Sunday, 13 December 2015

हाई स्पीड ट्रेन ही नहीं, हाई स्पीड ग्रोथ भी चाहते हैं : पीएम मोदी

तीन दिवसीय भारत दौरे पर आए जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के दौरे के दूसरे दिन की शुरुआत दिल्ली में बिजनेस लीडर फोरम से हुई। फोरम में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि वे हाई स्पीड ट्रेन ही नहीं, बल्कि हाई स्पीड ग्रोथ भी चाहते हैं। पीएम ने कहा कि ऐसा पहली बार होगा कि भारत से जापान कार आयात करेगा और जापानी कंपनियों की कारें भारत में बनेंगी। उन्होंने कहा कि भारत संभावनाओं का देश है और तकनीक इसकी ताक़त है. जापान में मेक इन इंडिया मिशन चल रहा है।
शिखर वार्ता में कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर हुई चर्चा
इन रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिन्जो आबे के बीच शिखर वार्ता के बाद हुए। इस शिखर वार्ता में दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विस्तार सहित परस्पर रूप से महत्वपूर्ण कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की।
रेल विकास के लिए 12 अरब डॉलर की मदद
आबे के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा ‘भारत के आर्थिक सपनों को सच करने में जापान से ज्यादा कोई मित्र मायने नहीं रखेगा।’ उन्होंने आबे को ‘एक निजी मित्र और भारत-जापान भागीदारी का बड़ा समर्थक बताया।’ हस्ताक्षरित समझौतों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा ‘गति, विश्वसनीयता और सुरक्षा के लिए जानी जाने वाली शिनकानसेन के माध्यम से मुंबई-अहमदाबाद सेक्टर में हाई स्पीड रेल चलाने का फैसला ऐतिहासिक से कम नहीं है।’ उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए करीब 12 अरब डॉलर का महत्वपूर्ण पैकेज और बहुत आसान शर्तों पर तकनीकी सहायता सराहनीय है। पीएम मोदी ने कहा कि हमने असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग पर हस्ताक्षर किए जो वाणिज्य एवं स्वच्छ ऊर्जा के लिए एक समझौते से कहीं ज्यादा है। यह एक शांतिपूर्ण तथा सुरक्षित दुनिया के लक्ष्य में रणनीतिक भागीदारी और परस्पर विश्वास के नए स्तर का एक शानदार प्रतीक है।’
वहीं, जापानी पीएम ने साझा बयान में अपने संबोधन की शुरुआत नमस्कार अभिवादन से साथ की, एक दो पंक्तियाँ हिंदी में बोलने की कोशिश भी की।
हाई स्पीड ट्रेन ही नहीं, हाई स्पीड ग्रोथ भी चाहते हैं : पीएम मोदी
तीन दिवसीय भारत दौरे पर आए जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के दौरे के दूसरे दिन की शुरुआत आज दिल्ली में बिजनेस लीडर फोरम से हुई। फोरम में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि वे हाई स्पीड ट्रेन नहीं, बल्कि हाई स्पीड ग्रोथ भी चाहते हैं। पीएम ने कहा कि ऐसा पहली बार होगा कि भारत से जापान कार आयात करेगा और जापानी कंपनियों की कारें भारत में बनेंगी। उन्होंने कहा कि भारत संभावनाओं का देश है और तकनीक इसकी ताक़त है और जापान में मेक इन इंडिया मिशन चल रहा है।
पीएम मोदी की स्पीड बुलेट ट्रेन की तरह : शिंजो आबे
वहीं, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अपने संबोधन की शुरुआत पीएम मोदी की तारीफ़ से की। उन्होंने कहा कि नीतियों को अमल में लाने में पीएम मोदी की स्पीड बुलेट ट्रेन की तरह है। साथ ही उन्होंने कहा कि मज़बूत जापान भारत के लिए अच्छा है।
दोनों प्रधान मंत्रियों ने वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में हिस्सा लिया
सालाना शिखर वार्ता के बाद जापानी पीएम शिंज़ो आबे पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी गए। दोनों देशों के प्रधानमंत्री यहां दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में हिस्सा लिया। पीएम मोदी और शिंज़ो आबे के आगमन को लेकर वाराणसी में ख़ास तैयारियां हुई। गंगा घाटों की सफ़ाई के लिए मुंबई से स्टीमर मंगाए गए। घाटों को ख़ूबसूरती से सजाया गया। आरती में पारंपरिक मंत्रोच्चार के साथ नमामि गंगे के भजन भी गाए गए. पूरा ही वातावरण धार्मिक और आध्यात्मिक हो गया… राधा रमण हरि गोविन्द बोलो! और हर हर महादेव के स्वर से पूरा समारोह गुंजायमान हो गया.
पिछले साल अगस्त में जब पीएम मोदी जापान गए थे तो दोनों देशों के बीच वाराणसी को जापान के शहर क्योतो के तर्ज पर बसाए जाने का समझौता हुआ था।
इस समझौते की कुछ और खास बातें
जापान 5 साल में 35 बिलियन डॉलर का निवेश भारत में करेगा
प्रधान मंत्री मोदी ने कहा – 1 मार्च 2016 से जापानियों को वीजा ऑन अराइवल मिलेगा
रेलवे विकास के लिए १२ अरब डॉलर देगा जापान
द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए जापान ने 1,500 अरब युआन (करीब 83,000 करोड़ रुपये) का ‘मेक इन इंडिया’ कोष स्थापित किया है, जबकि भारत ने ‘जापान औद्योगिक शहर’ में निवेश आकर्षित करने के लिए एक विशेष प्रोत्साहन पैकेज लाने का वादा किया है।

एक ख़ास बात मोदी जी के व्यक्तित्व में है कि वे जिस भी कार्य में हिस्सा लेते हैं उसे अविश्मरनीय और लुभावना बना देते हैं ताकि मीडिया के कैमरे उन पर ही रहें और इस भव्य आयोजन को पूरा देश देखे. चाहे वह जापान में ड्रम बजाने का कार्यक्रम हो या वाराणसी में गंगा आरती का आयोजन. एक बौद्ध धर्म अनुयायी देश का प्रधान मंत्री गंगा आरती भी उसी तन्मयता से करे जैसे वह हमारे धर्म के अनुष्ठान को बखूबी समझता भी हो. इसे एक सर्व-धर्म-समभाव, सर्वे भवन्तु सुखिन: के साथ धार्मिक सहिष्णुता का प्रदर्शन भी कहा जा सकता है.
नफा नुक्सान और क्रियान्वयन कितना और कब तक होगा वो सब बाद में देख जाएगा, तत्काल कम से कम वाराणसी का खास इलाका गंगा का दशाश्वमेध घाट साफ़ और सुसज्जित तो हो गया, भले कल के बाद यही मीडिया के कैमरे बनारस की गलियों की गंदगी और मैली गंगा की छवि न दिखाने लग जाय! अभी तो सपने देखो और उसी में खो जाओ. मुझे नहीं पता इन सब योजनाओं के लिए संसद में मंजूरी लेनी पड़ती है या नहीं या सिर्फ गरीबों के लिए बिलों पर ही संसद में चर्चा की जरूरत होती है. आम गरीब तो टी वी देखें, सपने बुने, निवेश आयेगा. निवेश आयेगा तो नए उद्योग धंधे विकसित होंगे. रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, रोजगार होगा तो आमदनी बढ़ेगी. फिर दोपहिया वाहन या मोटर गाड़ी भी खरीदेंगे और उसे चलाकर करेंगे वायु प्रदूषण जिससे आज दिल्ली जूझ रही है. गंगा कब साफ़ होगी? जरूरत के सामान कब सस्ते मिलेंगे? स्किल इण्डिया, डिजिटल इण्डिया, स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत का सपना कहाँ है? भारत संचार निगम के अवरोधों से तो मैं रोज ही जूझता हूँ. मच्छर और चूहे भी अब वातानुकूलित जगहों में ही अपने आप को सुरक्षित महसूस करने लगे हैं. स्वच्छ भारत के सपने दिखानेवाले एक विश्वस्तरीय अस्पताल की बात बता रहा हूँ, जहाँ चिल्ड्रन वार्ड में भी मच्छरों और चूहों का उत्पात कम नहीं है. किसानों के खेत में पानी कब पहुंचेगा उनके उत्पाद के सही दाम कब मिलेंगे. गरीब के घरों में भी गैस के चूल्हे जलेंगे और उस चूल्हे पर रोटियां सेंकी जायेगी. बुन्देलखंड के गरीबों को भरपेट भोजन कब मिलेगा, मीडिया दिखला रहा है कि वे घास-पात की रोटी और भाजी खाने को मजबूर हैं. हर घर में बिजली का सपना भी देख ही रहे हैं. गरमी के दिनों में बिजली की मांग और आपूर्ति में कितना अंतर रहता है, वह भी हम सब जानते हैं और डीजल से चलनेवाले जेनेरेटर कितना प्रदूषण बढ़ाते हैं वह भी पर्यावरणविद ही बताएँगे. बिहार के चुनाव का परिणाम और गुजरात के निकाय चुनाव कुछ तो सन्देश देते हैं. संविधान दिवस पर संसद में बाबा साहब के खूब गुण गाये गए सहिष्णुता पर भी खूब चर्चा हुई पर अब जो संसद में हो रहा है वह भी मीडिया के कैमरे में ही दीखता है.
भ्रष्टाचार की स्थिति कैसी है? सबको पेट भरने को अनाज मिल रहा है तो? कुछ नए गोदाम बने हैं क्या? ताकि अनाज को सड़ने से बचाया जा सके. सरकारी कर्मचारी और अधिकारी अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग कर रहे हैं क्या? संसद की स्थिति कब ठीक होगी या यूं ही हो हल्ला मचता रहेगा?
जलवायु परिवर्तन पर समझौते हो गए हैं, उन्हें लागू कैसे किया जायेगा? दिल्ली को प्रदूषण से छुटकारा कब मिलेगा? चेन्नई, कश्मीर, उत्तराखंड में उपजी प्राकृतिक आपदा की समस्या से कब निजात पाएंगे? अनावृष्टि और अतिवृष्टि, भूस्खलन आदि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए हम कब पूर्णत: तैयार होंगे? भारत विविधताओं का देश है तो समस्याएं भी यहाँ अनगिनत है. शिक्षा, स्वास्थ्य, पेय जल, सबको अपना घर कब तक सुलभ हो सकेगा? हाई स्पीड ग्रोथ हो रहा है तो? फिलहाल तो भोले बाबा तेरा सहारा है. माँ गंगा को निर्मल गंगा बनाना है ताकि हम नमामि गंगे कहने बार बार आ सकें. गंगा तेरा पानी अमृत!
- जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर

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