Sunday, 14 July 2013
कुण्डलियाँ
कुण्डलियाँ लिखने का प्रयास!
1.
मेरा उनका आपका, भेद कभी ना जाय.
मन में संसय ही रहे, दूरी नित्य बढ़ाय.
दूरी नित्य बढ़ाय, मनुज बिच भेद बढ़ावे,
झगड़ा रगड़ा पाय, कभी फिर चैन न पावे.
कहे जवाहर लाल, समझ का है सब फेरा.
जायेगा सब छोड़, छोड़ अब तेरा मेरा.
2.
वर्षा प्यारी है बड़ी, वर्षा बड़ी महान.
बिनु वर्षा प्यासी मही, सूखत सकल जहान.
सूखत सकल जहान, घड़ी भर चैन न आवै.
बादल की मुस्कान, देख जियरा भरमावै.
बादल गरजत आन, सकल जन का मन हर्षा.
टिप टिप करती बूँद, बड़ी प्यारी है वर्षा !
3.
हरियाली चहुओर है, बरसा बादल घोर.
खेतों में फसलें भली, खग कूजे चहु ओर.
खग कूजे चहु ओर, कृषक जन मन मुस्काए.
बीज डाल के खेत, कृषक जन घर को आए.
अंकुरे बीज अनेक, तनिक आ देखो माली.
कल तक थे वीरान, आज छाई हरियाली.
4.
जनमन ढूंढें राम को, राम छुपे मन माहि.
इधर उधर भागे मनुज, कस्तुरी मृग माहि.
कस्तुरी मृग माहि, बावला मन पछताए.
मिले राम जब जीव, मुदित मन अति हर्षाये .
कहे जवाहर लाल, राजे राम जी कण कण
ज्ञान बिना नर मूढ़, व्याकुल होता जनमन.
Saturday, 6 July 2013
झाड़खंड का दुर्भाग्य !
१५ नवम्बर २००० को बिहार के प्राकृतिक संसाधन से भरपूर वनांचल क्षेत्र को झारखण्ड नाम देकर अलग कर दिया गया. तर्क यह दिया गया कि छोटे राज्य होने से विकास की संभावनाएं बढ़ेगी. अधिकांश उद्योग धंधे और खनिज सम्पदा इसी क्षेत्र में है, बिहार का बाकी हिस्सा मैदानी इलाका है, जहाँ कृषि पैदावार अच्छी होती है.
वस्तुत: राजनैतिक स्तर पर 1949 में जयपाल सिंह के नेतृत्व में झारखंड पार्टी का गठन हुआ जो पहले आमचुनाव में सभी आदिवासी जिलों में पूरी तरह से दबंग पार्टी रही। जब राज्य पुनर्गठन आयोग बना तो झारखंड की भी माँग हुई जिसमें तत्कालीन बिहार के अलावा उड़ीसा और बंगाल का भी क्षेत्र शामिल था। आयोग ने उस क्षेत्र में कोई एक आम भाषा न होने के कारण झारखंड के दावे को खारिज कर दिया। 1950 के दशकों में झारखंड पार्टी बिहारमें सबसे बड़ी विपक्षी दल की भूमिका में रहा, लेकिन धीरे धीरे इसकी शक्ति में क्षय होना शुरु हुआ। आंदोलन को सबसे बड़ा आघात तब पहुँचा, जब 1963 में जयपाल सिंह ने झारखंड पार्टी को बिना अन्य सदस्यों से विचार विमर्श किये कांग्रेस में विलय कर दिया। इसकी प्रतिक्रिया स्वरुप छोटानागपुर क्षेत्र में कई छोटे-छोटे झारखंड नामधारी दलों का उदय हुआ जो आमतौर पर विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करती थी और विभिन्न मात्राओं में चुनावी सफलताएँ भी हासिल करती थीं।
१५ नवम्बर २००० से १८ मार्च २००३ तक भाजपा के बाबूलाल मरांडी झारखण्ड के मुख्यमंत्री रहे. बाद में पार्टी में आतंरिक विरोध के चलते बाबूलाल मरांडी को कुर्सी छोड़नी पड़ी और अर्जुन मुंडा को मुख्य मंत्री बनाया गया. इसके बाद शिबू सोरेन मात्र दस दिन के लिए मुख्य मंत्री बने, और समर्थन नहीं जुटा पाने के कारण इस्तीफ़ा देना पड़ा. फिर अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा, शिबू सोरेन, राष्ट्रपति शासन, शिबू सोरेन, राष्ट्रपति शासन, अर्जुन मुंडा और फिर राष्ट्रपति शासन. …अब उम्मीद है कि शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत शोरेन कांग्रेस के समर्थन से झारखण्ड के मुख्य मंत्री बनने वाले हैं, मतलब कुल १३ साल के ही अन्दर इस राज्य को तीन बार राष्ट्रपति शासन और नौ मुख्य मंत्री को झेलना पड़ा.
शिबू सोरेन का दुर्भाग्य या अति महत्वाकांक्षा ही कहा जायेगा कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक, झारखण्ड आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद भी वे मुख्य मंत्री के रूप में ज्यादा दिन स्वीकार नहीं किये गए. इन्हें इस क्षेत्र का ‘गुरूजी’ भी कहा जाता है. इन्हें ‘दिशोम गुरु’ की उपाधि से भी नवाजा गया है. शिबू सोरेन ने झारखण्ड आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई. कई बार सांसद और मंत्री भी बने. पर हमेशा विवादों में रहे. नरसिम्हा राव की सरकार को बचाने के लिए इन्होने अपने पांच सांसदों के साथ घूस भी लिया था. साथ ही कई हत्याकांडों में आरोपित रहे, सजा भी काटी, बीमार भी रहे, पर पुत्र-मोह में अभी वे धृतराष्ट्र को भी मात देने वाले हैं.
उनके सुपुत्र झारखण्ड के मुख्य मंत्री तो बन जायेंगे, पर इसके लिए उन्हें कितना समझौता करना पड़ा है, यह तो धीरे धीरे सामने आने ही वाला है. कांग्रेस इन्हें पूरी तरह से चंगुल में ले चुकी है और हेमंत सोनिया के काल्पनिक गोद में बैठ चुके हैं. झारखण्ड विकास पार्टी के सांसद डॉ. अजय कुमार विधायको के खरीद फरोख्त का आरोप लगाते हुए, प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति तक को चिट्ठी लिख चुके हैं. उनके अनुसार करोड़ो में बिकने वाले विधायक जनता का क्या काम करेंगे, यह बात किसी के समझ से बाहर नहीं है.
अब तक जितनी पार्टियों की सरकारें यहाँ बनी है सभी ने झारखण्ड का भरपूर दोहन किया है. विकास के नाम पर प्रगति- जीरो. आदिवासियों की हालत और बदतर हुई है, नक्सल आतंक बढ़ा है, उद्योगपतियों, ब्यावासयियों, राजनेताओं की भी हत्या आम बात है. सड़कें, राष्ट्रियों मार्गों की हालत बदतर है. बिजली की हालत ऐसी है कि कल शिबू सोरेन के घर जब मीटिंग चल रही थी, तभी बिजली गुल हो गयी, अन्य समयों की बात क्या कही जाय! उद्योग विस्तार में, केवल टाटा स्टील का जमशेदपुर स्थित कारखाने की क्षमता का विकास हुआ है. इसमे राज्य सरकार का योगदान नगण्य है. १२ मिलयन टन टाटा स्टील का प्रस्तावित ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है. अन्य औद्योगिक घराना यहाँ उद्योग लगाना चाहते हैं, पर राजनीतिक उठापटक के दौर में कुछ खास होता हुआ नहीं दीखता.
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा पहले भाजपा के साथ थी अब कांग्रेस के साथ है. इस तरह भाजपा का ह्रास हुआ और कांग्रेस की राजनीतिक ताकत में वृद्धि. ऐसे में बाबा रामदेव का शिबू शोरेन से आकर उनके घर में मुलाकात करना और पुराना सम्बन्ध बताना समझ से परे है. बाबा रामदेव की कूटनीति की, यहाँ क्या जरूरत थी; हो सकता है, बाद में समझ में आवे. पर जो कुछ राजनीतिक नाटक आजकल पूरे देश में चल रहा है, वह कहीं से भी भारतीय लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है.
उत्तराखंड की त्रासदी का विद्रूप चेहरा और उसपर राजनीति दलों की, लाश पर की जाने वाली राजनीति भयावह है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अभी भी अनगिनत लाशें यत्र तत्र सर्वत्र दीख रही हैं. पूरी तरह से बर्बाद लोग या तो घर बार छोड़ने को मजबूर हैं या अपनी किस्मत का रोना रो रहे हैं. सरकार के अनुसार राहत कार्य पूरा हो चूका है. पर जो दृश्य देखने को मिल रहा है वह भयावह है. पूरा देश दिल खोलकर मदद कर रहा है, प्रधान मंत्री और राज्य सरकार की घोषनाएं हुई है, पर धरातल पर कितना उतरता है, देखना बाकी है.
पहले नरेन्द्र मोदी की केदारनाथ मंदिर को आधुनिक बनाने का प्रस्ताव और अब अमित शाह का राम मंदिर राग. भाजपा पूरी तरह हिंदुत्व की और बढ़ रही है और अन्य विपक्षी पार्टियाँ इसको विरोध करते हुए सेक्युलर राग अलापते हुए पास आती जा रही हैं. हस्र क्या होगा भविष्य के गर्भ में है. इस साम्प्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता में पूरा देश दो हिस्सों में बँट जायेगा और भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी आदि का मुद्दा शांत हो जायेगा….
राजनीतिक पंडित अपना अपना आकलन करेंगे ..हमने अपना विचार प्रस्तुत किया है ..बस!जय हिन्द!
वस्तुत: राजनैतिक स्तर पर 1949 में जयपाल सिंह के नेतृत्व में झारखंड पार्टी का गठन हुआ जो पहले आमचुनाव में सभी आदिवासी जिलों में पूरी तरह से दबंग पार्टी रही। जब राज्य पुनर्गठन आयोग बना तो झारखंड की भी माँग हुई जिसमें तत्कालीन बिहार के अलावा उड़ीसा और बंगाल का भी क्षेत्र शामिल था। आयोग ने उस क्षेत्र में कोई एक आम भाषा न होने के कारण झारखंड के दावे को खारिज कर दिया। 1950 के दशकों में झारखंड पार्टी बिहारमें सबसे बड़ी विपक्षी दल की भूमिका में रहा, लेकिन धीरे धीरे इसकी शक्ति में क्षय होना शुरु हुआ। आंदोलन को सबसे बड़ा आघात तब पहुँचा, जब 1963 में जयपाल सिंह ने झारखंड पार्टी को बिना अन्य सदस्यों से विचार विमर्श किये कांग्रेस में विलय कर दिया। इसकी प्रतिक्रिया स्वरुप छोटानागपुर क्षेत्र में कई छोटे-छोटे झारखंड नामधारी दलों का उदय हुआ जो आमतौर पर विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करती थी और विभिन्न मात्राओं में चुनावी सफलताएँ भी हासिल करती थीं।
१५ नवम्बर २००० से १८ मार्च २००३ तक भाजपा के बाबूलाल मरांडी झारखण्ड के मुख्यमंत्री रहे. बाद में पार्टी में आतंरिक विरोध के चलते बाबूलाल मरांडी को कुर्सी छोड़नी पड़ी और अर्जुन मुंडा को मुख्य मंत्री बनाया गया. इसके बाद शिबू सोरेन मात्र दस दिन के लिए मुख्य मंत्री बने, और समर्थन नहीं जुटा पाने के कारण इस्तीफ़ा देना पड़ा. फिर अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा, शिबू सोरेन, राष्ट्रपति शासन, शिबू सोरेन, राष्ट्रपति शासन, अर्जुन मुंडा और फिर राष्ट्रपति शासन. …अब उम्मीद है कि शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत शोरेन कांग्रेस के समर्थन से झारखण्ड के मुख्य मंत्री बनने वाले हैं, मतलब कुल १३ साल के ही अन्दर इस राज्य को तीन बार राष्ट्रपति शासन और नौ मुख्य मंत्री को झेलना पड़ा.
शिबू सोरेन का दुर्भाग्य या अति महत्वाकांक्षा ही कहा जायेगा कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक, झारखण्ड आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद भी वे मुख्य मंत्री के रूप में ज्यादा दिन स्वीकार नहीं किये गए. इन्हें इस क्षेत्र का ‘गुरूजी’ भी कहा जाता है. इन्हें ‘दिशोम गुरु’ की उपाधि से भी नवाजा गया है. शिबू सोरेन ने झारखण्ड आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई. कई बार सांसद और मंत्री भी बने. पर हमेशा विवादों में रहे. नरसिम्हा राव की सरकार को बचाने के लिए इन्होने अपने पांच सांसदों के साथ घूस भी लिया था. साथ ही कई हत्याकांडों में आरोपित रहे, सजा भी काटी, बीमार भी रहे, पर पुत्र-मोह में अभी वे धृतराष्ट्र को भी मात देने वाले हैं.
उनके सुपुत्र झारखण्ड के मुख्य मंत्री तो बन जायेंगे, पर इसके लिए उन्हें कितना समझौता करना पड़ा है, यह तो धीरे धीरे सामने आने ही वाला है. कांग्रेस इन्हें पूरी तरह से चंगुल में ले चुकी है और हेमंत सोनिया के काल्पनिक गोद में बैठ चुके हैं. झारखण्ड विकास पार्टी के सांसद डॉ. अजय कुमार विधायको के खरीद फरोख्त का आरोप लगाते हुए, प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति तक को चिट्ठी लिख चुके हैं. उनके अनुसार करोड़ो में बिकने वाले विधायक जनता का क्या काम करेंगे, यह बात किसी के समझ से बाहर नहीं है.
अब तक जितनी पार्टियों की सरकारें यहाँ बनी है सभी ने झारखण्ड का भरपूर दोहन किया है. विकास के नाम पर प्रगति- जीरो. आदिवासियों की हालत और बदतर हुई है, नक्सल आतंक बढ़ा है, उद्योगपतियों, ब्यावासयियों, राजनेताओं की भी हत्या आम बात है. सड़कें, राष्ट्रियों मार्गों की हालत बदतर है. बिजली की हालत ऐसी है कि कल शिबू सोरेन के घर जब मीटिंग चल रही थी, तभी बिजली गुल हो गयी, अन्य समयों की बात क्या कही जाय! उद्योग विस्तार में, केवल टाटा स्टील का जमशेदपुर स्थित कारखाने की क्षमता का विकास हुआ है. इसमे राज्य सरकार का योगदान नगण्य है. १२ मिलयन टन टाटा स्टील का प्रस्तावित ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है. अन्य औद्योगिक घराना यहाँ उद्योग लगाना चाहते हैं, पर राजनीतिक उठापटक के दौर में कुछ खास होता हुआ नहीं दीखता.
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा पहले भाजपा के साथ थी अब कांग्रेस के साथ है. इस तरह भाजपा का ह्रास हुआ और कांग्रेस की राजनीतिक ताकत में वृद्धि. ऐसे में बाबा रामदेव का शिबू शोरेन से आकर उनके घर में मुलाकात करना और पुराना सम्बन्ध बताना समझ से परे है. बाबा रामदेव की कूटनीति की, यहाँ क्या जरूरत थी; हो सकता है, बाद में समझ में आवे. पर जो कुछ राजनीतिक नाटक आजकल पूरे देश में चल रहा है, वह कहीं से भी भारतीय लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है.
उत्तराखंड की त्रासदी का विद्रूप चेहरा और उसपर राजनीति दलों की, लाश पर की जाने वाली राजनीति भयावह है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अभी भी अनगिनत लाशें यत्र तत्र सर्वत्र दीख रही हैं. पूरी तरह से बर्बाद लोग या तो घर बार छोड़ने को मजबूर हैं या अपनी किस्मत का रोना रो रहे हैं. सरकार के अनुसार राहत कार्य पूरा हो चूका है. पर जो दृश्य देखने को मिल रहा है वह भयावह है. पूरा देश दिल खोलकर मदद कर रहा है, प्रधान मंत्री और राज्य सरकार की घोषनाएं हुई है, पर धरातल पर कितना उतरता है, देखना बाकी है.
पहले नरेन्द्र मोदी की केदारनाथ मंदिर को आधुनिक बनाने का प्रस्ताव और अब अमित शाह का राम मंदिर राग. भाजपा पूरी तरह हिंदुत्व की और बढ़ रही है और अन्य विपक्षी पार्टियाँ इसको विरोध करते हुए सेक्युलर राग अलापते हुए पास आती जा रही हैं. हस्र क्या होगा भविष्य के गर्भ में है. इस साम्प्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता में पूरा देश दो हिस्सों में बँट जायेगा और भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी आदि का मुद्दा शांत हो जायेगा….
राजनीतिक पंडित अपना अपना आकलन करेंगे ..हमने अपना विचार प्रस्तुत किया है ..बस!जय हिन्द!
Tuesday, 2 July 2013
संतुलन बनाये ही रखना !
जब होते घने बड़े जंगल,
नक्सल डकैत करते मंगल.
जंगल जब काटे जाते हैं,
विपदा नित नई बुलाते हैं.
जंगल काटा आबाद किया
खुद को ही यूं बर्बाद किया.
पेड़ों के घर में बने शहर,
छीना जंगल के पशु का घर,
आई विपदा नित नई मगर.
जंगल के पशु आ गए शहर,
पशु को जब पिंजरे में डाला,
बन गया बंदी गज मतवाला.
घटते ही गए मृग सिंह बाघ.
बन गया मनुज चालाक घाघ.
जब तापक्रम बढ़ने ही लगा,
हिम खंड स्वयम गलने ही लगा.
नदियों की धारा तेज हुई,
बाधाएँ सब निश्तेज हुई.
मिट्टी बह गयी किनारों की,
नींवे हिल गयी दिवारों की.
बह गए खेत घर दूकाने,
इसको आफत क्यों न मानें.
बह गए जानवर नर कितने,
बह गए बाप बच्चे कितने.
बिछ गयी लाश मैंदानों में,
होटल, मंदिर मयखानों में.
भोले नंदी को बचा न सके,
कसैले विष को पचा न सके.
विकराल बन गयी तब गंगा,
खुद काल बन गयी तब गंगा.
जो कोई पथ में भी आया,
धारा का वेग न थम पाया.
पर्वत का पत्थर बिखड गया,
कुटिया गरीब का सिकुड़ गया.
कुदरत का कहर बताने को,
देखो फल अब मनमाने को.
मानव चिंता कर तू अपनी,
फल भोगो अपनी ही करनी.
मानो तुम इस चेतावनी को,
मत छेड़ो ज्यादा धरनी को.
संतुलन बनाये ही रखना,
कुदरत की सुन्दर है रचना!
नभ, धरनी, पावक, वायु, नीर,
पांचो तत्वों का यह शरीर
मत करो क्षरण इस संपत को.
अब तो मानो इस सम्मत को.
- जवाहर लाल सिंह
०३.०७.१३ ०८:०० बजे शुबह.
नक्सल डकैत करते मंगल.
जंगल जब काटे जाते हैं,
विपदा नित नई बुलाते हैं.
जंगल काटा आबाद किया
खुद को ही यूं बर्बाद किया.
पेड़ों के घर में बने शहर,
छीना जंगल के पशु का घर,
आई विपदा नित नई मगर.
जंगल के पशु आ गए शहर,
पशु को जब पिंजरे में डाला,
बन गया बंदी गज मतवाला.
घटते ही गए मृग सिंह बाघ.
बन गया मनुज चालाक घाघ.
जब तापक्रम बढ़ने ही लगा,
हिम खंड स्वयम गलने ही लगा.
नदियों की धारा तेज हुई,
बाधाएँ सब निश्तेज हुई.
मिट्टी बह गयी किनारों की,
नींवे हिल गयी दिवारों की.
बह गए खेत घर दूकाने,
इसको आफत क्यों न मानें.
बह गए जानवर नर कितने,
बह गए बाप बच्चे कितने.
बिछ गयी लाश मैंदानों में,
होटल, मंदिर मयखानों में.
भोले नंदी को बचा न सके,
कसैले विष को पचा न सके.
विकराल बन गयी तब गंगा,
खुद काल बन गयी तब गंगा.
जो कोई पथ में भी आया,
धारा का वेग न थम पाया.
पर्वत का पत्थर बिखड गया,
कुटिया गरीब का सिकुड़ गया.
कुदरत का कहर बताने को,
देखो फल अब मनमाने को.
मानव चिंता कर तू अपनी,
फल भोगो अपनी ही करनी.
मानो तुम इस चेतावनी को,
मत छेड़ो ज्यादा धरनी को.
संतुलन बनाये ही रखना,
कुदरत की सुन्दर है रचना!
नभ, धरनी, पावक, वायु, नीर,
पांचो तत्वों का यह शरीर
मत करो क्षरण इस संपत को.
अब तो मानो इस सम्मत को.
- जवाहर लाल सिंह
०३.०७.१३ ०८:०० बजे शुबह.
Thursday, 27 June 2013
आम आदमी
हाँ, सद्कर्म हमेशा करता आम आदमी!
फल की चिंता करता रहता आम आदमी.
पाप कर्म करने से डरता आम आदमी
अनजाने में पाप से डरता आम आदमी
धर्म कर्म में लिप्त ही रहता आम आदमी
ईश्वर में भी आस्था रखता आम आदमी
मोक्ष की चिंता करता रहता आम आदमी
तीर्थाटन करने को जाता आम आदमी!
देवभूमि में जाकर मरता आम आदमी
प्राकृत आपदा में भी मरता आम आदमी
जलधारा मे कौन है बहता आम आदमी!
धर्म आधारित दंगा करता आम आदमी
सबसे ज्यादा कौन है मरता आम आदमी
महंगाई के मार से मरता आम आदमी
टैक्स हमेशा समय से भरता आम आदमी
कानून का नित पालन करता आम आदमी
कानून के डंडे से डरता आम आदमी
सजा हमेशा ही है पाता आम आदमी
छोटा धंधा नौकरी करता आम आदमी!
हर हालत में मदद है करता आम आदमी
वोट बूथ पर जाकर देता आम आदमी
नेता का भी बना चहेता आम आदमी
नेता का शिकार भी बनता आम आदमी
जात धर्म में जाकर बंटता आम आदमी
आत्म हत्या ज्यादा करता आम आदमी!
रोज दिखावा कौन है करता आम आदमी
और कर्ज में भी है फंसता आम आदमी
किसी किसी को ख़ास बनाता आम आदमी
और जुल्म की मार है सहता आम आदमी
बीच सड़क पर कौन है मरता आम आदमी
मुआवजे के लिए भी मरता आम आदमी
दफ्तर के बाबू से भिड़ता आम आदमी
बच्चे ज्यादा पैदा करता आम आदमी
सदा शिकायत करता रहता आम आदमी
इज्जत की चिंता भी करता आम आदमी
ईश्वर को भी खूब मानता आम आदमी
उनसे दया की आशा रखता आम आदमी
रक्षा मेरी करो ये कहता आम आदमी
रोज रोज बंद कौन है करता आम आदमी
बंद की पीड़ा कौन है सहता आम आदमी
नेताओं की ढाल है बनता आम आदमी
शिकार आतंकी का बनता आम आदमी
आतंकी भी कौन है बनता आम आदमी
सेना पुलिस में भरती होता आम आदमी
कभी जुल्म तब वो ही करता आम आदमी
आदेश पालन वो ही करता आम आदमी
उसका डंडा कौन है सहता आम आदमी
सीमा की रक्षा है करता आम आदमी
विपदा से भी रक्षा करता आम आदमी
और ना बदले में कुछ लेता आम आदमी
सदा अभाव के बीच ही रहता आम आदमी!
नई नई जिज्ञाषा रखता आम आदमी!
अन्दर रोता बाहर हँसता आम आदमी!
अपनों की चिंता में मरता आम आदमी!
हर कोई की बातें सुनता आम आदमी!
रोज नई कविताएँ लिखता आम आदमी!
कविता लिखकर खुद ही पढ़ता आम आदमी!
आम आदमी का गुण गाता आम आदमी
अब जग जाओ ये भी कहता आम आदमी
फल की चिंता करता रहता आम आदमी.
पाप कर्म करने से डरता आम आदमी
अनजाने में पाप से डरता आम आदमी
धर्म कर्म में लिप्त ही रहता आम आदमी
ईश्वर में भी आस्था रखता आम आदमी
मोक्ष की चिंता करता रहता आम आदमी
तीर्थाटन करने को जाता आम आदमी!
देवभूमि में जाकर मरता आम आदमी
प्राकृत आपदा में भी मरता आम आदमी
जलधारा मे कौन है बहता आम आदमी!
धर्म आधारित दंगा करता आम आदमी
सबसे ज्यादा कौन है मरता आम आदमी
महंगाई के मार से मरता आम आदमी
टैक्स हमेशा समय से भरता आम आदमी
कानून का नित पालन करता आम आदमी
कानून के डंडे से डरता आम आदमी
सजा हमेशा ही है पाता आम आदमी
छोटा धंधा नौकरी करता आम आदमी!
हर हालत में मदद है करता आम आदमी
वोट बूथ पर जाकर देता आम आदमी
नेता का भी बना चहेता आम आदमी
नेता का शिकार भी बनता आम आदमी
जात धर्म में जाकर बंटता आम आदमी
आत्म हत्या ज्यादा करता आम आदमी!
रोज दिखावा कौन है करता आम आदमी
और कर्ज में भी है फंसता आम आदमी
किसी किसी को ख़ास बनाता आम आदमी
और जुल्म की मार है सहता आम आदमी
बीच सड़क पर कौन है मरता आम आदमी
मुआवजे के लिए भी मरता आम आदमी
दफ्तर के बाबू से भिड़ता आम आदमी
बच्चे ज्यादा पैदा करता आम आदमी
सदा शिकायत करता रहता आम आदमी
इज्जत की चिंता भी करता आम आदमी
ईश्वर को भी खूब मानता आम आदमी
उनसे दया की आशा रखता आम आदमी
रक्षा मेरी करो ये कहता आम आदमी
रोज रोज बंद कौन है करता आम आदमी
बंद की पीड़ा कौन है सहता आम आदमी
नेताओं की ढाल है बनता आम आदमी
शिकार आतंकी का बनता आम आदमी
आतंकी भी कौन है बनता आम आदमी
सेना पुलिस में भरती होता आम आदमी
कभी जुल्म तब वो ही करता आम आदमी
आदेश पालन वो ही करता आम आदमी
उसका डंडा कौन है सहता आम आदमी
सीमा की रक्षा है करता आम आदमी
विपदा से भी रक्षा करता आम आदमी
और ना बदले में कुछ लेता आम आदमी
सदा अभाव के बीच ही रहता आम आदमी!
नई नई जिज्ञाषा रखता आम आदमी!
अन्दर रोता बाहर हँसता आम आदमी!
अपनों की चिंता में मरता आम आदमी!
हर कोई की बातें सुनता आम आदमी!
रोज नई कविताएँ लिखता आम आदमी!
कविता लिखकर खुद ही पढ़ता आम आदमी!
आम आदमी का गुण गाता आम आदमी
अब जग जाओ ये भी कहता आम आदमी
Sunday, 23 June 2013
बरसात से बर्बादी
प्रस्तुत रचना केदारनाथ के जलप्रलय को अधार मानकर लिखी गयी है.
चौपाई -
सूरज ताप जलधि पर परहीं, जल बन भाप गगन पर चढही.
भाप गगन में बादल बन के, भार बढ़ावहि बूंदन बन के.
पवन उड़ावहीं मेघन भारी, गिरि से मिले जु नर से नारी.
बादल गरजा दामिनि दमके, बंद नयन भे झपकी पलके!
रिमझिम बूँदें वर्षा लाई, जल धारा गिरि मध्य सुहाई
अति बृष्टि बलवती जल धारा, प्रबल देवनदि आफत सारा
पंथ बीच जो कोई आवे. जल धारा सह वो बह जावे.
छिटके पर्वत रेतहि माही, धारा सह अवरुध पथ ताही.
कोई बांध सहै बल कैसे, पवन वेग में छतरी जैसे.
छेड़ा हमने ज्यों विधि रचना, विधि ने किया बराबर उतना.
पथ में शिला रेत की ढेरी, हे प्रभु, छमहु दोष सब मेरी.
भोलेनाथ शम्भु त्रिपुरारी, तुमही सबके विपदा हारी.
आफत बाद करो पुनि रचना, बड़ी भयंकर थी प्रभु घटना.
सहन न हो कछु करहु गुसाईं, तेरे शरण भगत की नाई,
दोहा- दीन हीन विनती करौ, हरहु नाथ दुख मोर.
आफ़तहि निकालो प्रभू, दास कहावहु तोर.
पवन उड़ावहीं मेघन भारी, गिरि से मिले जु नर से नारी.
बादल गरजा दामिनि दमके, बंद नयन भे झपकी पलके!
रिमझिम बूँदें वर्षा लाई, जल धारा गिरि मध्य सुहाई
अति बृष्टि बलवती जल धारा, प्रबल देवनदि आफत सारा
पंथ बीच जो कोई आवे. जल धारा सह वो बह जावे.
छिटके पर्वत रेतहि माही, धारा सह अवरुध पथ ताही.
कोई बांध सहै बल कैसे, पवन वेग में छतरी जैसे.
छेड़ा हमने ज्यों विधि रचना, विधि ने किया बराबर उतना.
पथ में शिला रेत की ढेरी, हे प्रभु, छमहु दोष सब मेरी.
भोलेनाथ शम्भु त्रिपुरारी, तुमही सबके विपदा हारी.
आफत बाद करो पुनि रचना, बड़ी भयंकर थी प्रभु घटना.
सहन न हो कछु करहु गुसाईं, तेरे शरण भगत की नाई,
दोहा- दीन हीन विनती करौ, हरहु नाथ दुख मोर.
आफ़तहि निकालो प्रभू, दास कहावहु तोर.
Sunday, 16 June 2013
रवि महिमा
रवि महिमा- ॐ श्री सूर्याय नम:
चौपाई – रवि की महिमा सब जग जानी, बिनू रवि संकट अधिक बखानी.
शुबह सवेरे प्रगट गगन में, फूर्ति जगावत जन मन तन में!
दूर अँधेरा भागा फिरता, सूरज नहीं किसी से डरता.
आभा इनका सब पर भारी, रोग जनित कीटन को मारी
ग्रीष्म कठिन अति जन अकुलानी, शरद ऋतू में दुर्लभ जानी
ग्रीष्महि जन सब घर छुप जावें, शरद ऋतू में बाहर आवें.
गर्मी अधिक पसीना आवे, मेघ दरस न गगन में पावे.
पावस मासहि छिप छिप जावें. जलद बीच नजर नहीं आवे.
हल्की बारिश में दिख जावें, इन्द्रधनुष अति सुन्दर भावे.
दोहा - कबहू रवि घन में छिपे, कबहू प्रगटे सुदूर
लुक्का छिप्पी करत हैं, नभ से निकले नूर.
सूरज जग के त्राण हैं, पूजा करिए जरूर.
जो जन सूरज भगत हैं, तन से निकले नूर!
चौपाई – रवि की महिमा सब जग जानी, बिनू रवि संकट अधिक बखानी.
शुबह सवेरे प्रगट गगन में, फूर्ति जगावत जन मन तन में!
दूर अँधेरा भागा फिरता, सूरज नहीं किसी से डरता.
आभा इनका सब पर भारी, रोग जनित कीटन को मारी
ग्रीष्म कठिन अति जन अकुलानी, शरद ऋतू में दुर्लभ जानी
ग्रीष्महि जन सब घर छुप जावें, शरद ऋतू में बाहर आवें.
गर्मी अधिक पसीना आवे, मेघ दरस न गगन में पावे.
पावस मासहि छिप छिप जावें. जलद बीच नजर नहीं आवे.
हल्की बारिश में दिख जावें, इन्द्रधनुष अति सुन्दर भावे.
दोहा - कबहू रवि घन में छिपे, कबहू प्रगटे सुदूर
लुक्का छिप्पी करत हैं, नभ से निकले नूर.
सूरज जग के त्राण हैं, पूजा करिए जरूर.
जो जन सूरज भगत हैं, तन से निकले नूर!
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