Monday, 6 January 2014

इस हफ्ते की कुछ सुर्खियां

हफ्ते की हलचल
‘आप’ ने विश्वास मत हासिल कर लिया. उनका विधान सभा का स्पीकर भी चुन लिया गया. मुख्य मंत्री केजरीवाल का नया बंगला भी आवंटित हो गया और मंत्रियों को इन्नोवा गाड़ी भी. मीडिया और आम आदमी के दबाव पर केजरीवाल ने बड़े बंगले लेने से इंकार भी कर दिया… (लोक लाज का ख्याल या फिर आम आदमी पार्टी के घोषणापत्र का खेल!) घोषण-पत्र के वादे के अनुसार २०,००० लीटर/प्रति माह मुफ्त पानी और सस्ती बिजली देने की घोषणा भी हो गयी. बिजली कंपनियों का CAG से ऑडिट भी चालू हो गया (शायद).
उधर यु. पी. ए. के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी नाकामियों को मान भी लिया.- बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार उनकी पार्टी की हार का कारण बनी …फिर भी सी. एन. जी, पी. एन. जी, एल. पी. जी, पेट्रोल, डीजल को बढ़ाते जाने का कारण समझ से परे रहा. भ्रष्टाचार से लड़ने का उनका दावा भी खोखला ही साबित हुआ. आखिर वीरभद्र सिंह ने भी सोनिया का वरदहस्त प्राप्त कर लिया.
सबसे ज्यादा प्रधान मंत्री का यह बयान कि ‘मोदी का प्रधान मंत्री बनना देश में तबाही लाने वाला होगा’. इसे इस तरह से लिया जा सकता है कि ऐसा कहकर मनमोहन सिंह ने मोदी पर हमला कर मीडिया औए भाजपा को बैठे बिठाये मुद्दा दे दिया. पिछली बार सम्भवत: २००९ में जब श्री लाल कृष्ण आडवाणी मनमोहन सिंह को कमजोर प्रधान मंत्री बता रहे थे और अपने को लौहपुरुष तो भी मनमोहन सिंह ने चुटकी ली थी – “गांधार में ‘लौह पुरुष’ (लाल कृष्ण आडवाणी) मुलायम(सॉफ्ट) हो जाते हैं”. अडवाणी जी आज ढलवा लोहा की तरह एक सांचे में बंद हैं. मोदी जी बहुत बार मनमोहन सिंह को ललकार चुके थे. इस बार पत्रकारों के सवाल के जवाब में मनमोहन सिंह ने अपना गुब्बार निकाल दिया या मोदी जी को उनपर एक और हमला करने के लिए विषय दे दिया. मोदी जी पुरानी बातों का ही टेप हर जगह चलाये जा रहे हैं. अब कुछ नया बोलेंगे. मनमोहन सिंह पर तेज धारदार हथियार फेंकेंगे. तबतक बाबा रामदेव भी तैयार हो गए – मोदी को समर्थन देने के लिए कुछ शर्तें रख दी. इधर वे मीडिया में नजर नहीं आ रहे थे. हर जगह मोदी, मनमोहन, राहुल और अरविंद केजरीवाल ही छाये हुए थे, सो उन्होंने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी. मीडिया ने भी उन्हें हाथों हाथ लिया और दिन भर एक चैनेल से दुसरे चैनेल पर छाये रहे. उनक पास देश की आर्थिक अवस्था सुधरने के और महंगाई कम करने के अमोघ योग है. केवल बैंक ट्रांजैक्सन पर टैक्स लगाया जाय. (बैंकिंग सुविधा सरल होने से ट्रांजैक्सन बहुत बढ़ गए हैं!)
‘आम आदमी पार्टी’ में बहुत लोग जाना चाह रहे हैं. कुछ आवंछित दागदार भी इसमें घुसना चाह रहे हैं. बिहार के एक दागदार बाहुबली कुंदन सिंह भी आप की सदस्यता अभियान चला रहे थे, जिन्हे मीडिया रिपोर्ट पर रोका गया है. ऐसे अनेक अवांछित लोग ‘आप’ में आ सकते हैं. इन सब पर कैसे रोक लगाएंगे केजरीवाल? उन्होंने आम आदमी की परिभाषा भी बदल दी है … उन्होंने कहा कि फूटपाथ सोने वाला से लेकर चाँद और मंगल ग्रह पर जाने वाला ईमानदार आदमी भी आम आदमी है…बेईमान नेता को छोड़कर! (और अब तो आम आदमी नेता भी बन ही गया है….)
इनफ़ोसिस के पूर्व निदेशक वी बालाकृष्णन, रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड की सी. ई. ओ. मीरा सान्याल. भूतपूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते आदर्श शास्त्री का करोड़ों की सैलरी देनेवाली संस्था एप्पल को छोड़ ‘आप’ से जुड़ना कुछ तो माने रखता है. अन्य गण्यमान लोग ‘आप’ की तरफ खींचते जा रहे हैं, गुजरात की राजस्व मंत्री आनंदी बेन के पति मफतभाई पटेल को ‘आप’ में आ मिलना, अन्य राज्यों एवं जानी मानी हस्तियों का ‘आप’ की तरफ खिंचाव जारी है. झारखण्ड में जे वी एम का आप के साथ गठबंधन का फैसला. राहुल का अपने कार्यकर्ताओं से यह कहना कि हमें आप से चुनाव प्रचार सीखने की जरूरत है. झारखण्ड के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन का अपने मंत्रियों द्वारा लाल नीली बत्ती और सायरन के इस्तेमाल से मनाही. महाराष्ट्र में बिजली की दर कम करने का कांग्रेस के संजय निरुपम का अपने ही राज्य सरकार पर दबाव. … बहुत सारे मंत्री अपनी सुरक्षा कम करने में लगे हैं, यह सब परिवर्तन दिखने लगा है. क्या सचमुच परिवर्तन की आहट सुनाई पड़ने लगी है कि यह लोक सभा चुनाव की तैयारी(?) है.
शिर्डी के साई बाबा के चरणों में एक हफ्ते के अंदर पंद्रह करोड़ का चढ़ावा. यह साबित करता है कि भारत के भक्त गरीब नहीं है. धूम -३ का रफ़्तार साढ़े तीन सौ करोड़ से ४०० करोड़ तक की कमाई …पैसे की कमी कहाँ है… महंगाई की मार झेलता हुआ आम आदमी ने नव वर्ष के उपलक्ष्य में, होटलों, पार्कों और वनभोज स्थलों पर खूब मौज मस्ती की. अन्न की बर्बादी के साथ शराब की नदियां भी बही. गंदगी का अम्बार भी लगा और अभी यह सिलसिला जारी है. गरीब उन जूठे अन्न, उच्छिष्ट भोजन के लिए लालायित देखे जा सकते हैं..
ममता के राज्य में नाबालिक (बंगाल की निर्भया) से बलात्कार कर उसको जलाकर मार डालना …जिसकी गूँज बंगाल से बिहार तक सुनाई पड़ रही है. उधर दिल्ली पुलिस कहती है बलात्कार की घटनाएं दुगनी बड़ी है. अंतर क्या पड़ा … आशाराम, नारायण साईं के साथ, तरुण तेजपाल, जस्टिस ए.के. गांगुली यौन प्रताड़ना का कानूनी लड़ाई लड़ रहे है..
आप पर भाजपा के हमले तेज हैं, पर आप मजबूती से जनसमर्थन के साथ आगे बढ़ रही है. अब बाबा रामदेव क्या करें वे भी असमंजस में हैं. अपने पुराने मुद्दे को लेकर मोदी, केजरीवाल और कांग्रेस सबको एक साथ चुनौती दे रहे हैं. उनका अर्थशास्त्र ज्ञान सबको चौंका रहा है उन्होंने आखिर काफी संपत्ति अर्जित की है अब वे देश को आर्थिक रूप से मजबूत करना चाहते हैं. कोई उनकी भी सुन ले भाई! कहाँ हैं नरेंद्र मोदी भाई! उन्हें लग रहा है कि उनकी तरफ से लोगों का ध्यान हट गया है. मीडिया को भी तो रोज नया नया समाचार चाहिए होता है.
ठंढ से सिकुरते लोगों का हाल चाल ‘आप’ पूछ रही है सम्भवत: हल भी निकाल रही है.
समाजवादी पार्टी की अपनी गुंडा की छवि के साथ साथ सायकिल की सवारी बरक़रार रखने, और अल्पसंख्यक समुदाय को लुभाने की लगातार कोशिशे जारी है.
येदुरप्पा की भाजपा में वापसी तो लालू को यह लाभ क्यों नहीं. वे भी जेल से बाहर आए हैं और अपनी खोई जमीन तलाश कर रहे हैं, राहुल की छत्रछाया में..
अजीब सी दुविधा और असमंजस की स्थिति बनी हुई है. मतदाता करे तो क्या, कोई चमत्कार होता दीखता नहीं. थोडा सा पुचकार दुलार पाकर ही अभिभूत हो जाता है. उधर वित्त मंत्री सब्सिडी वाली गैस सिलिंडरों की संख्या नौ से बढ़ाकर १२ करना चाह रहे हैं, तो पेट्रोलियम मंत्री आगे बढ़कर कहते हैं – संभव नहीं.
एक अंतर है अरविंद या आप में वे अभी भी जनता की बात सुन रहे हैं और आगे की रणनीति बनाने में लगे हैं. अब योगेन्द्र यादव का सपना – अरविंद को प्रधान मंत्री के रूप में देखना. कब पूरा होगा पता नहीं..
अरविन्द की स्वीकारोक्ति कि आप लोग मेरी गलती निकालें (निंदक नियरे रखिये). वे लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे. फ़िलहाल मोदी जी और राहुल जी के लिए राहत या आगे के लिए ‘आप’ की रणनीति
राहुल गांधी का कांग्रेस के प्रधान मंत्री के नामित उम्मीदवार…. की घोषणा होनेवाली है. अब तीन ध्रुव बनते दीख रहे हैं मोदी, कांग्रेस और आप, बाकी पार्टियां भी अपना अपना जुगत लगा रही हैं. २०१४ का लोकसभा का चुनाव बड़ा दिलचस्प होने वाला है.
कड़ाके की ठंढक, धुंध, कोहरा, रेलगाड़ियों का लेट चलना, जम्मू कश्मीर में बर्फ़बारी, शैलानियों का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. गरीब, बुजुर्ग लोग ठंढ से आक्रांत हो रहे है तो रईस लोगों के लिए ठंढ में बर्फ से खेलना मजा देता है. यही तो है संसार और जिन्दगी! समय का चक्र चलता रहता है, अनवरत, लगातार!
अंतत: जस्टिस गांगुली ने पश्चिम बंगाल के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. एक न्यायाधीश महोदय को इतने दबाव के बाद अपने बारे में निर्णय लेने में इतना समय लगा, फिर दूसरे लोगों के बारे में कितना समय लगायेंगे?
- जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

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