Saturday, 10 December 2016

संसद में मुझे बोलने नहीं दिया जाता - मोदी

१० दिसंन्बर २०१६ शनिवार को गुजरात के डीसा में एक रैली को संबोधित करने के दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों को ये भरोसा दिलाया कि नोटबंदी के बाद जो भी परेशानियां हो रही हैं वो 50 दिन में खत्म हो जाएंगी. उम्मीद तो सब यही कर रहे हैं. अगर सब कुछ ठीक हो जाएगा तो फिर कौन शिकायत करेगा? पर क्या ऐसा असर दीखता है. एक महीने से ज्यादा समय हो गया है और सभी बैंक और एटीएम नगद से खाली हैं, लोग नगदी के लिए परेशान हैं.
नोटबंदी के विरोध में संसद ठप करने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने विरोधियों को निशाने पर लिया है कहा है कि झूठ नहीं टिकता इसलिए विपक्षी दल संसद नहीं चलने दे रहे. पीएम मोदी ने कहा है कि मुझे लोकसभा में बोलने नहीं दिया जा रहा है.पीएम कहा, ‘सरकार कहती है कि पीएम बोलने के लिए तैयार हैं. लेकिन उनको मालूम है उनका झूठ टिक नहीं पाता है. इसलिए वो चर्चा से भाग जाते हैं. इसलिए उन्होंने लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया इसलिए मैंने जनसभा में बोलने का निर्णय लिया.उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी के खिलाफ कोई पार्टी नहीं, विरोधी सिर्फ तरीके पर सवाल उठा रहे हैं. राजनीति से ऊपर राष्ट्रनीति होती है, दल से बड़ा देश होता है. सरकार कहती है कि पीएम बोलने के लिए तैयार हैं. लेकिन उनको मालूम है उनका झूठ टिक नहीं पाता है. इसलिए वो चर्चा से भाग जाते हैं. इसलिए उन्होंने लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया इसलिए मैंने जनसभा में बोलने का निर्णय लिया. देश में 70 साल तक ईमानदारों को लूटा गया. छोटे नोटों और छोटे लोगों की ताकत बढ़ाने के लिए नोटबंदी का फैसला लिया. आतंकवादियों को ताकत देता है जाली नोट, सीमा पार क्या हो रहा है सब जानते हैं.
सवाल वही है, आदरणीय प्रधान मंत्री श्री मोदी जी, आपके सिवा कौन बोलता है यहाँ! आप सबसे ज्यादा जन सभाएं/ रैलियां करते हैं. विदेश भ्रमण में भी आप वहां के भारतीयों के साथ अपने देश के लोगों को भी संबोधित करना नहीं भूलते. मीडिया आपका हर भाषण का एक एक शब्द बार-बार रिपीट करता है. हर सरकारी विज्ञापन में आप ही बोलते हैं. मन की बात में आप ही बोलते हैं. २०१४ के चुनाव तैयरियों से लेकर अब तक कौन सबसे ज्यादा बोला है? आदरणीय प्रधान मंत्री जी! संसद में आपका पूर्ण बहुमत है. पूर्ण बहुमत की सरकार के आप मुखिया हैं और आप को ही बोलने नहीं दिया जाता इससे बड़ा असत्य क्या हो सकता है? विपक्ष तो पहले दिन से आप से बयान की मांग कर  रहा है और आप हैं कि संसद में बैठना ही नहीं चाहते. विपक्ष की बात सुनना ही नहीं चाहते! नोटबंदी की लाइन में सौ से ज्यादा लोग मर गए आपने एक शब्द उनकी सांत्वना में नहीं कहा. विपक्ष संसद में मांग करता रहा एक बार उन मृत लोगों के प्रति सांत्वना ही व्यक्त कर दी जाय पर यह भी नहीं हुआ. आप 125 करोड़ लोगों के शुभचिंतक/प्रतिनिधि होने का दावा करते हैं. कम से कम उनके दुःख-दर्द को तो समझिये. जनता ने आपको बड़े उत्साह से जनमत दिया था. आप उनका ख्याल तो रखिये. आपसे देश को अभी भी उम्मीदें हैं. कम-से-कम लोगों को भरोसा है – “न खाऊँगा न खाने दूँगा” जैसे वक्तव्य पर. लेकिन आप अपनी सफलता का ढिंढोरा अपने आप पीटे जा रहे हैं. कुछ जनता के लिए भी छोड़िये जो आपका गुणगान खुद करे. किसान अपनी फसल की कीमत नहीं मिलने पर रो रहा है, दिहाड़ी मजदूर काम नहीं मिलने के कारण या कहें की मजदूरी नहीं मिलने के कारण अपने-अपने घर लौट रहा है. छोटे-मोटे कारोबारी अपना बिजनेश ठप्प होने से परेशान हैं. नोटबंदी से महाराष्ट्र के मालेगांव में पॉवरलूम के एक लाख मजदूर बेकार हो गए हैं. लुधियाना के होजियरी कारोबार का लगभग यही हाल है. महानगरों में बिल्डिंग बनाने में लगे मजदूर पलायन कर रहे हैं. ईंटभट्ठे पर काम करने वालों को मजदूरी नहीं मिल रही है. ये सभी नगदी पर ही काम करते हैं. आप नोटबंदी के बाद कैशलेस की बात कर रहे हैं. पहले आधारभूत-संरचना, वह भी फुलप्रूफ सिस्टम तो विकसित करिये फिर अपने आप कैशलेश परिवेश विकसित हो जाएगा. अब आपकी नोटबंदी के चलते नोटों की कमी हो रही है तो कैशलेश की बात कर रहे हैं. उधर अनेकों जगहों से नए नोटों की गड्डियां करोड़ों में बरामद हो रही है. सिस्टम कितना भ्रष्ट हो चुका है वह भी तो देखिये. सरकार के साथ जनता को भी सहयोग करना पड़ेगा तभी भ्रष्टाचार मुक्त भारत बन पायेगा. ऐसा वातावरण बनाइये कि लोग सीख ले, आपके मंत्री, सहयोगी अपने परिजनों की शादी में करोड़ों खर्च कर रहे हैं और आम जनता को सादगी का पाठ पढ़ा रहे हैं. आप तो दिन में दस बार कपडे बदलें और आम आदमी एक सही ढंग का कपडा भी न पहन पाए ऐसा कैसे हो सकता है. आप महात्मा गाँधी का बहुत नाम लेते हैं. उनके जैसा खुद भी बनकर दिखाइए. तभी आप के पीछे जनता होगी सारा देश होगा. विनम्र अनुरोध है आपसे!      
नोटबंदी का एक महीना बीतने के बावजूद अभी भी बैंक और एटीएम में लंबी कतारें हैं. लोग कैश की किल्‍लत से परेशान हैं. वहीं दूसरी तरफ ऐसे भी मामले सामने आ रहे हैं जहां नोटबंदी के बाद कई लोगों के पास करोड़ों की नई नकदी पकड़ी गई है. यह उदाहरण क्या हमरे सिस्टम का दोष नहीं है. यहां ऐसे ही चुनिंदा बड़े मामलों के बारे में चर्चा भर करना चाहूँगा.
चेन्‍नई (10 करोड़) आठ दिसंबर को आयकर विभाग ने छापा मारकर विभिन्‍न स्‍थानों से 106 करोड़ रुपये की नकदी और 127 किलो सोना पकड़ा. इसमें से 10 करोड़ रुपये की नई नकदी शामिल थी. गोवा (1.5 करोड़) उत्‍तरी गोवा में सात दिसंबर को एक स्‍कूटर पर जा रहे दो लोगों को पुलिस ने सूचना मिलने पर पकड़ा. उनके पास से 70 लाख रुपये की नई नकदी मिली और उस दिन इनको मिलाकर गोवा के विभिन्‍न क्षेत्र से कुल 1.5 करोड़ रुपये के नए नोट जब्‍त किए गए. कोयंबटूर (1 करोड़) 29 नवंबर को तमिलनाडु के कोयंबटूर में तीन लोगों को एक कार में एक करोड़ की नई नकदी के साथ पकडा़ गया. ये पुराने नोटों से नए नोटों की बदली के काम में लगे थे. सूरत (76 लाख) नौ दिसंबर को सूरत में होंडा कार के अंदर 76 लाख रुपये के 2,000 के नए नोट मिले. महाराष्‍ट्र से गुजरात पहुंची यह कार नोटों से भरी मिली. सिर्फ कैश नहीं, बल्कि उसमें 2,000 रुपये के नए नोट बरामद हुए. इसके अलावा गुजरात में दो अन्‍य बड़ी घटनाओं में 23 नवंबर को गुजरात सेटेलाइट एरिया में 10.6 लाख के नए नोट और 20 नवंबर को साबरकांठा जिले में आठ लाख की नई नकदी पकड़ी गई. उडुपी (71 लाख) सात दिसंबर को कर्नाटक के उडुपी में एक कार से 71 लाख के नए नोट मिले. अधिकांश नोट 2000 रुपये की नई करेंसी में थे. इस सिलसिले में तीन लोगों को पकड़ा गया. मुंबई (72 लाख) नौ दिसंबर को मुंबई के दादर इलाके में 72 लाख मिले. दरअसल इस केस में सात लोगों को पकड़ा गया जोकि पुराने नोटों को नए से बदलने की कोशिश कर रहे थे. इनके पास 85 लाख रुपये मिले जिसमें से 72 लाख रुपये 2000 के नए नोटों में थे. होशंगाबाद (40 लाख) मध्‍य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में एक सफेद इनोवा कार से 40 लाख रुपये के नए नोट एक काले बैग में मिले. कार पर प्रेजीडेंट-एंटी-करप्‍शन सोसायटी का स्‍टीकर लगा था. गुड़गांव (27 लाख) गुड़गांव के इस्‍लामपुरा इलाके में तीन आदमियों से आठ दिसंबर को 2000 और 100 के नोटों में 17 लाख रुपये की नई नकदी पकड़ी गई. उसके 24 घंटे के भीतर ही 10 लाख की नई नकदी समेत दो लोगों को पकड़ा गया. कर्णाटक में 5.70 करोड़ वह भी बाथरूम में छिपाकर रखे गए नए नोटों और ३२ किलो सोने चाँदी कर्नाटक में इनकम टैक्स के छापे में एक हवाला कारोबारी के घर से 5 करोड़ 70 लाख की नई करेंसी मिली है. 90 लाख के पुराने नोट भी जब्त किए गए. 32 किलो सोना-चांदी भी मिला है. कारोबारी ने बाथरुम के चैंबर में ये नकदी छिपाकर रखी थी. बाथरुम की टाइलों के पीछे बनी तिजोरी से सारा कैश मिला. कर्नाटक के हवाला कारोबारी के यहां से करोड़ों की नगदी के अलावा 31 किलो के सोने के गहने भी मिले हैं, गोवा और कर्नाटक की इनकम टैक्स टीम की संयुक्त कार्रवाई अब भी जारी है. दिल्ली में एक वकील के पास से १३.६५ करोड़ की बरामदगी हुई है. यह सब छपे पहले भी मारे जा सकते थे.
खैर जो भी हो अगर बेईमानों, काले धन वालों को सजा मिलती है और सिस्टम सुधरता है तब भी जनता आपको समर्थन देती रहेगी. सिस्टम को सुधारिए, संसद को सुधारिए, लोग अपने आप सुधर जायेंगे. अगर राजनीति साफ-सुथरी हो जायेगी, बड़े-बड़े अफसर संकल्प ले लें, तो सभी भारतीय अपने आप सुधर जायेंगे. गंगा ऊपर से नीचे की तरफ बहती है. यही गंगा आस पास के सभी किनारों को संतुष्ट करती हुई आगे बढ़ती है. आप अगर अपना उदाहरण प्रस्तुत करेंगे तो निश्चित ही पूरा देश बदलेगा. एक टी एन शेषण ने चुनाव सुधार करने का बीड़ा उठाया और आज चुनाव प्रणाली काफी साफ सुथरी हुई है. आप भी ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कीजिये. जय हिन्द! जय भारत!

-    जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

Saturday, 3 December 2016

नोट बंदी की सफलता पर मोदी

यूं तो नोटबंदी के बाद हर प्रकार की प्रतिक्रिया देखने को मिली है. कालेधन वाले और विपक्षी दल खासे परेशान नजर आ रहे हैं. जनता जो बैंक और एटीएम की लाइनों में लगी है, वह अभीतक नोटबंदी के समर्थन में खड़ी दीख रही है, हालाँकि कैश(नगदी) की कमी और अव्यवस्था के चलते लगभग सौ लोगों को अपनी जानें भी गंवानी पड़ी है. मीडिया ने अच्छी कवरेज दिखाई है. लोग परेशान हैं पर मोदी के फैसले के साथ हैं. इन सब गतिविधियों से प्रधान मंत्री श्री मोदी काफी उत्साहित हैं और उन्होंने मुरादाबाद की रैली तथा अन्य जगहों पर अपने विचार व्यक्त किये हैं. आइये डालते हैं उपर एक नजर.  
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन रैली को सम्बोधित करते हुए मुरादाबाद में शनिवार को विरोधियों पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने नोटबंदी के फैसले पर लोगों के समर्थन का दावा करते हुए आज सोशल मीडिया पर आए संदेश में एक भिखारी का जिक्र किया, जो भीख के पैसे डेबिट कार्ड से लेने को कहता है. मोदी ने कहा, ”व्हाटस ऐप पर किसी ने दिखाया कि कोई भिखारी कार में भिक्षा मांगने गया. कार में जो बैठे थे, उन्होंने कहा कि छुटटे पैसे नहीं है, हालांकि हम तेरी मदद तो करना चाहते हैं. इस पर भिखारी बोला कि चिन्ता मत करो. उसने स्वाइप मशीन निकाली और कहा डेबिट कार्ड दे दो, मैं ले लेता हूं.(क्या सचमुच देश बदल रहा है? और इतना कि भिखारी के पास भी स्वाइप मशीन हो?)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां शनिवार को कहा कि जनधन खाते में अमीर पैसा जमा कर रहे हैं. कोई अमीर कितना ही दबाव बनाए, जनधन खाते से पैसा मत निकालिए, क्योंकि ऐसा कोई रास्ता निकालूंगा कि वो पैसा गरीबों का हो जाए और जिसने जमा कराया, उसे जेल जाना पड़ेगा. पीएम ने कहा कि इस देश में 70 साल से चली आ रही भ्रष्टाचार की बीमारी को खत्म करने के लिए कैशलेस ट्रांजेक्शन को अपनाना होगा. पिछली सरकारों ने नोट छाप-छाप कर इस देश में भ्रष्टाचार को बढ़ाया है. अब ऐसा नहीं होगा. जैसे आप वाट्सएप से मैसेज भेजते हैं, वैसे ही आप ट्रांजेक्शन भी कर सकते हैं. (सचमुच आसान  है, कैशलेस ट्रांजेक्शन?)
ज्ञात हो कि इसके पहले मोदी 14 नवंबर को गाजीपुर में, 20 नवंबर को आगरा और 27 नवंबर को कुशीनगर में परिवर्तन रैली की थी. कमोबेस हर रैली में उन्होंने नोटबंदी   के समर्थन में ही अपने कदम को सराहा है. भारत को बेईमानोंसे मुक्ति दिलाने का संकल्प दोहराते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी के बाद बैंकों और एटीएम के आगे लंबी कतारें लगने पर आज कहा कि मिटटी का तेल और चीनी के लिए 70 साल से कतारें लगा रही जनता से वह आखिरी बार कतार लगवा रहे हैं. देश को नकद लेनदेन से मुक्ति दिलाने का आहवान करते हुए मोदी ने मोबाइल के जरिए खरीद फरोख्त करने का सुझाव दिया और नौजवानों से अपील की कि वे देशवासियों को मोबाइल के जरिए लेनदेन करना सिखायें.
उन्होंने ने कहा- “कानून का उपयोग करके बेईमान को ठीक करना होगा. भ्रष्टाचार को ठिकाने लगाना होगा.उन्होंने पूछा, अगर कोई ये काम करता है तो वह गुनाहगार है क्या? कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ लडता है तो गुनाहगार है क्या? मैं हैरान हूं कि आजकल मेरे ही देश में कुछ लोग मुझे गुनाहगार कह रहे हैं. क्या मेरा यही गुनाह है कि भ्रष्टाचार के दिन पूरे होते जा रहे हैं? क्या यही मेरा गुनाह है कि गरीबों का हक छीनने वालों को अब हिसाब देना पड रहा है? हिन्दुस्तान की पाई-पाई पर अगर किसी का अधिकार है तो सवा सौ करोड़ देशवासियों का है. मैं आपके लिए लड़ाई लड़ रहा हूं. ज्यादा से ज्यादा (विरोधी) मेरा क्या कर लेंगे ? हम तो फकीर आदमी हैं, झोला लेकर चल पडेंगे. ये फकीरी है, जिसने मुझे गरीबों के लिए लडने की ताकत दी है. (अगर सचमुच ऐसा हुआ तो मोदी को जीवन पर्यंत प्रधान मंत्री बने रहने से कोई नहीं रोक सकता – ऐसा मेरा मानना है)
मोदी ने कहा कि पहले नोटें छपती थीं और महंगाई बढ़ रही थी और नोटों के बंडल कहीं छिप जाते थे. “मैं अभी पीछे लगा हूं आपने देखा होगा- कुछ लोग तो गरीबों के पैर पकड़ रहे हैं. ऐसा करो कि मेरा दो तीन लाख रूपये खाते में डाल दो. कभी किसी अमीर को गरीब के पैर पकड़ते नहीं देखा था. आज जिन बेईमान लोगों ने पैसा जमा किया है वो गरीबों के घर पर भी कतार लगाकर खड़े हैं. बैंक के बाहर तो वो कतार लगाता है जिसमें ईमानदारी का माद्दा होता है. बेईमान गरीबों के घर के बाहर चोरी चुपके कतार लगाये हुए हैं.
उन्होंने जनधन खाताधारकों से अपील की कि जितने पैसे उनके बैंक में आये हैं, कोई कितना भी दबाव डाले उसे नहीं निकालें. अगर रखे रखा तो मैं कोई रास्ता खोजूंगा. मैं दिमाग लगा रहा हूं अभी. दिमाग खपा रहा हूं. गरीब के खाते में जिन्होंने गैर कानूनी ढंग पैसा से डाला है वो जाए जेल में और गरीब के घर में जाए रूपया.
मोदी बोले, मैं हैरान हूं. आपने देखा होगा अच्छे-अच्छे लोगों के चेहरे से चमक चली गयी है. पहले पूरा दिन मनी-मनी करते थे अब मोदी, मोदी बोल रहे हैं. मैं देशवासियों को फिर कहता हूं कि आपको कष्ट हो रहा है और देश के लिए आप कष्ट झेल भी रहे हैं. लोग आपको आकर भड़काने की कोशिश करते हैं.
उन्होंने कहा, ”लोग दो तीन घंटे से खडे हैं. बैंक पैसा नहीं दे रहा है लेकिन कोई गुस्सा नहीं कर रहा है क्योंकि देश की जनता के इरादे नेक हैं. जनता को पता है कि ये ईमानदारी का प्रयास है. जब विश्वास हो जाता है तो ये देश कुछ भी सहने को तैयार होता है, ये मैंने अनुभव किया है.मोदी ने कहा कि देश में ऐसी हवा बन गयी थी कि सरकार नाम की कोई चीज नहीं है. नेताओं की जेब भर दो, काम चल जाएगा. अब वो नहीं चलेगा. पुराने रास्ते बंद हो चुके हैं. असहाय लोगों को आज लगने लगा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई को जीतना है. उन्होंने कहा, ”मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि आपने जो मेहनत की हैघंटों कतार में बिना खाये पिये खड़े रहे हैंमैं मेरे देशवासियों की तपस्या को बेकार नहीं जाने दूंगा. ईमानदारी के जितने रास्ते मुझे सूझेंगे, मैं देश को उस रास्ते पर ले जाने के लिए कोई कमी नहीं रहने दूंगा, ये विश्वास दिलाना चाहता हूं.
मोदी ने नोटबंदी से किसानों को समस्या होने की विपक्ष की दलील को खारिज करते हुए कहा,  मैं किसानों का विशेष रूप से वंदन करना चाहता हूं कि तकलीफ के बावजूद बुवाई में कमी नहीं आयी. पिछले साल से बुवाई बढी है. वो (विरोधी) भ्रम फैला रहे हैं और निराशा का वातावरण पैदा कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि देश सशक्त है और देश का नौजवान सशक्त है. जिस देश के पास 65 प्रतिशत लोग 35 साल से कम उम्र के हों वो नौजवान देश को कहीं से कहीं पहुंचा सकता है. देश के सही विकास के लिए उत्तर प्रदेश की गरीबी हटाना बेहद जरूरी है.  “हम चाहते हैं कि हिंदुस्तान से गरीबी मिटनी चाहिए. भारत से गरीबी मिटनी चाहिए, बड़े प्रदेश से गरीबी खत्म हो तो देश की गरीबी कम होगी. गरीबी को मिटाना है तो बड़े राज्यों यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल से गरीबी मिटानी होगी.
अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि बहुत सारे अर्थशास्त्रियों के साथ मनमोहन सिंह ने भी कहा कि नोट बंदी से जीडीपी की दर में कम से कम २% तक की गिरावट आयेगी. कैश की कमी की वजह से छोटे-छोटे उद्योग-धंधे प्रभावित हुए हैं. देहारी मजदूर पलायन कर रहे हैं. बेरोजगारी बढ़ रही उत्पादन और बिक्री पर भी प्रभाव पड़ा है. इसका खामियाजा भी देश को भुगतना पड़ेगा. नकली नोट भी पकडे जा रहे हैं. भाजपा सहित कई नेताओं के पास से भी काला धन और नए नोटों की गड्डियाँ बरामद हो रही है. आयकर विभाग सक्रिय है. बैंक के अधिकारी भी गलत काम करने के जुर्म में सस्पेंड हो रहे हैं. कई अफसर, ब्यापारी, डॉक्टर, आदि निशाने पर हैं. अगर परिणाम अच्छे हुए तो जरूर मोदी प्रशंशा के पात्र होंगे. पर अगर सकारात्मक नतीजे नहीं निकले तो फिर जनता भी उन्हें माफ़ करनेवाली नहीं. अत: मोदी जी सहित सभी रणनीतिकारों को हर कदम सम्हाल सम्हाल कर रखना होगा.  जनता को परेशानी कम से कम हो, इसके लिए उन्हें हरसंभव कोशिश करनी होगी. राज्य सरकारों के साथ विभिन्न कार्यकर्ताओं को भी जनता की मदद करनी होगी. वित्त मत्रालय के साथ आरबीआई तथा बैंकों को पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ अपने काम करने होंगे. ‘कैशलेस  ट्रांजैक्सन’ से फायदा सबको होगा. सरकारों को भी राजस्व वसूली में आसानी होगी. काला धन बढ़ने की संभावना भी कम से कम होगी. अर्थात अंतिम फल अच्छा होगा.

-    जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

Saturday, 26 November 2016

नोटबंदी - आर्थिक सुधार में सहायक

आठ नवंबर की रात आठ बजे जब प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का ऐलान किया था तब मुझ जैसा  मध्यमवर्गीय, टैक्स देने वाला हर शख्‍स प्रसन्न था. क्योंकि प्रधानमंत्री के इस निर्णय पर बहुत सारी बहस और स्टोरी देख कर मैं और मेरे जैसा हर व्‍यक्ति थक चुका था!
एक चिंता मन में ब्याप्त गयी – मेरी पत्नी और मेरी पुत्री घर से बाहर कोलकाता में थी. वहां से उसे एक शादी समारोह में भाग लेने जाना था. छुट्टी के अभाव में मैं साथ नहीं जा सका था. पर उन लोगों को मैंने १००० और ५०० के ही अधिकतर नोट देकर विदा किया था. ट्रेन टिकट तो ऑन लाइन हो गया था, पर टैक्सी, आदि के लिए अन्य खर्चों के लिए उनके पास पर्याप्त सौ के और खुदरे नोट थे या नही चिंता सताने लगी. उनलोगों से मैंने संपर्क साधा और बताया. उन्हें तो इस बात की भनक भी न थी. जैसे भी उनलोगों ने अपने पास के खुदरे पैसे से काम चला लिया. शादी समारोह में गिफ्ट आदि में बड़े नोट ही दे दिए गए. आखिर क्या किया जा सकता था. दूसरे दिन बैंक एटीएम भी बंद थे.
काले धन वालों का तो पता नहीं पर आम आदमी की हालत देख लगा क्या फ़ैसला लेते समय इन को भूल तो नहीं गए थे? या ऐसा दृश्य सोचा नहीं था. धीरे धीरे ज्यों-त्यों गुज़रती ख़बरों के बीच यह ख़बर रुकने का नाम नहीं ले रही है. लंबी क़तारें, शादियों की चिंता, बंद पड़ी दुकानें मेरी ख़ुशी को दिनोंदिन फीका कर रही है. सारा ध्यान अचानक से काले धन से निकल एक आम आदमी की हालत पर आ गया. कुछ लोगों से पता चला कि बहुत सारे लोग बड़े लोगों के लिए लाइन में खड़े थे और नियमानुसार ४००० के नोट बदली करा रहे थे. इसके लिए उन्हें एक निर्धारित रकम मिलती थी. यह भी एक कारण था, बैंकों में बड़ी कतार का. अब यह जान कर लगा क्या बड़े लोग वाक़ई इस बदलाव से परेशान हैं? क़तारें मजबूरी में लगीं हैं या पैसे के बदले, हैं तो दूर दूर तक. अब जानना यह है कि रोज के बदलाव क्या जनता को और परेशान करेंगे या संतुष्ट?अब बार बार अपनी ही ख़ुशी से मेरा सवाल है कि क्या वाक़ई में ख़ुश हैं हम? सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ नहीं हूं पर जहां तक नज़र जाए वहां तक लंबी भीड़ की एक आवाज़ सुनाई देती है, ख़ुशख़बरी क्या ऐसी होती है?
नोटबंदी से प्रभावित गरीबों के लिए विशेष राहत कदमों का आह्वान करने के बाद प्रमुख उद्योगपति रतन टाटा ने शनिवार(२६ नवम्बर) को सरकार के नोटबंदी के कदम को तीन सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों में से एक बताया, जिससे कालेधन का मुकाबला करने में मदद मिलेगी. टाटा ने ट्विटर पर लिखा कि सरकार के नोटबंदी के साहसिक क्रियान्वयन को देश के समर्थन की जरूरत है. 'नोटबंदी भारत के इतिहास में किए गए तीन सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों में से एक है. दो अन्य प्रमुख आर्थिक सुधारों में लाइसेंस राज का खात्मा और जीएसटी है’. टाटा ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में मोबाइल और डिजिटल भुगतान पर जोर दिया है. इससे भी हमारी अर्थव्यवस्था को नकदी-चालित अर्थव्यवस्था से नकदीविहीन अर्थव्यवस्था में बदलने में काफी मदद मिलेगी. 'कालेधन से मुकाबला करने और इससे लड़ने के लिए सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को देश भर के समान सोच वाले लोगों का समर्थन और सहयोग मिलना चाहिए. प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का बड़ा कार्यक्रम शुरू कर कालेधन की अर्थव्यवस्था के खिलाफ लड़ाई छेड़ने का काफी बड़ा साहस दिखाया है.' टाटा ने पिछले दिनों सरकार से नोटबंदी के बाद गरीबों को हो रही तकलीफ को देखते हुए विशेष राहत उपाय करने का आग्रह किया था.
पारदर्शिता हर मामले में ही काबिल-ए-तारीफ नहीं होती. सेना या खुफिया एजेंसियों के कामकाज को देश के लोगों से छिपाकर रखा जाता है. काले धन को बाहर निकालने का काम भी सेना और खुफिया एजेंसियों जैसा बनाना पड़ा. नोटबंदी की तैयारी खुफिया तरीके से की गई. हालांकि अभी इस बात पर विवाद है कि तैयारी वाकई की गई थी या नहीं, लेकिन इसे बताने के लिए सरकार ने मीडियातंत्र का जिस हुनरमंदी से इस्तेमाल किया, उसकी तारीफ ज़रूर की जानी चाहिए. दो हफ्ते के भीतर ही आज़ाद भारत के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व सिद्ध हो गई है. राष्ट्रहित के बैनर पर मीडिया ने सरकार से भी दो कदम आगे आकर जिस तरह नोटबंदी को सराहा है, और एक राष्ट्रभक्त कार्यकर्ता की तरह सरकार का साथ दिया है, उसे सिर्फ देश में नहीं, पूरी दुनिया में बड़े कौतूहल से देखा गया होगा.
नोटबंदी के लगभग तीन सप्ताह बाद भी देश में जिस तरह का धूम-धड़ाका मचा हुआ है, उसे देखते हुए कोई भी कह सकता है कि इस फैसले को लागू करने के लिए जो तैयारी की जानी ज़रूरी थी, वह नहीं की गई थी. इस पर कोई विवाद इसलिए भी नहीं है कि खुद सरकार ने माना है कि गोपनीयता बनाए रखने के लिए बैंक और एटीएम की व्यवस्था नहीं बनाई जा सकती थी. ज़ाहिर है, सरकार ने सोच लिया था कि जो होगा, उसे मौका-ए-वारदात पर ही निपटा दिया जाएगा. 130 करोड़ की आबादी वाले देश में इतना सनसनीखेज़ काम चालू करने में किसी सरकार का ऐसा जबर्दस्त अति-आत्मविश्वास हमें फिर सरकार की तारीफ करने को प्रेरित करता है. देश के हर तबके को कितनी भी परेशानी हुई हो, लगभग दो हफ्तों में नोटबंदी का आधा काम तो सरकार ने निपटा ही लिया है.
काला धन, अपराध-धन, भ्रष्टाचार, समांतर अर्थव्यवस्था का खात्मा वगैरह ऐसे शब्द हैं, जिन्हें नोटबदी के फैसले के केंद्र में रखकर सरकार ने क्रांति का उद्धोष किया. दरअसल, बहुत सारे लक्ष्यों को एक साथ देखना ज़रा मुश्किल होता है, लिहाजा इन सारे लक्ष्यों को एक ही शब्द में समेटा गया था, जिसे राष्ट्रहित या राष्ट्र का नवनिर्माण नाम दिया गया. इसका चमात्कारिक प्रभाव यह हुआ कि नोटबंदी के फैसले की समीक्षा हो सकने की सारी संभावनाएं खत्म हो गईं. राष्ट्रहित के काम के बारे में आमजन तो क्या बोल सकते हैं, एक से बढ़कर एक विद्वान भी नोटबंदी पर होठबंदी करने को विवश हो गए. जिन बातों को कहना ही खतरे से खाली न हो, उसके बारे में सोचना किसलिए. इसी का नतीजा है कि नोटबंदी के फैसले पर विशेषज्ञ और विद्वान इसके गुण-दोषों के बारे में सोचने तक से परहेज़ कर रहे हैं.
1,000 और 500 के पुराने नोटों की कुल रकम 14,20,000 करोड़ की है. अब तक के 15 दिन का मोटा-मोटा अनुमान यह है कि छह लाख करोड़ के पुराने नोट देशवासियों ने रात-रातभर बैंकों के सामने लंबी-लंबी लाइनों में जूझते हुए जमा कराए हैं. ये लोग अपनी पुरानी जमा रकम निकालकर और अपने पुराने नोट बदलकर जो नए नोट और पुराने 100-100 के नोट ले पाए हैं, वह लगभग सवा लाख करोड़ ही है. व्यापार और दूसरे कामकाज के लिए नोटों का भारी टोटा पड़ा हुआ है. दो हफ्ते में ही सकल घरेलू उत्पाद को लगभग 10 लाख करोड़ की तात्कालिक चपत लग चुकी है. सरकारी अर्थशास्त्री बोलते समय फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं.
हालाँकि सरकार एक और मौका दे रही है काले धन वालों को ५० % टैक्स देकर आप अपने काले धन को सफ़ेद कर सकते हैं, कुछ अन्य शर्तों के साथ. इसके लिए हो सकता है संसद में बिल ले जाय!
चाहे जो हो लोगों ने काफी तकलीफें झेलकर भी मोदी जी के इस पहल को स्वीकार है और मीडिया तथा विपक्षी पार्टियों के चढ़ाने पर भी अपना संयम नहीं खोया है. मोदी जी ने इसके लिए जनता को धन्यवाद भी कहा है.  जन धन खातों का भी गलत इस्तेमाल हो रहा है, नए २००० के जाली नोट भी छपने चालू हो गए हैं, कहीं कमीशन लेकर पुराने नोट बदले जा रहे हैं. इस सब पर सरकार को पैनी दृष्टि रखनी होगी. आम आदमी की परेशानी कम-से-कम हो इसका विशेष ख्याल रखना होगा. मोदी जी के इस कदम का स्वागत हर तबके के लोगों ने किया है और दूसरे देशों में भी इस कदम की सराहना की जा रही है. जय मोदी! जय हिन्द!

-    जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.