Saturday, 2 July 2016

तेजस का तेज, ख़बरों का वेग!

जुलाई का महीना खबरों का सैलाब लेकर आया है. सर्वप्रथम खुशखबरी है भारतीय वायु सेना के लिए- वह है तेजस का गृह प्रवेश.
०१ जुलाई २०१६ भारतीय वायुसेना के बेड़े में उस लड़ाकू विमान तेजस का गृह प्रवेश हो गया जिसका इंतजार 30 साल से किया जा रहा था. इसकी रफ्तार, हल्का वजन और दुश्मन को हर हाल में मात देने की क्षमता इस लड़ाकू विमान की खासियत है. सबसे बड़ी बात ये कि देश में तैयार किए गए तेजस की गिनती दुनिया के चंद सबसे खतरनाक लड़ाकू विमानों में हो रही है. भारत में बना अब तक का ये सबसे खौफनाक लड़ाकू विमान तेजस पूरे विधि विधान के साथ भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो गया है. बेंगलुरू के एयरबेस में भारतीय वायुसेना के आला अफसरों की मौजूदगी में नारियल फोड़कर तेजस का गृहप्रवेश कराया गया. इस औपचारिक कार्यक्रम के साथ ही तेजस को बनाने वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल्स लिमिटेड ने पहले दो तेजस विमान सौंप दिए हैं. साल 2016 के आखिर तक 4 और तेजस विमान इन विमानों के लिए बनाई गई फ्लाइंग डैगर्स 45 स्क्वार्डन का हिस्सा बन जाएंगे. फ्लाइंग डैगर्स 45 वही स्क्वार्डन है जो मिग 21 विमानों के लिए बनाई गई थी, लेकिन इसकी ताकत की वजह से अब तेजस मिग-21 विमानों की जगह लेने जा रहा है. तेजस विमान की सबसे बड़ी खासियत है इसका हल्का वजन और इसकी तेज रफ्तार. तेजस फाइटर जेट 2200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आसमान का सीना चीरता है. इसकी वजह ये है कि इसका कुल वजन 6540 किलोग्राम है और हथियारों से पूरी तरह लैस होने पर ये करीब 10 हजार किलोग्राम का हो जाता है जो भारत के दूसरे लड़ाकू विमानों से कम है. तेजस 50 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ने में भी सक्षम है.
तेजस में सिर्फ एक इंजन है और इसमें सिर्फ एक पायलट बैठ सकता है. निचले हिस्से में एक साथ 9 तरह के हथियार लोड और फायर किए जा सकते हैं. इन हथियारों में हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हवा से धरती पर मार करने वाली मिसाइल, हवा से पानी पर हमला करने वाली मिसाइल, हवा से हवा में दूसरे लड़ाकू विमानों को मारने वाली लेजर गाइडेट मिसाइल, रॉकेट और बम से लैस है. तेजस आवाज की दोगुनी रफ्तार से उड़ान भरने वाले तेजस की खूबी ये है कि ये एक बार में 3000 किलोमीटर की दूरी तय करता है. इसमें हवा में ही ईंधन भरा जा सकता है. इसमें अमेरिकी कंपनी जी का ताकतवर इंजन लगाया गया है. इजराइल से खरीदे गई अत्याधुनिक एल्टा रडार तकनीक इस पर दुश्मन के रडारों की नजर नहीं पड़ने देती. यानी ये चुपचाप दुश्मन पर हमला कर देता है. सबसे बड़ी बात ये है कि अगर पायलट विमान पर काबू ना रख पाए तो इसमें लगे कम्प्यूटर खुद विमान को संभाल लेते हैं. भारतीय वायुसेना तेजस को अपने बेड़े का हिस्सा बनने के लिए 30 साल के ज्यादा वक्त से इंतजार कर रही थी. वो सपना अब पूरा हुआ है लेकिन देरी ने तेजस को बेहद महंगा बना दिया है. साल 1983 में 6 तेजस विमानों का अनुमानित खर्च 560 करोड़ आंका गया था. लेकिन अब एक तेजस विमान की कीमत ही 250 करोड़ जा पहुंची है. कुल मिलाकर योजना 120 तेजस विमानों को बेड़े में शामिल करने की है. इसके अलावा नौसेना के लिए 40 तेजस-एन विमान तैयार किए जा रहे हैं. इन 160 तेजस विमानों की कुल कीमत 37 हजार करोड़ से ज्यादा है. भारतीय सेना साल 2018 तक 20 तेजस विमानों को बेड़े में शामिल करेगी. इसके बाद तेजस विमानों की सैन्य टुकड़ी का बेस बैंगलूरू से तमिलनाडु के सलूर में शिफ्ट कर दिया जाएगा.
वायुसेना के बेड़े में तेजस के शामिल होने पर प्रधानमंत्री ने खुशी जताई है. पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘’देसी लड़ाकू विमान तेजस के वायुसेना के बेड़े में शामिल होना खुशी और गर्व की बात है. मैं एचएएल और एडीए को तेजस को तैयार करने के लिए बधाई देता हूं, ये हमारी प्रतिभा, कौशल और रक्षा क्षेत्र में हमारे बढ़ते कदम को दर्शाता है.’’ शत्रु देश सावधान! पर ये विमान बड़े युद्ध में कारगर सिद्ध होंगे जब एक देश दूसरे देश से लड़ेंगे. फिलहाल तो डर कर रहें हमारे दुश्मन! पर आतंकवादियों के संगठन पर अंकुश लगाने की दूसरी ही रणनीति बननी होगी. ये आतंकवादी पूरे विश्व की मानवता के लिए खतरे की घंटी हैअभी हाल ही में बंगला देश में इनके हमले और हैदराबाद में पकड़े गए इनके दल से यह साफ़ पता लगता है कि इन पर अंकुश लगने के लिए इनके आकाओं पर लगाम कसनी होगी और उसके लिए पूरे विश्व को एकजुट होना होगा, अन्यथा परिणाम तो हम सब देख ही रहे हैं.  
इस बीच यह भी खबर आयी कि प्रधान मंत्री ने अपने मंत्रियों की क्लास ली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काम में अनुशासन को लेकर तो हमेशा नसीहत देते हैं. लेकिन इस बार अपने ही मंत्रियों की लापरवाही देखकर मोदी को सख्त होना पड़ा. सरकार के दो साल के कामकाज के रिपोर्टकार्ड पर मोदी ने करीब 5 घंटे की मैराथन बैठक की. इसमें मंत्रियों के अलावा सरकार के बड़े नौकरशाह भी शामिल हुए. देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी नरेंद्र मोदी लगातार सरकार और उसके कामकाज में अनुशासन बनाए रखने और उसे बढ़ावा देने की पैरवी करते रहे हैं. वैसे तो अभी संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने में दो हफ्ते से ज्यादा वक्त है, लेकिन गुरुवार(३० जून) को यहां कुछ ज्यादा ही हलचल दिखी. सरकार के तमाम मंत्री प्रधानमंत्री के साथ लाइब्रेरी हॉल में मौजूद थे जहां मंत्रिपरिषद की बैठक हुई. करीब 5 घंटे तक चली इस बैठक में सभी मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की गई . लेकिन इस समीक्षा बैठक में कुछ ऐसा हुआ जो अब तक सुना नहीं गया था. बैठक में एक के बाद एक सभी मंत्रालयों के कामकाज का प्रेजेंटशन आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांता दास दे रहे थे. इसी दौरान पिछली कतार में बैठे कुछ मंत्रियों का ध्यान वहां से हट गया और ये माननीय मंत्री अपने मोबाइल देखने में लग गए. सूत्रों के मुताबिक प्रेजेंटेशन के बीच मोदी की नजर जैसे ही मोबाइल देख रहे मंत्रियों पर पड़ी वो नाराज हो गए. पीएम मोदी ने मंत्रियों को डांटते हुए कहा कि अगर मोबाइल ही देखना है तो फिर इस बैठक में आने की जरूरत ही क्या है ?
प्रधानमंत्री यहीं नहीं रुके. उन्होंने गुस्से में कहा कि अगर बैठक में की जा रही चर्चा में मंत्रियों की रूचि नहीं है तो बैठक बेमानी है. अगर ऐसा ही रहा तो अगली बैठक में मंत्रियों को अपना मोबाइल बाहर रखकर आने को कहना पड़ेगा. मोदी के डांटते ही प्रेजेंटेशन दो मिनट के लिए रुक गया. जिन मंत्रियों के हाथों में मोबाइल थे उन्होंने या तो टेबल पर रख दिया या तुरत अपनी जेब में डाल लिया. मोदी सरकार में कैबिनेट की बैठक हर हफ्ते होती है जबकि मंत्रिपरिषद की बैठक जिसमें कैबिनेट मंत्री के साथ-साथ राज्य मंत्री और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री भी मौजूद रहते हैं, इस महीने के आखिरी हफ्ते में होगी. तब शायद इस डांट का असर दिखे. बैठक से पहले एक और दिलचस्प चीज हुई. सभी मंत्रियों के हाथ में एक सफेद लिफाफा पकड़ाया जा रहा था. मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुहाट के बीच इस तरह लिफाफे में आखिर क्या था . हर मंत्री इसको लेकर हैरान थे . लेकिन जब उन्होंने लिफाफा खोला तो देखा कि उसमें सोशल मीडिया का रिपोर्ट कार्ड है. रिपोर्ट कार्ड में फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मंत्रियों की गतिविधियों का पूरा ब्योरा दिया गया है . तीन महीने पहले ऐसी ही एक बैठक में नेताओं को सोशल मीडिया के टारगेट के लिए बताया गया था. गुरूवार की बैठक इस मायने में तो अहम थी ही कि पहली बार सरकार के दो साल के काम काज की समग्र समीक्षा एक ही साथ सभी मंत्रियों की मौजूदगी में की गई, लेकिन इसलिए भी थी कि जल्दी ही मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें हैं. ऐसा माना जा रहा है कि इस बैठक में हुई समीक्षा से जो नतीजे सामने आएंगे उसका असर इस फेरबदल में होनेवाले हैं.
जैसा कि इस साल पूर्वानुमान था कि अच्छी बारिश होगी और पूरे भारत में हो भी रही है. मुंबई, महराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पानी-पानी हो रहा है, तो उत्तराखंड में फिर से तांडव हो रहा है. बादल फटने के कारण लकगतार भूस्खलन जारी है जिससे जान माल की क्षति हो रही है. राहत और बचाव कार्य तो चल रहे हैं पर इन प्राकृतिक हादसों से सीख लेने की जरूरत है.
फिलहाल सुब्रमण्यम स्वामी थोड़े ठंढे पड़ गए तो अमित शाह जोर-शोर से उत्तर प्रदेश में गरज रहे हैं. प्रधान मंत्री लगातार तीसरे साल भी राष्ट्रपति द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी से दूर रहे तो अन्य विपक्षी दल इस सियासत को भुनाने आगे आगे चल रहे हैं. धर्म और सियासत साथ साथ ही चलते हैं. दोनों में सामंजस्य जरूरी है ताकि नफरत के बजाय प्रेम पनपे, फल फूले. तभी होगा जय भारत! और भारत माता की जय!

 - जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर  

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