Sunday, 10 August 2014

डॉलर की औकात!

डॉलर की औकात बताये लाल टमाटर.
बांधे बहिना राखी घर से बाहर जाकर
खाते आलू भात तनिक न हम घबराए
आलू दादा देखो अब हिचकोले खाए
ममता दी ने आलू को फुसलाया
अपनी साड़ी के आँचल में उसे छुपाया
आम आदमी खास आदमी को यह भाए
आलू रोटी भात सभी जन इसको खाए
हरी सब्जियां नहीं मिले कोई बात नहीं है,
आलू संग ही प्याज की औकात वही है
बारिश हो घनघोर छिपे सब रहें घरों में
चाय की प्याली साथ चिप्स को लिए करों में
राजनीति और नेता चाहे जो करवा दें,
मोदी जी को सबके सर पे ही बैठा दें ,
होती कहाँ मुसीबत कम है आम जनों की
आलू प्याज टमाटर सुनते बड़े जनों की
आलू नहीं तो कोई सवारी नहीं चलेगी,
सड़कें होंगी जाम विपदा और बढ़ेगी.
होते खुश फिर जमाखोर गद्दी पर बैठे,
सर पे पगड़ी लाल मूंछ कुछ ऐसे ऐंठे.
पैंतीस चालीस या फिर पचास ही ले लो
आलू दादा तू अब दर्शन सबको दे दो
कहते बाबा रामदेव डॉलर से, सुन लो,
आए हो औकात में आ अब हमसे मिल लो.
कहा था मैंने तुमको हम पीछे छोड़ेंगे
आना मेरे पास टमाटर हम दे देंगे.
लाल टमाटर सुघर और मासूम सा दिखता
करके नित्य ही योग वह आश्रम में टिकता.
.……जमशेदपुर में आलू की किल्लत के बाद उपजे विचार पर आधारित रचना
आप सब सड़े-गले टमाटर डाल सकते हैं.

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