Thursday, 6 March 2014

राजनीति का सक्रमण काल

पहले रामदास अठावले, फिर उदित राज और अब रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के साथ गठबंधन कर बीजेपी ने साफ संकेत दे दिया है कि वह ‘सवर्णों की पार्टी’ की छवि से बाहर निकल सबको साथ लेकर चलने को तैयार है. इस चुनाव में 272+ सीटों की अपनी मुहिम के लिए बीजेपी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. पिछड़े वर्ग के नरेंद्र मोदी को पी. एम. कैंडिडेट बनाकर और मुसलमानों से माफी मांगने के सांकेतिक बयान के जरिए बीजेपी समाज के हर वर्ग तक अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रही है. उधर करुणा निधि भी मन बना रहे हैं और मोदी का गुणगान कर एक कदम बढ़ा चुके है. जयललिता क्या करेगी वे ही जानें. खिचड़ी तो पक ही रही है..टीआरएस(तेलंगाना राष्ट्र समिति) में भी नई पीढ़ी ‘मोदी इफेक्ट’ के सम्मोहन में दिख रही है. टीआरएस के मुखिया के चंद्रशेखर राव की बेटी कविता बीजेपी से गठबंधन के पक्ष में हैं. इस तरह ये सभी लोग मान चुके हैं कि मोदी प्रधान मंत्री बनने वाले हैं, इसलिए सत्ता के साथ रहने में ही भलाई है, नहीं तो आज सीबीआई जो कांग्रेस का तोता बनी हुई है, क्या पता कल को मोदी का तोता बन जाय …हवा का रुख देखकर अपना रास्ता तय करना बुद्धिमानों का लक्षण है और हमारे नेता बुद्धिमान तो हैं ही.
रिटायर्ड जनरल वी. के. सिंह भाजपा में शामिल होते ही शिंदे को कोर्ट में खींचने की धमकी देने लगे. किरण बेदी किस उधेरबुन में है? जनरल तो रक्षा मंत्रालय सम्हालेंगे, आप गृह मंत्रालय ले लेना और ‘आप’ पार्टी को उसके दफ्तर समेत क्रेन से उठवाकर मोदी के चरणों में डाल देना.. अन्ना जी ने तो साध्वी ममता को ढूंढ लिया है. अब आपको भी अपना संरक्षक ढूंढ ही लेना चाहिए. क्या पता नयी सरकार में समाज सेवा का अवसर ही न मिले. जब सबकुछ ठीक होगा, फिर सामाजिक संस्था की क्या जरूरत होगी.
बाबा शिवानंद तिवारी नीतीश बाबू से प्रताड़ित होकर हो सकता है पुराने घर (राजद) में लौट आयें. भाजपा तो उन्हें लेने से रही, क्योंकि भाजपा में प्रवक्ताओं की कमी नहीं है और ये बेचारे प्रवक्ता का ही अच्छा काम करते हैं. कभी कभी सच भी बोल जाते हैं. बड़ा गड़बड़ है, राजनीति में सत्य की कोई जगह नहीं होती! सत्य का समय रहा होगा कभी, पर अब तो सत्य कही दीखता नहीं. रोज बयान बदलने वाले , विवादास्पद बयान देनेवालों की ही खूब चलती है.
इन दिनों नेता पुत्र/पुत्री अपने पिता के लिए जनाधार तैयार करने में जुटे हुए है. बीजेपी-एलजेपी गठबंधन में पासवान के बेटे चिराग पासवान ने अहम भूमिका निभाई थी. चंद्रशेखर राव की बेटी कविता पार्टी के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की मुखिया भी हैं। लालू के पुत्रद्वय अपने पिता के संरक्षण में राजद की नैया पार लगाने की कोशिश में हैं. तो चिराग पासवान ने अपने पिता रामविलास के लिया उजाला किया. शिबू पुत्र हेमंत शोरेन झाड़खंड सम्हाले हुए हैं, तो पहले से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे सिंधिया और सचिन पायलट ने कमान सम्हाला ही है. सुप्रिया सुले अपने पिता शरद पवार की नक्शेकदम पर आगे बढ़ रही है. संदीप दीक्षित अपनी माँ शीला दीक्षित से कम कहाँ हैं. ओम प्रकाश चौटाला, ठाकरे परिवार, अखिलेश यादव, करुनानिधि की बेटी कनिमोझी और भी काफी लोग. फिर सिर्फ राहुल गांधी क्यों बदनाम हैं भाई! मोदी का आगे पीछे कोई नहीं है पर अटल जी की भांजी करुणा शुक्ला तो हैं न!
अब केजरीवाल को कौन समझाए… चले हैं राजनीति के कीचड को साफ करने…. यानी कमल के जड़ पर ही प्रहार! गलत बात ! 3M के पीछे लगे हुए हैं, मोदी, मुकेश (अम्बानी) और साथ में मीडिया भी … राजनीति में आए हैं, तो राजनीति करिये… जैसा सभी दल कर रहे हैं, नहीं तो तीसरा मोर्चा में मिल जाइये …हो सकता है वहाँ बहुत सारे प्रधान मंत्री के दावेदारों में आप सर्वसम्मत्ति से चुन लिए जाएँ, जैसे देवेगौड़ा को चुना गया था. आप अदना सा ‘आम आदमी’ बड़े बड़े पर्वतों से टकरायेंगे? नरेंद्र मोदी, राहुल को आपने साम्प्रदायिक और भ्रष्टाचारी बता दिया, ऊपर से मुकेश अम्बानी, अदानी आदि को घसीटने की क्या जरूरत थी? जिस मीडिया ने आपको इतना महत्व दिया, उससे भी दुश्मनी मोल ले ली. दिल्ली में आपको मौका मिला था वहां से भी दुम दबाकर भागे … सभी आपको भगोड़ा बता रहे हैं, पागल या येड़ा बतला रहे हैं. अब आपका रोड शो कितना रंग लाता है, वह तो जनता का मत ही बतलायेगा. राहुल जी भी तो रोड शो कर रहे हैं, पर मोदी का जलवा तो देखिये कि सभी लोग उनकी आकर्षण शक्ति से खिंचे चले आ रहे हैं. कभी लता मंगेशकर तो कभी राखी सावंत, मल्लिका शेरावत तो कभी मेघना पटेल भी. गजब का भाषण देते हैं श्री मोदी जी, उनके आगे पीछे सचमुच कोई नहीं दीखता कोई नेता भी नहीं बुजुर्ग लोग अब सन्यास ही ले लें तो अच्छा है, नौजवानों में नयी जोश फूंकने वाले, महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने वाले, दलितों और महादलितों का यह पिछड़ा नेता जरूर ही देश को पिछड़ेपन से बाहर ले जायेगा ..किसी को कोई संदेह है तो एक बार हेलिकॉप्टर से उनकी सभाओं में जूट भीड़ को देख ले …होश उड़ जायेंगे.पसीने छूटने लगेंगे.अनायाश ही उसके मुंह से भी निकल पड़ेगा मोदी जी की जय. क्योंकि अब यह पार्टी सिर्फ अगड़ों और बनियों की नहीं है पूरा भारत इसके अंदर है एक मात्र राष्ट्रवादी पार्टी. बाकी तो सभी भेड़चाल वाली है इन सबसे मुक्ति पानी ही होगी..गुजरात की मिट्टी,, गुजरात का पानी,गुजरात की बिजली, गुजरात का उद्योग, गुजरात की उपज, गुजरात की खुशबू पूरे देश में लानी ही होगी. सरदार वल्लभ भाई पटेल भी तो गुजराती ही थे, महात्मा गांधी,गुजराती ही थे,और भी कई महात्मा और उद्योगपति गुजरात से ही हैं. धन्य है हमारा गुजरात जिसने इतने सारे महान लोगों को पैदा किया! …सिर्फ साठ महीने दीजिये इस चायवाले को ..देखिये कैसे कायाकल्प करता है इस देश का. अरे रे, अश्विनी चौबे जी, गिरिराज बाबू, डॉ.सी पी ठाकुर साहब, आपलोग नाराज मत होइए आप तो हमेशा से अपने थे, हैं और रहेंगे, घर आए मेहमान रामविलास जी का स्वागत तो कर लेने दीजिये….
बेचारे लालू को जेल से बाहर निकलवा कर कांग्रेस अपने जनाजे को कन्धा देने वालों में चार सांसद का जुगाड़ कर पाएं ये मनोकामना रही होगी…एक बार लालू जी ने मजाक में कहा भी था -अंत में कन्धा देने के लिए चार आदमी की ही जरूरत होती है न! चार में एक स्वयं को गँवा चुके हैं. हो सकता है वहाँ पर अपने बेटे को या पत्नी को जितवा पाएं या फिर और कोई… पर यह क्या हुआ गठबंधन से लठबंधन पर उतर आए …बड़ा गड़बड़ है. अपनी गलतियों से भी लोग नहीं सीखते तो इसमे मोदी जी की क्या गलती हो सकती है? मोदी जी की गलती सुधारने के लिए भाजपा का पूरा कुनबा है, संत समाज है, बाबा रामदेव है और अब तो श्री श्री रविशंकर भी सामने आ गए हैं. आशाराम को जेल में जाने से बहुत सारे अच्छे संत मोदी जी के साथ आ गए और संतों के संत परम संत अशोक सिंघल और स्वामियों के स्वामी सुब्रमण्यम स्वामी. भारत के रक्षक जनरल वी के सिंह. पर आपके यहाँ तो दूसरे दर्जे/दूसरी पंक्ति का कोई नेता भी नहीं. बेचारे अकेले लालू कितना लाठी भांजेंगे, वह भी अभी जमानत पर हैं, इसलिए …अगर गठबंधन न हुआ तो क्या फिर से जेल जाने की तैयारी नहीं करनी पड़ेगी?
राहुल बाबा,कुलियों से मिल रहे हैं महिलाओं से खुद को चुमवा रहे हैं और अब्र रिक्शेवाले पर उन्हें दया आयी है. आखिर ये लोग ही तो हैं अब उनके वोट बैंक. दलित, पिछड़ा और मुस्लिम भी अब इनके न रहे .. न ये किसी के ही रहे, कोई इनका न रहा!
अभी और भी बहुत कुछ देखने सुनने को मिलेगा, जागरूकता बड़ी है, मतदान का प्रतिशत बढ़ा है …ऐसे में यह उम्मीद की जानी चाहिए कि सभी पार्टियाँ अच्छे उम्मीदवारों को टिकट देगी और मतदाता स्वविवेक से सही उम्मीदवार का चयन करेंगे. सही उम्मीदवार का चयन देश में अमन-चैन ला सकता है, तो गलत बेडा गर्क भी कर सकते हैं. कर्मचारियों का महंगाई भत्ता तो बढ़ता है, पर पेट्रोल डीजल के लगतार बढ़ते दाम महंगाई को और बढ़ा देता है. अब लोक सभा उम्मीदवार को अपने चुनाव प्रचार के लिए कानूनी रूप से अधिकतम राशि की सीमा ४० लाख से ७० लाख कर दी गयी है ..करिए जमकर प्रचार! करिए रेल बंद, बिहार बंद या झाड़खंड बंद चुकाना तो आप को ही है… चुनाव से पहले या बाद में. जय हिन्द! जय भारत! जय लोकतंत्र!
जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर

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