादसा जितना संवेदनशील था उसपर एक्शन भी जल्द हुआ और वर्तमान रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कई सुधारों के फैसले लिए और कई मुद्दों को सुरक्षा के साथ जोड़ा जिसे जी एम लेवल पर फैसले लिए जा सकते हैं. उम्मीद है रेलवे में तात्कालिक नहीं तो कुछ महीनों बाद सुधार देखने को मिले खासकर सुरक्षा के मामले में.
कश्मीर को लेकर भी भागवत ने मोदी सरकार की तारीफ की. उन्होंने कहा कि सरकार ने मजबूती के साथ अलगाववादियों और उग्रवादियों का बंदोबस्त किया है. पुलिस और सेना को काम करने की पूरी छूट देकर राष्ट्रविरोधी ताकतों को मिलने वाली ताकत का रास्ता बंद किया है. साथ ही सरकार को नसीहत भी दी कि कश्मीर में विकास के लिए चुस्ती दिखाए. विस्थापितों की दिक्कतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कश्मीरी पंडितों की दिक्कतों को भी बयां किया. साथ ही कहा कि अलगाववादियों और उग्रवादियों पर कड़ाई जारी रखते हुए ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे जम्मू-कश्मीर के लोगों को आत्मीयता का अनुभव हो. इसके लिए अगर नए प्रावधान बनाने पड़े या पुराने प्रावधान हटाने पड़े तो वह करना चाहिए. यह जरूरी है कि भारत के साथ कश्मीर की जनता का आत्मीकरण हो.
नए और पुराने प्रावधान की बात करना भागवत का धारा 370 की तरफ इशारा है. धारा-370 हटाना बीजेपी और संघ का प्रमुख अजेंडा रहा है. लेकिन जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार बनाने के बाद से बीजेपी इस मसले पर ज्यादा कुछ नहीं बोल रही है. संघ परिवार के कई संगठन इसके लिए लगातार दबाव बना रहे हैं और भागवत का यह कहना संघ के लोगों की भावना का इजहार करना है.
भागवत ने कहा कि बांग्लादेशी अवैध घुसपैठियों की समस्या अभी पूरी तरह निपटी भी नहीं कि म्यांमार से खदेड़े गए रोहिंग्या आ गए. अगर उन्हें आश्रय दिया तो वह हमारे रोजगार पर तो भार डालेंगे ही साथ ही देश की सुरक्षा के लिए भी संकट बनेंगे. उनका इस देश से नाता क्या है. मानवता की बात ठीक है पर उसके अधीन होकर अपने मानवत्व को समाप्त करे यह ठीक नहीं. भागवत ने सीमा पर तैनात सैनिकों को ज्यादा सुविधा देने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि उनके खाने पीने और सुविधा का ध्यान रखना होगा.
रोहिंग्या पर संघ शुरू से ही मोदी सरकार के कदम के साथ है. एक सैनिक का खराब खाने की शिकायत का विडियो आने के बाद मोदी सरकार पर यह सवाल उठने लगे थे कि देशभक्ति की बात करने वाली सरकार सैनिकों को सही से खाना तक नहीं दे सकती. भागवत ने यह दिखाने की कोशिश की कि संघ लोगों की इस भावना के साथ है और साथ ही सरकार को नसीहत भी दे डाली कि वह इस तरह के मसले पर ज्यादा ध्यान दें.
जहां राष्ट्रवादी नीतियों पर भागवत ने मोदी सरकार को पूरा समर्थन दिया वहीं आर्थिक नीतियों पर सवाल भी खड़े कर दिए. मोदी सरकार की कई योजनाओं का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि भ्रष्टाचार खत्म करने और आर्थिक प्रगति के लिए कई योजनाएं चली. कई साहसपूर्ण फैसले भी लिए. लेकिन यह देखना होगा कि अर्थनीति से सबका भला हो रहा है या नहीं. उन्होंने कहा कि हमें दुनिया की घिसी-पिटी अर्थनीति की बजाय अपनी नीति बनानी चाहिए. साथ ही कहा कि मध्यम, लघु, कुटीर उद्योग, खुदरा व्यापारी, स्वरोजगार, कृषि और इनफॉर्मल इकॉनमी की वजह से ही हम आर्थिक भूचालों में सुरक्षित रहे. इसलिए आर्थिक सुधार करते वक्त यह ध्यान रखना होगा कि यह सुरक्षित रहें. उन्होंने कृषि का जिक्र करते हुए कहा कि कोई भी नई तकनीक लाने से पहले उसके परिणाम सोचने चाहिए. जो तकनीक दूसरे देश अपने वहां तो बंद कर रहे हैं लेकिन भारत में बेच रहे हैं उनसे सावधान रहने की सलाह भी दी. उन्होंने कहा कि किसानों के बच्चें खेती नहीं करना चाहते क्योंकि गांवों में उन्हें सुविधा नहीं मिल रही है. सरकार से इस तरफ भी ध्यान देने की बात कही. पिचले दिनों किसानों की आत्महत्या, उनके आन्दोलन और गोली चालान की घटना सुर्खियों में थी इसपर श्री भागवत की चिंता जायज है.  
निष्कर्ष - नोटबंदी और फिर जीएसटी के बाद सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं. कई छोटे और मझोले व्यापारियों ने विरोध जताया. संघ परिवार के संगठनों ने भी इन व्यापारियों के समर्थन में सरकार का विरोध किया. नाराजगी इस बात को लेकर है कि लोगों के रोजगार छिने हैं और व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ है, साथ ही दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है. बीजेपी के अंदर से भी आर्थिक नीतियों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. संघ की हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय मीटिंग में भी नोटबंदी और जीएसटी को लेकर लोगों में सरकार के खिलाफ असंतोष की बात सामने आई. भागवत ने यह कहकर मोदी सरकार को नसीहत दी है कि वह आर्थिक नीतियों में इस बात का ख्याल रखे. स्वदेशी जागरण मंच बीटी को लेकर विरोध कर रहा है. सरकार से लगातार यह कह रहा है कि विदेशियों के दबाव में न आएं. भागवत ने उनकी चिंता से खुद को जोड़ा. संघ की तरफ से पहली बार इस तरह आर्थिक मोर्चे पर सरकार को नीतियां सुधारने की नसीहत दी गई है. साथ ही किसानों की तरफ ज्यादा ध्यान देने की सलाह भी संघ ने दी, क्योंकि सरकार किसानों और आर्थिक मसलों पर ही विपक्ष के निशाने पर है. उम्मीद है कि यहाँ पर जेटली जी मोहन भागवत की उम्र या हैसियत पर तंज कसने की हिमाकत तो नहीं ही करेंगे जैसा कि उन्होंने यशवंत सिन्हा द्वारा उठाये गए सवालों पर पलटवार कर किया था.
भागवत ने कहा कि कहीं गाय के नाम पर कुछ हिंसा हो जाती है तो उसका संबंध गोरक्षकों से जोड़ना गलत है. गाय की रक्षा करने वालों की भी हत्या हुई है. यूपी में सिर्फ बजरंगदल के लोग ही नहीं बल्कि मुस्लिम गोरक्षक भी शहीद हुए हैं. गोरक्षा को सांप्रदायिकता और हिंसा से नहीं जोड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब शासन में ऊंचे पदों पर बैठे लोग कुछ कहते हैं तो शब्दों का आधार लेकर उसे बिगाड़ा जाता है. इसकी चिंता गोरक्षकों को नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह उनके लिए नहीं है. गोरक्षक कानून का पालन करते हैं और उसकी निगरानी भी करते हैं. संघ प्रमुख ने कहा कि आजकल विजिलांटे शब्द को गाली जैसा बना दिया और गाय शब्द का उच्चारण करने वाले पर यह शब्द चिपका देते हैं. संविधान बनाने वाले मार्गदर्शन देने वाले वे भी विजिलांटे थे क्या. ऊंचे पदों पर बैठे लोग और सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा उसकी चिंता वह लोग करेंगे जो लोग गुनहगार होंगे. गोरक्षकों को उसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है. पीएम मोदी कई मौकों पर गोरक्षकों की हिंसा के खिलाफ अपना गुस्सा जता चुके हैं और राज्य सरकारों से गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा से सख्ती से निपटने का निर्देश दे चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में निर्देश दिए कि हर राज्य में गोरक्षा के नाम पर हिंसा रोकने के लिए हर जिले में नोडल अफसर तैनात किए जाएं. ये सुनिश्चित करें कि कोई भी विजिलेंटिजम ग्रुप कानून को अपने हाथ में ना लें. इसके बाद संघ के संगठनों की तरफ से नाराजगी भी जताई जा रही थी कि गोरक्षकों को बदनाम करने की कोशिश हो रही है. भागवत का यह कहना संदेश है कि वह गोरक्षक के साथ खड़े हैं.
भागवत ने कहा कि हम 70 साल से आजाद हैं लेकिन पहली बार दुनिया को और हमको थोड़ा-थोड़ा अनुभव हो रहा है कि भारत है और उठ रहा है. भारत की अंतरराष्ट्रीय जगह में प्रतिष्ठा बढ़ी है. डोकलाम में धैर्यतापूर्वक और संयम के साथ अपना गौरव न खोते हुए जिस तरह डील किया उससे हमारी प्रतिष्ठा बढ़ी. अब दुनिया भारत को गंभीरता से ले रही है और भारत में दखल देने से पहले 10 बार सोचती है. आर्थिक विकास की दिशा में भारत तेजी से बढ़ा है, गति मंद हो रही है लेकिन ठीक हो जाएगी. जानकार इसे मोदी सरकार की विदेश नीति को संघ के पूरे समर्थन के तौर पर देख रहे हैं. विपक्ष मोदी सरकार पर विदेश नीति को लेकर आरोप लगाता रहा है.
कुल मिलाकर अगर देखा जाय तो वर्तमान सरकार की आर्थिक नीति जिससे लोगों के रोजगार पर असर पड़ा है, उसपर श्री मोहन भागवत ने वाजिब चिंता जाहिर की है. इसपर मोदी सरकार अवश्य सोचेगी, शायद सोच भी रही है. बाकी लगभग सभी नीतियों पर वे सरकार के साथ हैं और उसके लिए शाबाशी भी दे रहे हैं. जेटली जी जनता से जुड़े नहीं हैं, इसीलिए वे अपना चुनाव भी हार गए थे तब भी वित्त के साथ रक्षा मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय का कार्यभार दिया जाना शायद उचित नहीं था. ये बात मोदी जी समझें तब ना! नहीं समझेंगे तो भुगतना उन्हीं को पड़ेगा. जय हिन्द!

-    जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.