Saturday, 27 July 2019

ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी की मार


ख़बरों के अनुसार घरेलू वाहन बनाने और बेचने वाली कंपनी टाटा मोटर्स को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 3,679.66 करोड़ रुपये का शुद्ध एकीकृत घाटा हुआ है. इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कंपनी को 1,862.57 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. कंपनी ने हाल ही में  शेयर बाजार को यह जानकारी दी. कंपनी ने बताया कि समीक्षावधि में उसकी कुल आय 61,466.99 करोड़ रुपये रही जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 66,701.05 करोड़ रुपये थी. समीक्षावधि में कंपनी की कुल बिक्री 22.7 फीसद घटकर 1,36,705 इकाई रही. कंपनी की ब्रितानी इकाई जगुआर लैंड रोवर का कर पूर्व नुकसान 39.5 करोड़ पौंड (करीब 3408.91 करोड़ रुपये) रहा जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 26.4 करोड़ पौंड (करीब 2278.36 करोड़ रुपये) था. एकल आधार पर कंपनी 97.10 करोड़ रुपये के शुद्ध नुकसान में है. जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कंपनी को एकल आधार पर 1,187.65 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था. बीएसई पर कंपनी का शेयर गुरुवार को 4.56 फीसद टूटकर 144.35 रुपये पर बंद हुआ.
जमशेदपुर स्थित टाटा मोटर्स के अधिकांश पार्ट और छोटे-मोटे कल-पुर्जे जमशेदपुर के ही  आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित छोटे और मंझोले स्तर की कंपनियां बनाती हैं. ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी का असर उन कंपनियों पर भी पड़ा है और ३० हजार से ज्यादा कामगार अभी बेरोजगार हो गए हैं.
वाहन कलपुर्जा विनिर्माताओं के अखिल भारतीय संगठन एक्मा(Automotive Component Manufacturing Association of India) ने वाहन क्षेत्र के लिए माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की दर एक समान 18 प्रतिशत करने का अनुरोध किया है, ताकि पूरे वाहन उद्योग में मांग को बढ़ाया जा सके जिससे करीब 10 लाख नौकरियां बचाने में मदद मिलेगी. अभी वाहन बिक्री में लगातार मंदी रहने की वजह से यह नौकरियां दांव पर लगी हैं. वाहन कलपुर्जा उद्योग करीब 50 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है. एक्मा ने बैटरी चालित वाहनों की नीति को भी स्पष्ट करने के लिए कहा है.
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एक्मा) के अध्यक्ष राम वेंकटरमानी ने कहा, 'वाहन उद्योग अभूतपूर्व मंदी का सामना कर रहा है. हर श्रेणी में वाहनों की बिक्री पिछले कई महीनों से भारी दबाव का सामना कर रही है.' उन्होंने कहा कि वाहन कलपुर्जा उद्योग की वृद्धि पूरी तरह से वाहन उद्योग पर निर्भर करती है. मौजूदा स्थिति में वाहन उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत की कटौती हुई है जिससे कलपुर्जा उद्योग के सामने संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने कहा, 'यदि यही रुख जारी रहता है तो करीब 10 लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं.' वेंकटरमानी ने कहा कि कुछ स्थानों पर छंटनी का काम शुरू भी हो चुका है.
जीएसटी प्रणाली के तहत पहले से ही करीब 70 प्रतिशत वाहन कलपुर्जों पर 18 प्रतिशत की दर से कर लग रहा है. जबकि बाकी बचे 30 प्रतिशत पर 28 प्रतिशत जीएसटी है. इसके अलावा वाहनों पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ उनकी लंबाई, इंजन के आकार और प्रकार के आधार पर एक से 15 प्रतिशत का उपकर भी लग रहा है. उन्होंने कहा कि मांग में कमी, भारत स्टेज-4(बीएस-4)  से भारत स्टेज-6(BS- 6)  उत्सर्जन मानकों के लिए हाल में किए गए निवेश, ई-वाहन नीति को लेकर अस्पष्टता से वाहन उद्योग का भविष्य अनिश्चित दिख रहा है और इस वजह से भविष्य के सभी निवेश रुक गए हैं. वेंकटरमानी ने कहा, 'सरकार की ओर से तत्काल हस्तक्षेप किए जाने की जरूरत है. हमारी ठोस मांग है कि वाहन और वाहन कलपुर्जा क्षेत्र को 18 प्रतिशत जीएसटी दर के दायरे में लाया जाएगा.'
संगठन ने इसके अलावा स्थिर इलेक्ट्रिक वाहन नीति की जरूरत बतायी. वेंकटरमानी ने कहा कि ई-वाहन को पेश करने के लक्ष्य में और कोई भी बदलाव करने से देश का आयात बिल बढ़ेगा जबकि देश के मौजूदा कलपुर्जा उद्योग को भारी नुकसान होगा.
वैसे कमोबेश हर क्षेत्र में ही मंदी का माहौल है, पढ़े लिखे युवा बेरोजगार हैं या बहुत कम वेतन पर गुजारा कर रहे हैं. सीधी सी बात है कि अगर आमदनी नहीं होगी तो क्रय-शक्ति कहाँ से बढ़ेगी. क्रय-शक्ति नहीं बढ़ेगी तो मांग में गिरावट आयेगी और मंदी की मार झेलनी ही पड़ेगी. इधर मानसून की देरी से और वर्षा की कमी से बिहार, झारखण्ड के अधिकांश हिस्से सुखाड़ की चपेट में हैं. खरीफ की बुवाई नहीं हो पाई है. तो किसानों की आमदनी में भी कमी और उत्पाद की कमी से जिंसों के दाम बढ़ने की पूर्ण संभावना है. कृषि उत्पाद में मंदी से कृषि कार्य में लगने वाले संसाधनों की खपत में भी कमी आयेगी. यानी परेशानी ही परेशानी. उधर उत्तर बिहार और असम में बाढ़ के कारण लाखों लोग बेघर हुए हैं. आपदा चारो तरफ है. पानी की किल्लत की समस्या दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है. जंगलों के कटने से प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है और जलवायु परिवर्तन का असर लगभग पूरे विश्व में है.
हम चाहे चाँद पर चले जाएँ या मंगल ग्रह पर रोटी, कपड़ा और मकान की आवश्यकता रहेगी ही. ऊपर से जनसंख्या का दिन-प्रतिदिन बढ़ते जाना समस्या को बढ़ाता ही है. समस्या है तो समाधान भी है और समाधान के लिए सरकार के साथ-साथ समाज और हर व्यक्ति को सोचना होगा और समाधान निकालने का हर संभव प्रयास करना ही होगा.
दूसरे विकासशील और विकसित देश की सरकारें और वहां की जनता भी देश के उत्थान के बारे में चिंतित और प्रयत्नशील रहती हैं. वैसे ही हम सबको जागरूक होकर प्रयत्न करना होगा. गैरजरूरी और विवादित मुद्दों पर ज्यादा ध्यान न देकर आनेवाले कल की क्या तस्वीर होनेवाली है, इसपर विचार करना ही होगा.
कृषि और किसान हमेशा से उपेक्षित रहा है जबकि इनपर ही हम सभी अवलंबित हैं. कृषि पर अनुसन्धान और उसका जमीनी स्तर तक क्रियान्वयन जरूरी है. कम समय में, कम लागत पर फसलें कैसे अधिक उपजाई जाय, इसपर अनुसन्धान जरूरी है. साथ ही कृषकों को उसके उत्पाद की सही कीमत मिले यह भी जरूरी है, अन्यथा बहुत सारे किसान या तो आत्महत्या कर रहे हैं या कृषि कार्य से विमुख होकर शहर की तरफ कोई रोजगार के लिए भाग रहे हैं.
मेरा निवेदन तमाम अर्थशास्त्रियों, वैज्ञानिकों, राजनीतिज्ञों और समाजशास्त्रियों से है कि सब लोग मिल बैठकर समस्या का हल ढूढें और देश को प्रगति के पथ पर आरूढ़ करें. तभी हमारा देश समृद्ध संपन्न और विश्वगुरु बनने की तरफ बढ़ेगा. अपराध पर लगाम लगेगा. तमाम बेरोजगार लोग ही गलत कार्यों में लगाये जाते हैं, वे ही नक्सली या आतंकवादी बनते हैं. इसलिए चाहिए हर हाथ को काम और उचित मजदूरी. आप अगर अपने काम में व्यस्त हैं तो गलत काम की तरफ झुकाव नहीं होगा. अन्यथा ‘खाली मन शैतान का घर’ होता है यह तो सभी जानते हैं. ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया’ यही तो हमारे धर्म ग्रंथों में कहा गया है. यही हम प्रार्थना भी करते हैं. आइये हम सब मिलकर भारत को समृद्ध और संपन्न बनायें. आपसी सौहार्द्र का वातावरण बनायें और प्रेम को बढ़ावा दें. प्रेम अमूल्य वरदान है जो हम सबको आपस में जोड़े रखता है.
जय हिन्द! जय भारत! वन्दे मातरम!
जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर  

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