Friday, 18 July 2014

चोरों में भी एक सलीका होना चाहिए...

चोरों में भी एक सलीका होना चाहिए,
चाहे कुछ भी हो, तरीका होना चाहिए.
नल खोल कर ले जाएं, होगी नहीं दिक्कत
कोई उपाय कर दो न पानी बहना चाहिए.
नल की जगह पर लकड़ी ठूंस देते मेहरबान
जल कीमती है यह न यूं बहाना चाहिए.
भले होते हैं वे लोग, जो चोरों से डरते हैं,
जेवर की क्या कीमत जान बचाना चाहिए.
बरसात के दिनों में जो ए सी. ट्रेन में चले
खर्चीले लोगों से ज्यादा ‘कर’ लेना चाहिए.
बिहार के ही चोर बिहारी भाई को लूटे (छपरा-टाटा ट्रैन में डकैती)
इतनी समझदारी तो होना ही चाहिए
स्लीपर जनरल कोच कभी खाली नहीं होते
वेटिंग वाले भी टिकट ले कर ही हैं चलते
उसमे चोर घुंसे तो क्या वे बच पाएंगे
उलटे लुटेंगे खुद अलग से मार खाएंगे
ए सी बोगी में चोरी का मजा ही है अलग
खिड़की दरवाजे बंद गर्मी में भी ठंढक
मुसाफिरों को लूटने में भी है मिहनत
ठंढी हवा बदन में तब तक लगना चाहिए.
ताले काटकर चोरी भी क्या चोरी होती है
डुप्लीकेट चाभी आखिर क्योंकर होती है
ताला खोल के लूटें ताकि रक्षक दल सोचें
विकसित हुआ है तंत्र, मालुम होना चाहिए .
चोरी हम भी करते हैं, अच्छी रचना की
हेर फेर कुछ कर दें, ये तरीका होना चाहिए
चोरों से ही सीखा मैंने कविता लिखना भी
रचनाकार जवाहर जैसा होना चाहिए ……
ताली नहीं तो थोड़ा मुस्कुराना चाहिए !
चोरों में भी एक सलीका होना चाहिए,

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