Thursday, 15 May 2014

मोबाइल किसने बनवाई....!

मोबाइल किसने बनवाई, हमें सोने नहीं देती.
न चाहा रिंग जब आती, हमें सोने नहीं देती
आया हूँ रात्रि पाली कर, सोऊंगा घोड़े बेंचकर
काहे न सबको बतलाई, हमें सोने नहीं देती.
ससुर जी हाल पूछेंगे, सासु माँ चाल पूछेंगी
साली जी लेंगी अंगराई, हमें सोने नहीं देंगी.
पिताजी गांव से बोले, माँ पुचकारती हौले
बहन की होगी विदाई, हमें सोने नहीं देंगी
चलाते जब भी दो पहिया, जरा स्पीड हो बढ़िया
तभी बजती हो शहनाई, सड़क रुकने नहीं देती.
कभी जब बॉस हो संग में, मोबाइल जब लगे बजने
इसी ने डाँट खिलवाई, प्रगति होने नहीं देती.
कभी जब बंद कर रख दूँ, शिकायत ढंग की सुन लूँ,
बजे बेसिक(फोन) की तब घुँघरू, हमें सोने नहीं देती…

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