Saturday, 2 June 2012

भारत बंद – ३१ मई २०१२

वैसे तो बंद कोई नई बात नहीं है हमारे देश में. नक्सली बंद तो आए दिन होता ही रहता है. इनका बंद २४ घंटे का होता है और १२ बजे रात से ही चालू हो जाता है. ये लोग ज्यादातर रेल पटरियों को उड़ाकर अपनी शक्ति का अहसास करा देते हैं. पथ परिवहन लोग डर से बंद कर देते हैं. हम सब इनके आदि हो चुके हैं और कोशिश करते हैं कि बंद के दिन, अगर मालूम है तो, उस दिन कोई यात्रा न की जाय और पहले से भी प्लांड है, तो टाला जाय !
कल यानी ३१ मई का बंद पेट्रोल के कीमतों में अभूतपूर्व बृद्धि और महंगाई के खिलाफ थी. बंद भाजपा और NDA द्वारा आहूत की गयी थी और इसे कांग्रेस छोड़ लगभग सभी दलों का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन था. चूंकि दाम में बृद्धि अभूतपूर्व थी इसलिए बंद को भी अभूतपूर्व बनाने का हरसंभव प्रयास किया गया.
कुछ झलकियों को जो मैंने नोट किया, उसे ही यहाँ साझा कर रहा हूँ.
* कई जगह चौपहिया वाहन को भैसे, गदहे आदि से खिचवाया गया – यहाँ पशुप्रेमी लोग दूर से इन पशुओं पर होते जुल्म को देखते रहे!
* एक घोडा गाड़ी पर उस अश्व की शक्ति से ज्यादा भाजपा नेता बैठ कर बारी बारी से फोटो खिंचवाते रहे! -(भाजपा कार्यालय लखनऊ का दृश्य) …….
* कई जगह ट्रेनें स्टेसन से पहले रोकी गयी – खाना पानी खूब महंगा बिका होगा – चलो किसी को तो फायदा हुआ – आम जनता की जेब थोड़ी और हल्की हुई. कुछ लोग ट्रेन से उतरकर पैदल स्टेसन की तरफ आते दिखे – इस गर्मी में पसीना निकलने से स्वास्थ्य लाभ तो कुछ हुआ ही होगा!
* रेल रोकने में महिला ब्रिगेड ने भी खूब मिहनत की, आदरणीया दुर्गा दत्ता के नेतृत्व में – पटना राजेंद्र नगर की तस्वीरें – बिहार की महिलाएं आगे बढ़ रही हैं!… अब बिहार पिछड़ा राज्य नहीं रहा. कुछ तो रेल पटरी पर सो गयी – इतना अच्छा बिस्तर(गर्म और स्प्रिंगदार) उन्हें शायद पहले नसीब नहीं हुआ होगा .
* पटना में बीजेपी और माले कार्यकर्ताओं में झड़प – दोनों बन्द को हाइजैक करना चाहते थे. वो तो अच्छा हुआ नक्सलियों ने अपना चेहरा नहीं दिखाया – नहीं तो सब भाग खड़े होते!
* मुंबई, पुणे और बंगलौर में बसें जलाई गई! या क्षतिग्रस्त की गयी – नुक्सान की भरपाई कौन करेगा ???
* ठेलेवाले, रिक्शेवाले, ऑटोवाले को कौन समझाए – वे लोग बंद के दिन ही निकल पड़ते हैं, ज्यादा कमाई के लालच में – एक दिन तो आराम करो घर में! ….कई दिन आराम करने से तो अच्छा है!
* पटना में एक लडकी ख़राब रिजल्ट के चलते गोलघर से कूद गई – बंद के दिन यह हंगामा करने से कौन ध्यान देगा? हॉस्पिटल पहुँचाने में भी लोगों को कितनी मसक्कत करनी पड़ी होगी!
* पटना में ही एक पुराने स्कूटर की शव यात्रा निकाली गए – साथ में अच्छी संख्या में बाइक सवार लोग थे. बेचारी मृत स्कूटर भी सोच रही थी, ऐसी मौत रोज मिले!
* न्यूज़ रूम में इरफ़ान कार्टून बनाकर दिखा रहे थे – भारत का नक्शा जल रहा है, पेट्रोल की आग से – बगल में लिखा था – “इसीलिये पेट्रोल को अति ज्वलनशील पदार्थ कहा गया है!”
सड़कों पर जगह जगह टायर जलाकर वातावरण को और प्रदूषित करने की कोशिश की गयी. साथ ही अगल-बगल के तापक्रम में बृद्धि करने का प्रयास भी – फिर भी अगर देखा जाय तो वाहनों के चलने से जितना प्रदूषण होता उससे तो कम ही हुआ! एक दिन के बंद से कितना पेट्रोल और डीजल बचा साथ ही प्रदूषण भी कम हुआ .. नहीं??
* खबर मिली की प्रधान मंत्री और वित्त मंत्री (कुछ और मंत्री समूह) अपना अपना टी वी बंद कर सो गए – उनसे जनता का दुःख देखा नहीं गया !
* दिनभर यह चर्चा चलती रही कि पेट्रोल कंपनियों के मालिक दिनभर इसी में माथा पच्ची करते रहे कि पेट्रोल की कीमत डेढ़ रुपये घटाई जाय या दो रुपये — उन्हें डर लग रहा था कि यह आग और गर्मी उनकी कंपनी या स्टोरेज तक न पहुच जाय. बाहर समर्थक और ज्यादा उत्साहित हो रहे थे कि चलो उनके आन्दोलन का कुछ तो असर हो रहा है!
* यहाँ चर्चा दिन भर न्यूज़ चैनेल पर चलती रही. शाम को पता चला कि सरकार नींद से जागी है और तभी पेट्रोल कम्पनियों के मालिक ने उनसे संपर्क साधा – सरकार के वरिष्ठ मंत्री ने कहा – ठहरो मैडम से पूछ कर बताते हैं. …
मैडम ने कहा – तुमलोग कुछ नहीं समझते हो .. अभी दाम घटाएंगे तो यह लाभ (श्रेय) विपक्ष को चला जायेगा. अभी मत घटाओ. बाद में हम बोलेंगे तब घटाना. हम उसका श्रेय लेंगे.. सभी मैडम की जय जयकार करने लगे. वाह! मैडम बिलकुल सही बोला.
* ३१ मई तम्बाकू निषेध दिवस है – इस बंद में कोई तम्बाकू या उसके उत्पाद नहीं खरीद सका .. इसे कहते हैं एक पंथ दो काज! भाजपा वाले कोई भी काम मुहूर्त के अनुसार करते हैं . बाजपेयी जी का शपथ ग्रहण भी शुभ मुहूर्त को हुआ था.
* अडवानी जी मुहूर्त का ख्याल नहीं रखते इसीलिये शुभ मुहूर्त उनकी जिन्दगी से दूर ही रहा … सारी यात्रायें बेकार ही गयी.
अभी उनको भी ब्लॉग का चस्का लगा है .. ब्लॉग लिखना अच्छी बात है – जो बात आप सरे आम नहीं कह सकते, ब्लॉग में कह जाते हैं.पर उसमे भी मुहूर्त का ख्याल तो रखना चाहिए न ! बंद के दिन क्या जरूरत थी गडकरी को निशाने पर लेने की ?
- भाजपा को अपने अन्दर झांकने की जरूरत है – पर अभी तो दिल्ली का ताज दिखलाई पड़ रहा है .
- जनता भाजपा से निराश कहाँ है ?- वह तो उसे आशा भरी नजरों से देख रही है अब यह तो आपको निर्णय लेना है की प्रधान मंत्री कौन होगा? आडवानी जी, ये अच्छी बात नहीं है! कहाँ तो आपको गडकरी जी को बधाई देनी चाहिए, इतने अभूतपूर्व बंद सफल करने के लिए .. अगर नहीं कर सकते थे तो आज के दिन ब्लॉग को पोस्ट नहीं करते…. सुषमा जी और अरुण जेटली जी अच्छे सलाहकार नहीं हैं!
** एक बात और सुनने में आया की सरकार अब अपनी मीटिंग पञ्च सितारा होटल में नहीं करेगी और भूने हुए काजू भी नहीं खायेगी. अब वह मीटिंग रामलीला मैदान में दरी बिछा कर चना चबाते हुए करेगी … पर नौकरी मत मांगना भाई! अभी वेतन देने के पैसे नहीं है!- भाई, सरकारी नौकरी में वेतन की जरूरत पड़ती है? कम से कम मध्य प्रदेश में तो नहीं.
** अब इतने सारे समाचार एक दिन सुनने को मिले तो बार बार चाय पीने की आवश्यकता तो महसूस होगी….. चाय के साथ कुछ बिस्कुट या नमकीन मिल जाय तो क्या कहने!…. शाम को पता चला चाय बिस्कुट का स्टॉक ख़तम हो गया. वैसे भी महीने की आखिरी तारीख है, हमलोग न तो जमाखोर हैं, न ही कर सकते हैं क्योंकि महीने भर का कोटा लाने में ही तो महीने के लास्ट दिन आते आते किसी पड़ोसी या मित्र के घर जाकर चाय पीने का मन करने लगता है…. मैंने श्रीमती जी से कहा – “अब आज तो कोई मेहमान आने से रहे, कल देखा जायेगा! न हो तो बगलवाली से मांग लेना, कल शुबह के लिए! ”

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