Saturday, 8 August 2015

फीकी पड़ती चमक

सोने की चमक फीकी पड़ती जा रही है. शेयर मार्केट नीचे ऊपर हिचखोले खा रहा है. ऑस्ट्रेलिया में कोयला खदान जो अडानी को आवंटित हुआ था वह रद्द होने के कगार पर है. प्रधान मंत्री मोदी जी का अभी कोई चर्चित विदेश दौरा नहीं हो रहा. उनका कोई जोरदार भाषण या वक्तब्य भी मीडिया में नहीं आ रहा. ललित मोदी, सुषमा प्रकरण, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान के ब्यापम पर उनकी लगातार चुप्पी, छत्तीसगढ़ का राशन घोटाला, संसद में जोरदार हंगामा, कांग्रेस के २५ सांसदों क निलंबन, कांग्रेस के साथ कुछ विपक्षी पार्टियों द्वारा संसद का बहिष्कार, भूमि अधिग्रहण बिल पर सरकार का कथित यु टर्न, संसद की सर्वदलीय बैठक से प्रधान मंत्री की दूरी —कितना कुछ है जो नरेंद्र मोदी की विफलता के कहानी कह रहा है. बिहार में दिए गए नीतीश के खिलाफ डी. एन. ए. वाला विवादित बयान उसपर नीतीश कुमार की खुली चिट्ठी. उद्योगपति राहुल बजाज का निराशाजनक बयान और भी काफी कुछ है जो प्रधान मंत्री के चमकते हुए शहंशाह की छवि पर बट्टा तो लगाता ही है. जनता कुछ चमत्कार की उम्मीद में थी पर आशा के अनुरूप परिणाम न देखने पर जनता का भी मोह भंग होना स्वाभाविक है. प्याज टमाटर के लगातार बढ़ते दाम, पूरे देश में कानून ब्यवस्था का बुरा हाल, दिल्ली में सबसे अधिक आपराधिक घटनाओं का होना, महिलाओं के साथ हो रहे लगातार जुर्म और दुष्कर्म…. दिल्ली की केजरी सरकार के साथ राज्यपाल का लगतार टकराव ……और कितने दिन चलेंगे मोदी की नाम … भाजपा नेताओं की विवादास्पद बयानबाजी, शत्रुघ्न सिन्हा का विपक्ष के साथ गलबहियां करना, पार्टी के अंदर की सुगबुगाहट …..कुछ तो बात है, जो अभी परदे के अंदर चल रहा है. हर बात में मुखर रहने वाले प्रधान मंत्री आखिर इन सारे ज्वलंत मुद्दों पर खामोश क्यों हैं? सोसल मीडिया को महत्व देनेवाले प्रधान मंत्री पर आज व्यंग्यात्मक टिप्पणियां की जा रही है, जो कभी मनमोहन सिंह पर की जाती थी, अब कोई उनसे डिग्री दिखाने को कह रहा है …यह भी अच्छी बात तो नहीं कही जा सकती. …..आने वाले दिनों में बिहार में चुनाव का आगाज….. चमक अभी बाकी है, या फीकी पड़ रही है?
ऐसे समय में देश के शीर्ष उद्योगपतियों में से एक और राज्यसभा के सांसद राहुल बजाज ने NDTV से की गई एक खास बातचीत में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए तल्ख शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा है कि पिछले साल ऐतिहासिक जीत के साथ सत्ता में आने वाली एनडीए सरकार अपनी चमक खोती जा रही है. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को मिली ऐतिहासिक जीत का ज़िक्र करते हुए बजाज ग्रुप के चेयरमैन ने कहा, “मई, 2014 में हमें एक ‘शहंशाह’ मिला था, और पिछले 20-30 सालों में दुनिया के किसी भी देश में, किसी को भी ऐसी सफलता नहीं मिली थी… मैं इस सरकार के विरोध में आज भी नहीं हूं, लेकिन सच्चाई यही है कि अब इस सरकार की चमक फीकी पड़ती जा रही है…”
राहुल बजाज ने अपनी बात को आगे ले जाते हुए कहा कि वह “वही कह रहे हैं, जो बाकी लोग कह रहे हैं…” उन्होंने कहा, सरकार की गिरती साख पिछले साल से अब तक कई चुनाव नतीजों में साफ नज़र आई है. “दिल्ली में यह दिखा, पश्चिम बंगाल के निगम चुनावों में भी दिखा… मैं दोनों पार्टियों के साथ हूं, मैं भारत की भलाई चाहता हूं… मैं सरकार से बाहर का आदमी हूं, मैं कुछ नहीं जानता हूं, लेकिन अगर बीजेपी बिहार में अच्छी सरकार बना पाती है तो कम से कम इस स्थिति से कुछ छुटकारा मिल सकता है… बीजेपी की थोड़ी उम्मीद आने वाले बंगाल, केरल, असम और पॉन्डिचरी चुनाव से है…”
सरकार द्वारा प्रस्तावित ब्लैक मनी बिल के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए राहुल बजाज ने कहा, जिन लोगों के पास काला धन जमा है, यह बिल उन्हें उसे सार्वजनिक करने के लिए तीन महीने का समय देता है. इसमें जो लोग तीन महीने की समयावधि का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इसके लिए 60 प्रतिशत चार्ज देना पड़ेगा, लेकिन उन पर किसी तरह का केस नहीं चलेगा. जो लोग इस तीन महीने की विंडो का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, दोषी पाए जाने पर उन पर 120 प्रतिशत जुर्माना और 10 साल तक की कैद की सज़ा हो सकती है.
राहुल बजाज ने यह भी कहा कि उद्योग जगत से जुड़े लोग इस बात से चिंतित हैं कि इस तरह की घोषणाओं के बावजूद उन्हें इस बात की गारंटी नहीं मिलती है कि भविष्य में उन पर केस नहीं चलाया जाएगा. “हम सार्वजनिक जानकारी दे देते हैं और फिर आप कहते हैं कि यह गैरकानूनी है… अगर ऐसा होता है तो मैं कुछ भी सार्वजनिक नहीं करूंगा, मैं रिस्क लूंगा और सुप्रीम कोर्ट जाकर जीवन भर अपनी लड़ाई लड़ूंगा… मुझे कुछ भी नहीं होगा…”
हालांकि सरकार ने इन घोषणाओं पर बारीक नज़र रखने की बात कही है, ताकि उन्हें टैक्स अधिकारी परेशान न कर सकें, लेकिन राहुल बजाज इस तर्क से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है, “हर कोई कह रहा है… चाहे वह आईटीओ हो या प्रवर्तन निदेशालय, उन जगहों पर मौजूद तकरीबन लोग वैसे ही हैं, जैसे पहले थे… आप हर हाल में परेशान किए जाएंगे…”
राहुल बजाज ने यह भी कहा कि उन्हें उन उद्योगपतियों से कोई सहानुभूति नहीं, जो कानून तोड़ते हैं, लेकिन यह कानून पारदर्शी नहीं है. “मेरे ख़्याल से इस कानून का प्रारूप ही किसी परिकल्पना के तहत किया गया है… मैं यह बात पूरे समूह के लिए नहीं कह सकता हूं, लेकिन जिन्होंने ऐसा किया है, मेरी सहानुभूति उनके साथ नहीं है. यह सब बदले की कार्रवाई के तहत किया गया है… यह नरेंद्र मोदी की सरकार नहीं है…”
राहुल बजाज ने ऐसा बयान सार्वजनिक रूप से दिया है, पर ऐसे बहुत सारे उद्योगपति, राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषक कह रहे हैं. संसद का लगातार ठप्प होना और किसी बिल पर बहस न होना, निराशा का भाव पैदा करता है. संसद का वक्त बर्बाद होना मतलब करोड़ों की क्षति अलग से हो रही है. सरकार और विपक्षी दल दोनों का दायित्व है कि संसद को चलायें और जनता का काम करें. प्रस्तावित विधेयक पर बहस हो और उसे दोनों सदनों से पास कराया जाय, पर ऐसा होता दीख नहीं रहा क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने-अपने रास्ते पर अड़े और खड़े हैं.
सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, सुषमा स्वराज, स्मृति इरानी आदि अपनी अपनी व्यक्तिगत खुन्नस निकल रहे हैं, जो किसी भी तरह से या कहें कि भारतीय लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है. मोदी जी कहीं से बीच-बचाव करते नजर नहीं आ रहे हैं … उनका मौन उनके लिए भी आत्मघाती न बन जाय. अभी बिहार में चुनाव होना है, वहां भी मोदी जी और नीतीश जी अपनी-अपनी व्यक्तिगत खुन्नस का जिक्र सार्वजनिक रूप से कर रहे हैं. जनता सब कुछ देख रही है, मीडिया हवा बनाने में माहिर है. संयोग से लोक सभा में मोदी जी के लिए प्रचार सामग्री तैयार करने का काम सम्हालने वाला प्रशांत किशोर इस बार नीतीश जी के साथ है. अरविन्द केजरीवाल भी नीतीश कुमार का समर्थन करने को तैयार बैठे हैं, ऐसे में बिहार का चुनाव परिणाम ही बताएगा कि मोदी जी की चमक बरक़रार है या फीकी पड़ी है.
फिर भी पूरी निराशा नहीं व्यक्त की जा सकती है. अन्तराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के साथ कुछ राष्ट्रों में भारत का नाम हुआ है. संयुक्त-राष्ट्र-संघ में भारत की भागीदारी बढ़ी है, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की नीलामी से सरकारी खजाने में मुद्रा की बृद्धि हुई है, वहीं कोयले के उत्पादन में बृद्धि से बिजली उत्पादन में भी थोड़ा सुधार हुआ है. लेकिन इसके अलावा प्राकृतिक गैस, तेल, इस्पात, सीमेंट, फर्टिलाइजर्स आदि में गिरावट ही दर्ज की गयी है. जोर-शोर से चलाये जा रहे स्वच्छता अभियान के परिणाम भी उत्साहजनक नहीं हैं. भ्रष्टाचार का उन्मूलन हो गया है, ऐसा नहीं कहा जा सकता है …. और भी कई योजनाओं पर मोदी सरकार को गंभीरता से कदम उठाने होंगे. किसानों, मजदूरों, गरीबों, बेरोजगारों के हित में आवश्यक कदम शीघ्रातिशीघ्र उठाने होंगे, तभी उनकी साख आगे भी बनी रहेगी वरना जनता के पास विकल्प की अभी भी कमी है… किसके पास जाय?…यानी जाये तो जाये कहाँ? वाली बात है.
आशाजनक परिणाम की आकांक्षा के साथ – जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

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