Saturday, 22 June 2019

बुद्धा स्मृति पार्क, पटना


बिहार की राजधानी पटना बहुत सारे मामलों में कुछ खास है. यहाँ रेलवे स्टेशन पर जैसे ही उतरेंगे आपको बहुत ही खूबसूरत और ऊंचा श्री महावीर हनुमान मंदिर मिलेगा. वहां आपको लिखा हुआ दिख जाएगा- प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥.
इस प्राचीन हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण उस १९८०-८५ में तत्कालीन पटना पुलिस के पुलिस अधीक्षक श्री किशोर कुणाल के संरक्षण में हुआ था. अभी भी वे महावीर मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष हैं. इस मंदिर में दर्शन हेतु हर समय भीड़ रहती है.
पटना रेलवे जंक्शन के पास ही 22 एकड़ ज़मीन पर 125 करोड़ रुपए की लागत से बना बुद्ध स्मृति उद्यान है। इसके मध्य में 200 फ़ीट ऊँचा एक स्तूप बनाया गया है। इसमें छह देशों से लाए गए बुद्ध अस्थि अवशेष' की मंजुषाएं रखी गई हैं। २७ मई 2010  को बुद्ध पूर्णिमा के दिन के दिन तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा ने इसे जनता को समर्पित किया। उन्होंने इसके अन्दर स्थापित स्तूप को पाटलिपुत्र करुणा स्तूप’ का नाम दिया। यह दुनिया भर के बौद्ध पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यह उद्यान बांकीपुर जेल परिसर के जगह पर ही बनाया गया है जब बांकीपुर जेल को बेउर जेल में स्थानांतरित कर दिया गया. इस उद्यान को विकसित करने में नीतीश कुमार का महत्वपूर्ण रोल है. उन्होंने ही इसके उद्घाटन के समय दलाईलामा को आमंत्रित किया और उनके हाथों बोधिवृक्ष का पौधा भी लगवाया. एक पौधा बोधगया का है और दूसरा श्रीलंका से मंगवाया गया था. दोनों बोधिवृक्ष के बीच में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है.
पार्क में मेडिटेशन सेंटर, पार्क ऑफ मेमोरी, म्यूजियम, लेजर शो, बोधि ट्री, लाइब्रेरी और बांकीपुर जेल के अवशेष के अलग-अलग खंड हैं। विपश्यना मेडिटेशन सेंटर विशेष आकर्षण है। बुद्ध म्यूजियम खूबसूरत गुफानुमा बनाया गया है। यह सहसा बराबर की गुफाओं की याद दिलाता है। इसमें बुद्ध और बौद्ध धर्म से जुड़ी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया है।
बुध्द स्मृति पार्क को बिहार सरकार द्वारा विकसित किया गया है, वहीं इस पार्क का उद्धाटन तिब्बत के धार्मिक गुरु 14वें दलाई लामा के द्धारा 27 मई, साल 2010 में बुध्द की 2554 वीं जयंती के मौके पर किया गया था, वहीं इस पार्क के उद्दघाटन के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार भी मौजूद थे। इस भव्य और आर्कषक पार्क की डिजाइन आर्किटेक्ट विक्रम द्वारा तैयार की गई थी। वहीं पिछले कुछ सालों में बुद्धा मेमोरियल पार्क महात्मा बुध्द के जीवन और उनके उपदेशों के बारे में समझने के लिए एक आधुनिक उत्कृष्ट पार्क के रुप में उभरा है। यह सभी धर्म और जाति के लोगों के लिए एक अच्छा धार्मिक पर्यटक स्थल है, जहां के मनोरम वातावरण में लोगों को सुख-शांति का अनुभव होता है। आपको बता दें कि बुध्द स्मृति पार्क के परिसर में 200 फीट ऊंची पाटलिपुत्र करुणा स्तूप, आनंद बोधि वृक्ष, लाइब्रेरी, म्यूजियम, मेडिटेशन सेंटर, स्मृति बाग और भगवान बुध्द की प्रतिमा बनी हुई है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं, बुद्धा मेमोरियल पार्क परिसर में बनी इस सभी इमारतों के बारे में हम आपको नीचे बता रहे हैं
पाटलिपुत्र करुणा स्तूप’ – इस भव्य बुध्द स्मृति पार्कके बीच में बनी 200 फीट ऊंचाई वाली यह स्तूप यहां की सबसे प्रमुख संरचना है। गोल आकार की इस पाटलिपुत्र करुणा स्तूप का निर्माण, परंपरा और आधुनिकता का एक सुखद मिश्रण है। यह स्तूप शाक्यमुनि बुध्द के पवित्र अवशेषों को पता लगाने वाला मुख्य स्तूप है। वहीं इस स्तूप के परिक्रमा के लिए एंबुलेटरी रास्ता है, जो इस स्तूप के सबसे ऊंचाई तक ले जाने में पर्यटकों की मदद करता है। आपको बता दें कि इस स्तूप में बुध्द की 6 देशों से लाई गए अस्थि अवशेष की मंजुषाएं भी रखी गई हैं। बुध्द के अवशेष स्तूप की कांच की वातानुकूलित संरचना के अंदर सुरक्षित तरीके से रखे गए हैं, जिसे आसानी से पर्यटकों द्धारा देखा जा सकता है। यहाँ बैठकर आप ध्यान भी लगा सकते हैं. जापान, म्यांमार, साउथ कोरिया, तिब्बत, श्री लंका, थाइलैंड से लाए गए पवित्र अवशेष भी यहां पर्यटकों द्धारा देखे जा सकते हैं। वहीं इस 200 फीट ऊंचाई वाली पाटलिपुत्र करुणा स्तूपको पर्यटकों द्धारा खूब पसंद किया जाता है, यह स्तूप इस पार्क का मुख्य आकर्षण है।
मेडिटेशन सेंटर (ध्यान केन्द्र) पटना के इस भव्य बुध्द स्मृति पार्क के मेडिटेशन सेंटर में 60 वातानुकूलित कक्ष हैं, हर कक्ष में इस तरह खिड़की बनाई गई है, जहां से पाटिलपुत्र करुणा स्तूप दिखाई देती है। आपको बता दें कि इस भव्य बुद्धा मेमोरियल पार्क में मेडिटेशन सेंटर बनाने का आइडिया विश्व धरोहर नालंदा के प्राचीन महाविहार के मठों से लिया गया है। बुद्धि स्मृति पार्क के इस मेडिटेशन सेंटर में एक लाइब्रेरी है, जिसमें एक बड़े ऑडियो-विजुलअल हॉल के साथ-साथ बौद्ध धर्म की कई किताबें भी रखी गईं हैं।
म्यूजियम पटना में स्थित इस भव्य बुद्धा मेमोरियल पार्क का अन्य आर्कषण म्यूजियम की बिल्डिंग भी हैं। आपको बता दें कि म्यूजियम बिल्डिंग का मुक्त प्रवाह रुप भारत की प्राचीन गुफा के मठों से लिया गया है। इसमें भगवान बुध्द के जीवन चक्र को 3-डी मॉडल, ऑडियो-विज़ुअल माध्यम और मल्टीमीडिया प्रेजेंटेशन के जरिए दिखाया जाता है। इस म्यूजियम की अद्भुत और शानदार ब्लडिंग का उद्घाटन 13 दिसंबर, साल 2013 में भूटान की राजकुमारी आशी केसांग, वांगमो, वांगचुक ने किया था।
स्मृति बाग बुद्धा मेमोरियल पार्क परिसर का एक अन्य आर्कषण स्मृति पार्क भी है, जो कि खुली जगह में बना हुआ है, इसमें कई अलग-अलग देशों के विशिष्ट और उत्कृष्ट स्तूप हैं, वहीं प्रत्येक स्तूप को विशेष तरीके से डिजाइन किया गया है, जिसकी सुंदरता देखते ही बनती है। यह पार्क इतना विशाल है कि, इसमें एक साथ करीब 5 हजार लोग बैठ सकते हैं। स्मृति बाग, बिहार से लेकर दुनिया के कई क्षेत्रों में बौद्ध धर्म के फैलाव का प्रतीक माना जाता है।
बोधि वृक्ष बिहार के इस मुख्य पर्यटन स्थल बुध्द स्मृति पार्क में पवित्र बोधी वृक्ष भी लगाए गए हैं, जिन्हें महामेघवन अनुराधापुरा, श्रीलंका और बोधगया से लाया गया है। आपको बता दें कि बोधगया से लाया गया बोधी वृक्ष को तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा के द्धारा २७ मई 2010 में लगाया गया है।
बुध्द स्मृति पार्क में अनूठा लेजर शो पटना जंक्शन स्टेशन के पास स्थित इस बुध्द स्मृति पार्क में दिखाया जाने वाला लेजर शो पर्यटकों के बीच काफी मशहूर है। इस लेजर शो में बिहार के गौरवशाली इतिहास, रामायण और महाभारत के समय के महापुरुषों को देखा जा सकता है। महात्मा बुध्द, मगध सम्राज्य, महावीर, विदेशी बौद्ध बिक्षुओं की नालंदा बिहार यात्रा, अशोक का स्वर्ण काल, वीर कुंवर सिंह द्धारा अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध, महान वैज्ञानिक आर्यभट्ट के द्धारा विज्ञान में योगदान, चंपारण युद्ध समेत भारत की आजादी के बाद की सभी झलकियां इस लेजर शो के द्धारा यहां आने वाले आगुंतकों को दिखाई जाती है। यह लेजर शो शाम के वक्त ७ बजे से शुरू होता है, जिसे लोगों द्धारा खूब सराहा भी जाता है। लेज़र शो के फव्वारे के सामने घास से आच्छादित भूमि है जो ऊंची गैलरीनुमा बनी हुई है. यही पर जमीन पर बैठकर लोग लेज़र शो देखते हैं और बिहार के इतिहास पुराण से परिचित होते है साथ ही मनोरंजक संगीत के कार्यक्रम भी चलते रहते है.
आपको बता दें कि पटना के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक इस बुद्धा मेमोरियल पार्क में जापान, म्यांमार, श्रीलंका, साउथ कोरिया, थाइलैंड और भारत जैसे देशों से हर साल हजारों के संख्या पर्यटक यहां सुख, शांति और ज्ञान की प्राप्त के लिए आते हैं।
पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन के पास होने की वजह से यह ख़ास लोकप्रिय है. अगर आप पटना जंक्शन पर किसी ट्रेन का इन्तजार कर रहे हैं और आपके पास दो घंटे का भी समय बचा है तो आप एक साथ महावीर हनुमान मंदिर के साथ बुद्ध स्मृति उद्यान का भी भ्रमण कर सकते हैं. भीड़ भाड़ की जगह में यह पाकृतिक वातावरण प्रदान करता है और आपको स्वच्छ हवा में सांस लेने से स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है. अगर आप ध्यान लगते हैं तो मानसिक शांति भी मिलती है. – जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

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