Sunday, 5 October 2014

धार्मिक आयोजन और भगदड़

भारत में बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान भगदड़ की घटनाएं अक्सर होती रही हैं.
आइये कुछ आंकडे देखते हैं, जो अंतर्जाल से लिए गए हैं.
त्योहारों और विशेष आयोजनों के मौकों पर धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं की भीड़ भारत में आम बात है लेकिन कई बार भगदड़ मचने से रंग में भंग हो जाता है ... 1986 - हरिद्वार में एक धार्मिक आयोजन के दौरान भगदड़ में 50 लोगों की मौत हो गई.
14-01-2011 - ... 100 लोगों की मौत हो गई है. श्रृद्धालुओं को लेकर जा रही जीप के नियंत्रण खो देने और लोगों से टकरा जाने के बाद मची भगदड़ से हुआ हादसा. ...
08-11-2011 - हरिद्वार में हुई एक भगदड़ के दौरान कम से कम 16 लोग मारे गए और 40 जख्मी हुए हैं. गंगा के किनारे शांतिकुंज आश्रम के एक आयोजन के दौरान मुख्य समारोह स्थल के एक गेट पर भगदड़ मची. ... भगदड़ उस समय हुई जब कुछ श्रद्धालुओं ने गायत्री परिवार के धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लेने की जल्दी की.
14-01-2012 - मध्यप्रदेश के रतलाम में शहीदे कर्बला के 40 वें दिन हुए धार्मिक आयोजन के दौरान अचानक भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में बारह लोगों की मौत हो गई और कई अन्य जख्मी हो गए।
20-02-2012 - गुजरात में भगदड़, 6 लोगों की मौत गुजरात के जूनागढ़ में आयोजित शिवरात्रि मेले में रविवार रात हुई भगदड़ में 6 लोगों ... के लिए लाखों श्रद्धालुओं की एकत्रित भीड़ में अचानक हुई भगदड़ से 6 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 3 महिलाएं और 1 बच्चा शामिल हैं।
24-09-2012 ... देवघर में अनुकूल चन्द्र ठाकुर की 125वीं जयंती पर सत्संग आश्रम में आयोजित समारोह में भगदड़ मे कम से कम 9 यात्रियों की मृत्यु और अनेक के घायल होने की घटना
11-02-2013 - बारह वर्षों में होने वाले कुंभ मेले में कल रविवार को मौनी अमावस्‍या के दिन इलाहाबाद के रेलवे स्‍टेशन पर भगदड़ मच जाने से लगभग 36 लोगों की मौत हो गयी।
26 अगस्त 2014 ... मथुरा के बरसाना और देवघर के श्री ठाकुर आश्रम में मची भगदड़ से लगभग एक दर्जन श्रद्धालु मारे गए थे।
०४.१०.२०१४ को आंध्रप्र्रदेश के कुर्नूल जिले में एक मंदिर में आयोजित एक धार्मिक समारोह में भगदड़ मच गई। भगदड़ में 12 साल के एक बच्चे की मौत हो गई जबकि 37 श्रद्धालु घायल हो गए।
०३.१०.२०१४ बिहार की राजधानी पटना में रावण दहन के बाद भगदड़ में मरने वालों की अधिकारिक  संख्या 3बतायी जा रही है. पटना के गांधी मैदान में हुई इस घटना पर राज्य के गृह सचिव आमिर सुभानी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के सीएम जीतन राम मांझी से फोन पर बात की है. पीएम ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है.
घटना एक्जीबिशन रोड इलाके में रामगुलाम चौक के पास उस वक्त हुई जब अफवाह की वजह से भगदड़ मच गई. घायलों को पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है. पटना के डीएम मनीष वर्मा ने बताया कि हादसे में मरने वालों में अध‍िकतर महिलाएं और बच्चे हैं. डीएम का कहना है कि हादसे की वजह की जांच की जा रही है.
पुलिस के मुताबिक लोग गांधी मैदान में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम से लौट रहे थे. वहीं, मां दुर्गा की मूर्ति विसर्जन के लिए भी इसी रास्ते पर सैंकड़ों की तादाद में लोग मौजूद थे. बताया जा रहा है कि इस दौरान किसी ने बिजली का तार गिरने की अफवाह फैला दी. चश्मदीदों के मुताबिक जिस वक्त भगदड़ मची उस वक्त गांधी मैदान का सिर्फ एक गेट ही खुला था और एक्जीबिशन रोड पर काफी भीड़ थी. हादसे के बाद कई लोग लापता हैं जिनके परिजन तलाश कर रहे हैं. चश्मदीदों का कहना है कि जिस वक्त घटना हुई, उस वक्त मौके पर रोशनी न के बराबर थी. घटनास्थल के पास अब भी लोगों के चप्पल जूते बिखरे पड़े हैं.
हादसे के बाद सियासत भी शुरू हो गई है. बीजेपी सांसद रामकृपाल यादव ने राज्य की जेडी(यू) नीत सरकार पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. बीजेपी नेता सीपी ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन भीड़ की तुलना में इंतजाम करने में विफल रहे हैं. पूर्व सीएम लालू यादव ने कहा है कि भगदड़ प्रशासनिक चूक का मामला है.
पटना में उसी दिन सुबह ही एक सड़क हादसा हुआ था जब फुलवारीशरीफ में एक कार ने आठ लोगों को रौंद दिया. इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई. गौरतलब है कि साल 2012 में छठ पर्व के दौरान भी पटना के गंगा घाट पर भगदड़ मच गई थी जिसमें कई लोग मारे गए थे.
दो वर्ष पूर्व छठ पर्व के दौरान भी पटना में इसी तरह भगदड़ मची थी लेकिन उससे कोई सबक न लेते हुए इस बार भी प्रशासन की इंतजाम नाकाफी थे। हादसे के बाद नाराज लोगों ने घटनास्थल पर और पीएमसीएच के बाहर हंगामा किया। गृह मंत्रालय ने हादसे पर रिपोर्ट तलब की है।
पांच लाख से ज्यादा की भीड़ से खचाखच भरे गांधी मैदान में 60 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया गया था। पुतला दहन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी शिरकत की थी। बताया गया है कि रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों में आग लगने के बाद जैसे ही लोग मैदान से बाहर जाने लगे, तभी भगदड़ मची। मैदान के अंतर्गत रामगुलाम चौक के नजदीक मची भगदड़ में अंधेरा होने के कारण लोग चपेट में आते चले गए। बताते हैं कि भगदड़ बिजली का तार टूटने की अफवाह फैलने के बाद मची। सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों ने स्थिति पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन वे असफल रहे। घटना के बाद बचाव के उपाय न होने से लोगों में काफी आक्रोश था। वे हंगामे पर उतारू हो गए। मुख्यमंत्री ने घटना की जांच का आदेश दिया है। गृह सचिव और एडीजी घटना की जांच करेंगे।
यह वही गांधी मैदान है जहां पर अक्टूबर, 2013 में नरेंद्र मोदी की रैली हुई थी और उस दौरान बम विस्फोट हुए थे। बावजूद इस सबके प्रशासन ने कोई सतर्कता नहीं बरती।
80 के दशक में जमशेदपुर में भी विजयादशमी के दिन भगदड़ मची थी और कई लोग मारे गए थे. उसके बाद जमशेदपुर में भगदड़ का इतिहास नहीं है. यहाँ के प्रशासन और अनुशासित नागरिकों ने भी सबक ले लिया.
दिक्कत यह है कि ऐसी घटनाएं होने के बाद भी न धार्मिक आयोजनों के आयोजक और न ही स्थानीय प्रशासन सावधान रहता है। स्थानीय प्रशासन इसलिए इन आयोजनों में हस्तक्षेप नहीं करता, क्योंकि इससे धार्मिक भावनाएं भड़कने का खतरा होता है। इनके आयोजकों में भी इसलिए लापरवाही होती है, क्योंकि वे जानते हैं कि धार्मिक आयोजन होने के नाते वे काफी छूट ले सकते हैं। कम ही धार्मिक प्रतिष्ठान हैं, जो आम लोगों की सुविधा और सुरक्षा के नजरिये से योजनाबद्ध तरीके से आयोजन करते हों।
ज्यादातर जगहों पर आने-जाने के मार्ग इतने संकरे होते हैं कि भगदड़ होने पर लोगों के कुचले जाने का खतरा होता है। इन दिनों भीड़ के नियंत्रण के लिए धार्मिक प्रतिष्ठानों में ऐसे बैरिकेड लगा दिए जाते हैं कि भगदड़ होने पर कोई इधर-उधर नहीं हो सकता। ज्यादातर मंदिरों या अन्य धार्मिक प्रतिष्ठानों का निर्माण तब हुआ था, जब देश की आबादी इतनी नहीं थी और यातायात के साधन भी सुगम नहीं थे। अब तो दूरदराज के मंदिरों में भी आसानी से लाखों लोग पहुंच जाते हैं। कई मंदिरों में पहले कुछ विशेष अवसरों पर ही थोड़ी-बहुत भीड़ होती थी, अब रोज वहां मीलों लंबी लाइनें देखने को मिलती हैं।
हमारा आम रवैया यह होता है कि जब तक दुर्घटना नहीं हो जाती, तब तक कुछ नहीं करते और अगर दुर्घटना हो जाती है, तो दूसरों पर जिम्मेदारी डाल देते हैं। अब संचार और यातायात की सुविधा की वजह से लाखों लोगों का किसी आयोजन में इकट्ठा होना कोई मुश्किल नहीं है, इसलिए सुरक्षा के मामले में लापरवाही का रवैया चल नहीं सकता और यह बात सिर्फ आयोजकों को नहीं, वहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भी समझनी होगी। कोई नहीं चाहता कि श्रद्धा से की गई तीर्थयात्रा किसी के लिए मृत्यु का कारण बने, लेकिन धार्मिक आयोजन तभी सुरक्षित होंगे, जब आयोजक और श्रद्धालु, दोनों व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारी को समझें।
आजकल अन्धानुकरण भी काफी बढ़ गया है, सभी लोग इन धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर अपने पाप धो डालना चाहते हैं या पुण्य कमाकर सीधे स्वर्ग जाने की कामना रखते हैं. इसमे किसी को भी जरा सा धैर्य नहीं होता. आखिर हम सब विकसित होकर क्या सीख रहे हैं. आस्था होना अलग बात है और अन्धानुकरण अलग. हमें इनमे फर्क करना सीखना होगा. खासकर इन दुर्घटनाओं में बच्चे और महिलाएं ही ज्यादा हताहत होते हैं कम से कम उन्हें तो इस भीड़-भाड़ से बचाए जाने की कोशिश की जानी चाहिए. जांच होगी राजनीति भी होगी. मुआवजा भी मिलेगा, पर जिन्दगी वापस नहीं मिलेगी. हम सब मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना ही कर सकते हैं.
-       -  जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.


     

Sunday, 21 September 2014

एक बार फिर भाई-भाई!

“हिन्दी चीनी भाई-भाई”- यही नारा दिया था उस पंचशील योजना के दौरान, जब पंडित जवाहर लाल नेहरू चीन यात्रा पर गये थे। उसके कुछ समय पश्चात ही चीन ने हम पर हमला कर दिया और 1962 का वो युद्ध हम हार गये। वो बीता हुआ समय है, पर सवाल ये है कि क्या अब बदले हुए वक्त में जब भारत भी सशक्त हो चुका है और विश्व में अपनी पहचान बना चुका है, तब चीन और भारत के पड़ोसी रिश्ते वैसे ही हैं, जैसे 1962 में थे अथवा नहीं? क्या चीन की सोच भारत के लिये बदली है?
बदले हुए माहौल में भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व ने जिस तरह एक-दूसरे के प्रति विश्वास जताया है, वह एशिया ही नहीं पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत में कई जरूरी मुद्दे उठे और आपसी सहयोग पर सहमति बनी। चीन फिलहाल भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करने के लिए तैयार हुआ है। सिविल न्यूक्लियर मामले में सहयोग के लिए दोनों देश बातचीत करने पर सहमत हुए हैं। शिखर वार्ता में दोनों देशों के बीच 12 समझौते हुए, जिनमें पांच साल के आर्थिक प्लान पर हुआ करार बेहद अहम है। कैलाश यात्रा के लिए नए रूट, ऑडियो वीडियो मीडिया, रेलवे के आधुनिकीकरण, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी समझौता हुआ। कस्टम को आसान करने का करार हुआ है। मुंबई को शंघाई की तरह विकसित करने में चीन मदद करेगा और गुजरात तथा महाराष्ट्र में दो इंडस्ट्रियल पार्क बनाएगा। जाहिर है, भारत के तेज विकास और आधुनिकीकरण में चीन की भूमिका बढ़ने वाली है। निश्चय ही इसका लाभ चीनी इकॉनमी को भी मिलेगा। कारोबारी गतिविधियां तभी सुचारू रूप से चल पाती हैं जब दो मुल्कों के सियासी और कूटनीतिक रिश्ते बेहतर होते रहें। अभी जो भरोसा राजनयिक स्तर पर कायम हुआ है, वह दोनों देशों की जनता के बीच भी बनना चाहिए, तभी आर्थिक समझौतों का कोई मतलब है। इसके लिए दोतरफा सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाना एक अच्छा रास्ता है। दुर्भाग्य से शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान ही जम्मू-कश्मीर के चुमार इलाके में चीनी सेना की घुसपैठ का मामला सामने आ गया। शिखर वार्ता में यह मसला भी उठा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीमा पर शांति के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है। उन्होंने चीन से अपनी वीजा नीति पर भी स्टैंड साफ करने को कहा। यह मसला अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर के लोगों को स्टेपल्ड वीजा दिए जाने को लेकर उठता रहा है। चीनी राष्ट्रपति का मानना है(कूटनीतिक जवाब) कि भारत-चीन की सीमा चिह्नित न होने के कारण वहां कुछ ऐसी गतिविधियां होती हैं, जिससे गलतफहमी फैलती है। शी ने इस मुद्दे को सुलझाने का आश्वासन भी दिया है। दोनों देशों को यह बात समझनी होगी कि सीमा पर स्थायी शांति कायम करके ही आर्थिक रिश्तों को दूर तक ले जाया जा सकेगा। भारत के आम लोगों में जब तक चीन को लेकर पॉजिटिव राय नहीं बनेगी, तब तक उसका निवेश यहां अन्य देशों जितना सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए आशा की जानी चाहिए कि इस दिशा में अलग से पहल होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की वार्ता के कुछ ही घंटे बाद चीन के सैनिकों ने लद्दाख के चुमार में भारतीय इलाके से पीछे हटना शुरू कर दिया। हालांकि, चीनी सेना के वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पूरी तरह पीछे हो जाने की पुष्टि नहीं हो पाई है। डेमचोक में अभी भी गतिरोध बना हुआ है। घटना के बारे में बताया जाता है कि चीनी एल.ए.सी. के उस पार अपने क्षेत्र में सड़क बना रहे थे, लेकिन रविवार को उसके कामगार भारतीय क्षेत्र में घुस गए। विरोध करने पर करीब सौ भारतीय सैनिकों को 300 चीनी सैनिकों ने घेर लिया था और चार दिनों से अवैध रूप से जमे हुए थे। गुरुवार तक चीनी सैनिकों की संख्या बढ़कर 1000 के करीब हो गई थी। इसके बाद भारत ने भी अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी। इससे तनाव काफी बढ़ गया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार रात करीब 9:45 बजे चीन के सैनिक लौटने लगे। इसके बाद भारत ने भी अपने सैनिकों की संख्या घटा दी, लेकिन पैनी नजर रखी जा रही है, क्योंकि वास्तविक नियंत्रण रेखा के नजदीक चीन की आर्मी ने कैंप लगा रखे हैं। हालात की समीक्षा की जाएगी। चुमार से करीब आठ किमी दूर डेमचक इलाके में चीनी खानाबदोश जाति ‘रेबोस’ के घुसने और भारतीय क्षेत्र में चल रहे नहर निर्माण कार्य को रुकवाने की कोशिश के कारण बनी तनाव की स्थिति जस की तस है।
मोदी ने द्विपक्षीय बातचीत में चीन के राष्ट्रपति चिनफिंग के सामने सीमा विवाद और चीनी सैनिकों की घुसपैठ का मुद्दा जोरशोर से उठाया था। मोदी ने चीन से कहा कि वह भारत की संवेदनशीलता का सम्मान करे ताकि दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाई पर पहुंच सकें। मोदी ने इस बात पर भी ऐतराज जताया कि चीन अरुणाचल प्रदेश के निवासियों को स्टेपल्ड वीजा जारी करता है।
पीएम नरेंद्र मोदी और चीन से राष्ट्रपति शी जिनफिंग के बीच कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए एक ‘अल्टरनेटिव रूट’ बनाने पर सहमति के बाद इससे जुड़ा एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस नए रूट का विरोध करते हुए कहा है कि यह शास्त्र सम्मत नहीं है। नए रूट के तहत कैलाश मानसरोवर की इस धार्मिक यात्रा को नाथुला पास के जरिये कराए जाने पर सहमति बनी है। हरीश रावत का कहना है कि यह नया रूट धर्म सम्मत और शास्त्र सम्मत नहीं है। उनका कहना है कि यह लोगों की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है। – अब रावत साहब की अपनी अलग राय हो सकती है, वैसे भी विपक्ष के नेता कुछ तो कहेंगे ही.
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय मुस्लिमों की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद दिए गए अपने पहले इंटरनैशनल इंटरव्यू में मोदी ने कहा कि भारतीय मुस्लिम देश के लिए ही जिएंगे और देश के लिए ही मरेंगे। उन्होंने कहा कि अल कायदा को इस बात का भ्रम है कि वे उसके इशारों पर नाचेंगे। सीएनएन से बातचीत में अलकायदा द्वारा हाल में जारी विडियो के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में मोदी ने कहा, ‘मेरा मानना है कि वे हमारे देश के मुसलमानों के साथ अन्याय कर रहे हैं। अगर कोई यह सोचता है कि मुसलमान उनके इशारों पर नाचेंगे तो यह उनका भ्रम है। भारत के मुसलमान जान दे देंगे लेकिन भारत के साथ विश्वासघात नहीं करेंगे। वे भारत के लिए बुरा नहीं सोचेंगे।’ यह इंटरव्यू भारतीय मूल के जाने माने पत्रकार फरीद जकारिया ने लिया है। उन्होंने भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति के समर्थन में तर्क देते हुए कहा, ‘भारत के पड़ोस में अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अलकायदा का अच्छा प्रभाव है। भारत में करीब 17 करोड़ मुसलमान हैं, लेकिन उनमें से अलकायदा के सदस्य न के बराबर हैं।’ उन्होंने अलकायदा को मानवता के खिलाफ संकट बताते हुए इसके खिलाफ मिलकर लड़ने की बात कही। मोदी ने अमेरिका और भारत के बीच संबंध को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। सितंबर के अंतिम सप्ताह में मोदी अमेरिका के दौरे पर जाने वाले हैं।
सवाल फिर वही है कि श्री नरेंद्र मोदी क्या नेहरू के कदमों पर चल पड़े हैं. १९६२ की तरह चीन फिर से धोखा तो नहीं देगा ? वैसे इसकी संभावना कम नजर आती है, क्योंकि तब और अब की स्थितियों में काफी बदलाव आया है. अब कोई भी देश जल्दी युद्ध नहीं चाहता. हाँ एक दूसरे पर दबाव बनाने की जद्दो-जहद कायम रहती है. सबको एक दूसरे की जरूरत भी है. बदले हुए ग्लोबल माहौल में ब्यापार और प्रसार बढ़ाने के लिए यह जरूरी भी है, साथ ही आतंकवाद जैसे हथकंडों से मिलकर मुकाबला करना अत्यंत ही आवश्यक है. कुछ दिन पहले तक भाजपा के कुछ नेता मुस्लिमों पर दनादन जुबानी हमले किये जा रहे थे, पर उपचुनाव में पासा पलट जाने से कदम खींच लेने में ही बुद्धिमानी है, यह मोदी जी अच्छी तरह जानते हैं. साथ ही अमेरिका जाने से पहले अपनी छवि को नया रूप देना ही होगा.
१९६२ के समय में ही भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री पंडित नेहरू और अमरीका के राष्ट्रपति जॉन केनेडी के साथ भी अच्छे ताल्लुकात थे. नेहरू भारतीय उद्योग के जन्मदाता कहे जाते हैं तो मोदी आधुनिक विकास के समर्थक. अब तो चाचा नेहरू की तरह मोदी भी ‘बच्चों के चाचा’ बन ही गए हैं.
चाहे जो हो मोदी जी हर कला में माहिर हैं और लगातार सफलता की सीढ़ी चढ़ते जा रहे हैं. अब तो बिल गेट्स भी आ गए है, बाढ़ पीड़ित कश्मीरियों की मदद के लिये, साथ सात लाख अमरीकी डॉलर लेकर; साथ ही प्रधान मंत्री जन-धन योजना की निगरानी रखने की भी पेशकश कर रहे हैं, जिसके लिए आर बी आई ने पिछले दिनों चिंता व्यक्त की थी. उम्मीद यही की जानी चाहिए कि उनके साथी, सहयोगी भी उनके साथ चलेंगे. वैसे श्री मोदी को विदेश मंत्रालय अपने पास ही रखना चाहिए था. विदेश मंत्री बेचारी सुषमा स्वराज कहीं भी नजर नहीं आतीं. जब विदेशों से बातें चल रही होती हैं, तो वह बिहार के नालंदा में सास्कृतिक धरोहर खोजती नजर आती हैं. वैसे अब खबर है की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 24 सितंबर से शुरू हो रही 10 दिन की अमेरिका यात्रा में करीब 100 देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात करेंगी।
योगी आदित्य नाथ अब क्या बोलेंगे वे ही जाने. वैसे उनके बारे में यही कहा जाता है, वे अपनी बात को ही सही मानते हैं.
जय भारत! जय हिन्द!
जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर

Monday, 15 September 2014

कोशी, केदार और कश्मीर का कहर

कोशी नेपाल एवं भारत के बीच बहनेवाली, गंगा की सहायक नदी है, जिसका जलग्रहण क्षेत्र करीब 69300 वर्ग किलोमीटर नेपाल में है। यह कंचनजंगा की पश्चिम की ओर से नेपाल की पहाड़ियों से उतर कर भीमनगर होते हुए बिहार के मैदानी इलाके में प्रवेश करती है। यह एक बारहमासी नदी है प्रत्येक वर्ष कोसी नदी में बह रही गाद के कारण नदी के तट का स्तर बांध के बाहर की जमीन से ऊपर हो गया है।
कोसी बराज से ऊपर 12 किमी दूरी पर 18 अगस्त 2008 को पूर्वी बांध में दरार हुआ। नदी बांध की दरार को और तोड़ती हुई नये मार्ग में बहने लगी। इस नये प्रवाह से करीब 3000 वर्ग कि.मी. क्षेत्र का सर्वनाश हुआ। आवास, विद्यालय, सड़क, चिकित्सालय सभी नदी के प्रवाह से क्षतिग्रस्त हुए। यद्यपि केन्द्र सरकार, निजी क्षेत्र के लोगों एवं गैर-सरकारी संस्थानों द्वारा राज्य सरकार की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया गया.
कोसी नदी की बाढ़ से तबाह इलाकों का 14 हजार 808 करोड़ रु. की लागत से पुनर्निर्माण की घोषणा की गयी। उत्तर बिहार में कोसी की बाढ़ से भारी तबाही के बाद राहत व बचाव के पश्चात अब प्रभावित आबादी के दीर्घकालीन पुनर्वास, इलाके के पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। क्यों आती है बाढ़?
पर्यावरणविदों का कहना है कि नेपाल स्थित कोसी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र (हिमालय)में प्राकृतिक और मानवीय कारणों के चलते मृदा अपरदन (जमीन की ऊपरी परत अपनी जगह से हट जाना) और भूस्खलन होने से मैदानी इलाकों को प्रतिवर्ष बाढ़ की समस्या से रुबरु होना पड़ता है। ऊपरी पहाड़ी इलाके से निकलने के कारण वर्षा ऋतु के समय कोसी का बहाव अपने सामान्य बहाव से 18 गुना ज्यादा हो जाता है। ऐसे में कोसी तीव्र बहाव के साथ जमीन की ऊपरी परत को गाद के तौर पर साथ लेती आती है।
कोसी का बहाव मैदानी इलाकों में कम होने पर यह गाद नदी की सतह पर जमा होना शुरु हो जाती है। ऐसे में वर्षा होने पर नदी का जलस्तर बढ़ने लगता है। और नदी अपना प्रवाह क्षेत्र या मार्ग बदलने लगती है। जिसकी वजह से बाढ़ आ जाती है। पिछले 100 सालों में यह नदी अपने मार्ग को 200 किलोमीटर तक बदल चुकी है।
हमेशा की तरह इस साल भी कोसी का कहर बिहार के लिए शोक बनने वाली थी, हजारों लोगों को हटाया गया था, पर इस बार की त्रासदी टल गयी और लोग अपने घरों को पहुँच गए. वैसे हर साल बाढ़ की मार झेलने वाला बिहार में इस साल कम बृष्टि हुई और अधिकांश खेत बंजर ही रह गए.
उत्तराखंड और केदारनाथ
पिछले साल उत्तराखंड में आए जलप्रलय ने केदारनाथ में मौत का ऐसा तांडव मचाया कि देखने सूनने वालों की रूह कांप गई। केदार घाटी पूरी तरह तबाह हो गई। सैंकड़ों गांव लापता हो गए और हजारों लोग मारे गए।
जिस समय यह हादसा हुआ केदारनाथ की 90 होटले ठसाठस भरी हुई थी। इनमें भगवान शिव की आराधना के लिए आए हजारों लोग ठहरे हुए थे।
जल प्रलय से आई तबाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केदारनाथ के नजदीक स्थित सोनबाजार इलाका भूस्खलन के कारण झील में तब्दील हो गया। केदार नाथ का मंदिर किसी तरह बच सका पर मौत का ताण्डव वहां भी खूब हुआ. एक साल बाद वहां स्थिति सामान्य होने को है, पर बीच बीच में अधिक वर्षा के कारण चेतावनी और नुक्सान तो होता ही है.
जम्मू व कश्मीर
बाढ़ से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर में राहत और बचाव कार्य में राज्य की उमर अब्दुल्ला सरकार के नाकाम रहने के बाद अब केंद्र सरकार ने पूरी तरह मोर्चा संभाल लिया है। हालात को सामान्य करने के लिए राज्य में केंद्र ने तमाम संसाधन झोंक दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय गृह सचिव के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम बनाई गई है, जो राहत और बचाव कार्य को तेज करने का जिम्मा संभाल रही है।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘उम्मीद है कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह घाटी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लाखों लोगों के लिए चल रहे राहत एवं बचाव कार्य में मार्गदर्शन करेंगे।’ गौरतलब है कि राहत और बचाव कार्य की समीक्षा करने के बुधवार को एक उच्चस्तरीय इमर्जेंसी मीटिंग हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिदायत की थी कि आपदा प्रभावित लोगों की खाना और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान दिया जाए।
अभी तक सेना और एनडीआरएफ ने मिलकर करीब दो लाख लोगों को बचाया है, लेकिन अब भी श्रीनगर में पांच लाख से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं। प्रधानमंत्री की हिदायत पर केंद्र ने बड़ी मात्रा में पीने का पानी, दूध, रेडी टु ईट मील वगैरह भेजा है। सूत्रों ने बताया कि 5 टन से ज्यादा मिल्क पाउडर दिल्ली से कश्मीर भेजा गया है, जबकि और 5 टन शुक्रवार को भेजा जाएगा। पीएम मोदी ने कहा था कि बाढ़ प्रभावित राज्य में रोजाना 100-150 किलोलीटर दूध की जरूरत है।
पानी घटने के बाद फैलने वाली बीमारियों के खतरे को ध्यान में रखते हुए क्लोरीन की टैबलट्स बी भारी मात्रा में भेजी जा रही हैं। सरकार ने राज्य में 10 और हेल्थ एक्सपर्ट्स को भेजने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा रेलवे भी राज्य को 1 लाख लीटर पीने के पानी की खेप भेज रहा है। केंद्र ने राज्य सरकार से कहा है कि केंद्र से आने वाली राहत सामग्री को सुरक्षित रूप से स्टोर किया जाए, ताकि यह खराब न हो और जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा सके।
सूत्रों ने बताया कि एयर फोर्स से हेवी लिफ्ट मिग-26 हेलिकॉप्टर तैनात करने के लिए कहा जा सकता है, जो एक बार में 60 लोगों को ले जा सकता है। इससे बचाव कार्य को तेज करने में मदद मिलेगी, क्योंकि दूसरे तरीकों से लोगों को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाने में काफी वक्त लग रहा है।
सवाल फिर वही है की हर साल प्राकृतिक आपदाएं आती है. राहत और बचाव कार्य किये जाते हैं. हर साल हजारो लाखों लोग इससे प्रभावित होते हैं. जान-माल का भारी नुक्सान होता है, पर ऐसी ठोस परियोजना बनाई जाती ताकि इस तरह के प्रकृति हादसों से निपटा जाय और कुछ ऐसी ब्यवस्था की जाय ताकि इस तरह की समस्या हो ही ना और अगर हो भी तो तत्काल निपटने के उपाय किये जाएँ.
कश्मीर के अधिकांश शहरों में तो जल निकासी की भी समस्या है, जिससे पानी काफी देर से निकलता है. ये पहाड़ी इलाके हैं जहाँ से पानी जल्द निकल जाना चाहिए पर यहाँ तो मैदानों की तरह पानी डटा रहता है. कहते है इसका आकार कटोरे जैसा है. चारो तरफ ऊंची जमीन है इसलिए भी पानी निकालने में कठिनाई होती है.
ऐसे समय में सेना के जवानों की जितनी भी सराहना की जाय कम है. क्योंकि ये लोग धर्म, जाति, समुदाय, क्षेत्र, पार्टी आदि से ऊपर उठाकर सभी पीड़ितों की हर संभव मदद करते हैं.
नदियों को जोड़ने की योजना का कब क्या होगा पता नहीं, पर प्रकृति का जिस प्रकार दोहन और क्षरण हो रहा है, स्थिति चिंताजनक होती जा रही है. जनसँख्या का दबाव भी एक कारण है. प्रकृति संतुलन बनना जानती है. विकसित देश जापान, चीन और अमेरिका में भी बाढ़, तूफ़ान, भूस्खलन की प्राकृतिक आपदा आती रहती है. क्या यह विनाश की चेतवानी नहीं है? विकास का चरमोत्कर्ष विनाश के रूप में आता है. क्या हम प्रकृति को बचाने और उसके साथ जीने का संकल्प नहीं कर सकते? आपदाग्रस्त होने पर हम विकत परिस्थितियों में भी रहकर कई दिन या कें हफ़्तों, महीने गुजार लेते है. शिविरों में सभी जाति और धर्म के लोग सामंजस्य बैठा लेते हैं. यहाँ हम आपसी दुश्मनी भूल जाते हैं. क्या यह सबक काफी नहीं है? इस विकट परिस्थिति में सभी लोग मुक्त मन से सहायता भी करते हैं. राष्ट्रीय एकता का सूत्र ही नहीं वसुधैव कुटुम्बकम का भी भाव पैदा होता है. आपदाग्रस्त लोगों की मदद के लिए जिस तरह मीडिया और अन्य स्वयम सेवी संस्थाओं ने मदद की है, वे सभी स्तुत्य हैं. हमारी संवेदना उन सब के साथ है. उन सबको विपरीत परिस्थितियों में अपने आपको सम्हालने की शक्ति ऊपरवाला दे.
-जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

Monday, 8 September 2014

वास्तविक नायक – श्री नरेन्द्र मोदी!

अभी तक के प्रदर्शनों से जो दृष्टिगोचर हो रहा है, प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी वास्तविक जिंदगी के नायक बनकर उभरे हैं. भूटान और नेपाल को वरदहस्त प्रदान करना, ब्रिक्स सम्मेलन में भारत का दबदबा स्थापित करना. कुरता पायजामा पहन कर एयर इण्डिया के विमान में चढ़ना और सूट पहन कर जापान की धरती पर उतरना, जापान में जाकर मछलियों को दाना खिलाना, बौद्ध मंदिरों का दर्शन करना, जापानी स्कूलों के बच्चों से मिलना, उद्योगपतियों को आमंत्रित करने की अनूठी शैली में सम्बोधन करना, बांसुरी और ड्रम बजाना, जापानी प्रधान मंत्री को गीता देते हुए यह कहना कि मेरे पास इससे बड़ा उपहार नहीं है, आपको देने के लिए, फिर वहीं से विरोधी पार्टियों पर तंज कसना कि ‘गीता का उपहार’ शायद हमारे सेक्युलर मित्रों को पसंद न आये. शिक्षक दिवस पर भारत के विभिन्न भागों के स्कूलों के बच्चों से उन्ही की तरह शरारती लहजे में बात करना…इतने सारे गुण तो एक नायक में ही हो सकते हैं.
भारतीयों फिल्मों के नायक चाहे जो भी किरदार में हों उसे गाड़ी चलाना, मारपीट करना, नाचना, गाना और बजाना तो आना ही चाहिए. जैसे को तैसा सलूक ये नायक करते हैं.
स्वानुशाशन का पालन करते हुए पहले खुद को समय का पाबंद बनाना और दूसरों को अनुशाशन का पाठ पढ़ाना ज्यादा अनुकूल होता है. पहले खुद आदर्श प्रस्तुत करें, तभी दूसरे आपका अनुसरण करेंगे. हमारे धर्मशास्त्र, इतिहास के जितने भी नायक हुए हैं, सभी ने पहले खुद को आदर्श पुरुष बनाया, तभी उनका अनुसरण लोग करते हैं. महात्मा गांधी के एक आह्वान पर पूरा देश चल पड़ता था. आज मोदी मन्त्र से सभी सम्मोहित हो जाते हैं. पूरा देश उन्हें आशा भरी नजरों से देख रहा है. सभी राष्ट्रीय मीडिया मोदी जी का लाइव टेलीकास्ट तो कर ही रहे हैं, साथ साथ उनके रिपोर्टर जनता के पास तुरंत प्रतिक्रिया लेने भी पहुँच जाते हैं. ये बात अलग है कि संसाधन युक्त स्कूल के बच्चे ही मोदी से सीधा जुड़ पाये. सुदूर इलाके में रेडिओ के द्वारा उनके भाषण/संवाद सुनाये गए. बहुत सारे स्कूलों में मूलभूत सुविधा का अभाव है. उन्हें सुविधा संपन्न बनाने की सबकी जिम्मेवारी है. सरकारी स्कूलों के स्थिति ज्यादा बदतर है, वहां सभी सरकारों को ज्यादा ध्यान देना होगा, तभी मोदी जी का संपन्न और समृद्ध भारत का सपना पूरा हो पायेगा. उम्मीद है कि आगे निरंतर सुधार देखने को मिलेंगे.
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में जापान से भले ही सहयोग न मिला हो, उसके अनेकों कारन हो सकते हैं, पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधान मंत्री टोनी एबोट ने भारत आकर भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया का बिजली उत्पादन के लिए बहुप्रीतीक्षित परमाणु पर हस्ताक्षर किये. यह करार हो जाने से भारत की बिजली की आवश्यकता पूरी करने में काफी हद तक मदद होगी …ऑस्ट्रेलिया भारत को बिजली उत्पादन को यूरेनियम देगा ..ऑस्ट्रेलिया में लगभग २०% यूरेनियम की उपलब्धता है. साथ ही तमिलनाडु से चोरी की गयी अर्धनारीश्वर और नटराज की चोल वंश के समय की मूर्तियां भी ऑस्ट्रेलिया द्वारा इस तरह वापस लौटाना एक चमत्कार से कम नहीं है. ज्ञातव्य है कि (सुभाष कपूर द्वारा चोरी की गयी मूर्तियों) इन मूर्तियों को ऑस्ट्रेलया के आर्ट गैलरी में रखा गया था. इस पर भारत ने बहुत पहले आपत्ति दर्ज करा दी थी, लेकिन इसे लौटना तो मोदी के समक्ष ही था. करोड़ों के मूल्य की ये मूर्तियां हमारे देश की पुरानी संस्कृति की अमूल्य धरोहर भी है. यह काम भी मोदी का करिश्माई व्यक्तित्व ही कर सकता है.
मोदी जी लगातार काम करते हुए थकते नहीं हैं. वे बच्चों से कहते हैं- “अपनापन चिरन्जीवी होता है, जब आप के जैसे बच्चों से बात करता हूँ तो सारी थकान दूर हो जाती है. देश के सवा सौ करोड़ लोग मेरा परिवार है. वे बच्चों को गूगल की जगह पुसतकेँ पढ़ने की सलाह देते हैं. उनके अनुसार गूगल से ज्ञान नहीं प्राप्त होता है, ज्ञान तो पुस्तकों और शिक्षक से ही मिलता है. हमें अच्छे शिक्षक की आवश्यकता है”, क्योंकि शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता. खेल कूद नहीं तो जीवन खिलता नहीं है. महापुरुषों का जीवन चरित्र अवश्य पढ़ें. यह भी सन्देश वे बच्चों को देते हैं. स्कूलों में टॉयलेट की ब्यवस्था पर उन्होंने पुन: जोर दिया ..चांदनी रात का दर्शन, सूर्योदय और सूर्यास्त का दर्शन. प्रकृति के दर्शन और संरक्षण. अच्छा बिद्यार्थी, अच्छा नागरिक बनना भी देश सेवा है. बिजली बचाना पर्यवरण की रक्षा भी देश सेवा है. देश की सेवा के लिए सीमा पर जान देना और राजनेता ही बनना जरूरी नहीं है. भारत के भविष्य यही बच्चे है. अगर बच्चे अच्छे होंगे तो देश निश्चित ही अच्छा होगा.
आत्मविश्वास इतना कि २०२४ तक यानी कि आगामी १० सालों तक उन्हें कोई खतरा नहीं है. बच्चों के एक सवाल के जवाब में ही उन्होंने कहा की २०२४ के चुनाव की तैयरी करो तभी प्रधान मंत्री बनने का सपना पूरा हो सकेगा. इसका मतलब यह कि दस साल तक वे अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए जी तोड़ कोशिश करेंगे.
अभी हाल ही में प्रधान मंत्री जन-धन योजना की पहले ही दिन मिली अपार सफलता के बाद, उनका दूसरा लक्ष्य सफाई अभियान का भी है. दिक्कत यही है कि २८ और २९ अगस्त को जो रिस्पांस बैंकों का था, बाद में वे अपने पुराने ढर्रे पर आगये और जन-धन के साथ साधारण खाता खोलने वालों को भी टरकाते रहे, क्योंकि अब उनके ऊपर प्रेस का कैमरा नहीं दीख रहा. पता नहीं जिन गरीबों का खाता खुला है, उसे कितना टरकायेंगे. इस सोच को बदलने की आवश्यकता है.


मोदी जी की वक्तृत्व कला अद्भुत है और हाजिर जवाब भी वैसे ही. बच्चों से लगाव इन्होने रक्षा बंधन से लेकर लालकिले के प्रांगण तक में भी दिखलाई थी और शिक्षक दिवस के दिन तो मानो सभी बच्चों को खिलखिलाने पर मजबूर कर दिया. अब चाचा नेहरू के जगह चाचा मोदी को ही बच्चे याद करेंगे. उनका व्यक्तित्व, आंतरिक ऊर्जा ऐसा है की उनके चेहरे पर कभी भी थकन की शिकन तक महसूस नहीं होती. समयानुसार शब्दों का चयन या शब्दों की बाजीगरी उनकी शक्ति है. इन्होने अपना पारिवारिक जीवन त्याग दिया और देश सेवा में खुद को समर्पित कर दिया है. ब्रह्मचर्य में भी एक असीम शक्ति होती है, तभी वे बिना थके लगातार काम करने के आदि हैं.
कूटनीति ऐसी की आतंरिक शत्रु-मित्र सभी किनारे लग गए. पाकिस्तान भारत पर बुरी नजर रखते हुए खुद अपनी कुदृष्टि का शिकार बन गया है और वहां गृहयुद्ध की स्थिति पैदा हो गयी. बेचारे नवाज शरीफ ने मोदी जी को आम का टोकड़ा भेजकर अपनी शरण में लेने का अनुरोध भी जता दिया. जापान से दोस्ती कर चीन को भी समझा दिया और ऑस्ट्रेलया से परमाणु करार कर अमेरिका को भी अचंभित कर दिया. अब तो युद्ध की सामग्री ही अमरीका से लेने हैं पाकिस्तान को धमकाने के लिए और निवेश की राह को और आसान करने के लिए. अमरीका आदि विकसित राष्ट्र भारत में निवेश करने को आतुर हैं निश्चित ही अच्छे दिनों की आहट सुनाई पड़ रही है. थोड़ी कानून ब्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है, महिलाओं पर हो रहे अत्याचार पर रोक लगनी चाहिए और रोजगार सृजन की जल्द ब्यवस्था होनी चाहिए, ताकि नौजवान भटके नहीं. चीजें सही मूल्य पर उपलब्ध हों, कालाबाजारी या कृत्रिम अभाव पैदा कर दाम बढ़ाने की कोशिशों को बंद किया जाना चाहिए. मुनाफाखोरों और बिचौलियों पर लगाम लगनी ही चाहिए. यह बात सही है, प्रधान मंत्री हर जगह खड़ा तो नहीं रहेंगे, पर उनके मंत्री और पदाधिकारी भी उतने ही ईमानदार होने चाहिए.
अब उनके मंत्री भी अपने १०० दिन के कार्यक्रम का लेखा-जोखा प्रस्तुत कर रहे हैं. यह प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ही ईच्छा का परिचायक है.
उधर भारत के जन्नत(कश्मीर) में जलप्रलय से जो जिल्लत हो रही है, उसका भी समाधान और सामान की देख रेख करने प्रधान मंत्री खुद गए हैं. निश्चित ही वे कश्मीरियों और पर्यटकों की हर सम्भव मदद का प्रयास करेंगे ही.
अपने सम्मुख किसी भी व्यक्ति/जनता/श्रोताओं/दर्शकों को सम्मोहित करने की उनमे अजीब शक्ति है! आगे भी वे अपने प्रयास में सफल रहें यही कामना है.
जय हिन्द! जय भारत!
जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर

Sunday, 31 August 2014

मोदी चमत्कारी हैं!

आपने सुना है कभी पहले एक दिन में डेढ़ करोड़ आदमी को गरीब से अमीर बनते हुए? नहीं न! फिर ...यह काम कौन व्यक्ति कर सकता है? जो कहते हैं, कर के दिखलाते हैं. यही हैं हमारे अद्भुत प्रधान मंत्री नहीं, नहीं  प्रधान सेवक...गरीबी हटाने का इतना आसान नुस्खा आजतक किसी को समझ में नहीं आया. अभी तो सरकार के सौ दिन भी पूरे नहीं हुए और डेढ़ दो, तीन करोड़ गरीब आदमी बैंक खाता धारी बन गए, खाता धारी ही नहीं डेबिट कार्ड धारी, एक लाख का दुर्घटना बीमा मुफ्त, पांच हजार तक ओवरड्राफ्ट की सुविधा, २६ जनवरी तक खाता खोलने वाले को ३० हजार का जीवन बीमा अलग से! ...कांग्रेस सरकार ने सबको मोबाइल पकड़ा दिया, मोदी जी ने डेबिट कार्ड ...अब गरीब आदमी भी मॉल में जाकर महंगे सामान लेकर डेबिट कार्ड से बिल का भुगतान कर सकेंगे. गरीबी और अमीरी का छुआछूत समाप्त! ...बैंक कर्मी बड़े जोश के साथ काम कर रहे हैं. बच्चे बूढ़े जवान, छात्र, मजदूर, किसान सभी लाइन में लगे हैं.... प्रधान मंत्री जनधन योजना का फॉर्म दे दीजियेगा..कोई आधार कार्ड लेकर आया है, कोई वोटर कार्ड लेकर आया है. कोई अपना राशन कार्ड ही लेकर आ गया. सबके हाथ में अपना फोटो भी है, फोटो पर दस्तखत भी करना है. मुश्किल वहां होती है जब बुर्के में फोटो खिचवाई गयी महिला को अपने फोटो पर दस्तखत करना होता है. काली बुर्के पर दस्तखत दिखेगी नहीं और चहरे पर दस्तखत करने से चेहरा साफ़ कैसे दिखेगा. सभी बैंक कर्मी जी जान से फॉर्म की जांच कर रहे हैं, सभी डाक्यूमेंट्स को भी मिला रहे हैं, अंत में खाता नंबर. डालकर बोलते है - "जाओ जाकर कैश काउंटर पर रुपये जमा करो" ... "कितने रुपये जमा करने होंगे?" - "कम से कम पांच सौ रुपये", "पांच सौ रुपये? ...उतने तो नहीं हैं, पास में" ..."जो है, वही जमा कर दो, पास में पैसे नहीं, चले आए खाता खुलवाने...पैसा नहीं रहेगा बैंक में तो डेबिट कार्ड का क्या करेगा ? वो भी ओवरड्राफ्ट में लेगा?...चलो जो करना है करो...  आज तो घर पहुंचने में नौ बजेगा ही"....बैंक वाले भुनभुनाते हैं. एक बात तो माननी पड़ेगी ...बैंक कर्मी बड़े कुशल कर्मी होते हैं. किसी के पहचान पत्र के नाम में कुछ भी गलती हो, तुरंत पकड़ लेते हैं. - "कैसे होगा भाई?    सही पहचान पत्र लेकर आओ" ....
एक दिन में ही मोदी जी को पता चल गया कि हमारे बैंक कर्मचारी कितना काम कर सकते हैं. अन्य दिनों भले ही आम जनता को शिकायत रहती है... काम में देरी करते हैं, पर आज सभी अपना काम जल्दी  कर देते हैं. एकाध लोग झल्लाते हैं, घर के बच्चों की चिंता में महिलाकर्मी भी झल्लाती हैं, पर डरती हैं, कही कोई विडिओ न बना ले ... किस भेष में रिपोर्टर घूम रहा होगा, क्या पता ...अगर मामला उछला तो  सस्पेंसन तो जरूरी है...न बाबा न - "लाओ जी क्या काम है, तुम्हारा खाता एंट्री करनी है, लाओ सब जमा कर दो... मैं एक एक कर नाम बुलाऊंगी ...आकर ले जाना. ...इतंने सारे चेक भी पड़े हुए हैं ......इन्हे भी निपटाना है..  सबके अच्छे दिन आ गये, हमारे कब आएंगे?
बहुत सारे विश्लेषक इसे अच्छा कदम मान रहे हैं, गरीब लोग अपनी आमदनी का छोटा ही हिस्सा बचा सकेंगे, फिजूलखर्ची रुकेगी, बैंकों से ऋण मिलना आसान होगा. सरकारी सुवधाओं/ रहत करर रकम सीधे आपके बैंक खाते में जाएगी. बैंकों की नयी शाखाएं खुलेंगी, पढ़े लिखे नवयुवकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. वैसे कुछ कांग्रेसियों का कहना है यह तो कांग्रेस की योजना थी. मोदी जी इसमे अपना नाम डाल रहे हैं. लेकिन बात है कि कांग्रेस चूक गयी तभी तो सत्ता से बेदखल हो गयी है. अब क्या पांच साल बाद ही नतीजे नजर आएंगे? खासकर महंगाई और भ्रष्टाचार के साथ कला धन वाला मुद्दा. महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा, अफसरशाही का मुद्दा, सरकारी कामों में समय सीमा का मुद्दा. कानून ब्यवस्था का मुद्दा और आम आदमी की सुरक्षा का मुद्दा ...आज भी आम आदमी को दिन दहाड़े लूटा जा रहा है, हत्याएं हो रही हैं, दुष्कर्म की घटनाओं में लगातार बृद्धि हो रही है. इन सब सुधारों के अवसर कब आएंगे.?   बीच बीच में धार्मिक और साम्प्रदायिक मुद्दों की हवा.
राजनाथ जी अब बड़े खुश हैं, दो नंबर की जिम्मेदारी मिल गयीअपने बेटे को मना लेंगे. सबको जलन हो रही है...पर मोदी जी भी बड़ा होशियार है, जापान से भी खबर लेता रहेगा. काशी तो क्योटो बनने जा रहा है ...लखनऊ की कब बारी आएगी. हमें  तो वहां के लोगों से ही वोट लेना है. ये सदानंद को भी इतनी जल्दी क्या थी अपने बेटे की सगाई करने की ...कोई हिन्दू भादो में .अपने बेटे की सगाई करता है? हो गया न भादो का भद! अरे उस मॉडल को पहले निपटा लेना चाहिए था...मॉडलिंग में जितना कमाई होगी उससे ज्यादा देकर चुप करा देना चाहिए था. सब मीडिया और कांग्रेस के शह पर हो रहा है या कोई अपना आदमी ही दुश्मन बन बैठा ही. देश के दुश्मन पाकिस्तान से तो निपट लेंगे, पर घर के दुश्मनों का क्या?
अभी शकराचार्य को भी धर्मसंसद करने की क्या जरूरत थी. बेवजह बखेरा खड़ा करते रहते हैं...ऐसे ही क्या हिन्दू विरोधी कम थे जो साईं भक्तों को अपना दुश्मन बना लिया... यहाँ भी सोनिया की ही चाल लगती है तभी दिग्विजय सिंह भी समर्थन कर रहा है.
वित्त मंत्री बड़ी राहत महसूस कर रहे हैं... पर्यटन में न सही पर मैन्युफैक्चरिंग, और सेवा क्षेत्र के चलते पहली तिमाही का औसत विकास दर ५.७ % ठीक ठाक ही कहा जायेगा. एक बार अर्थ ब्यवस्था को पटरी पर लाने की जरूरत है. फिर तो यह रफ़्तार पकड़ लेगी. थोड़ा कोयला बिजली में सुधार हो जाए तो विकास की रफ़्तार अपने-आप बढ़ जाएगी.  दिल्ली में अभी चुनाव करना ठीक नहीं रहेगा. बाकी राज्यों का परिणाम पहले देख लेते हैं. केजरीवाल को थोड़ा और बदनाम करना है जो भी अपराध दिल्ली में हो उसे आम आदमी पार्टी का बता दो. जनता उसे धीरे धीरे भूल जाएगी. उसे चंदा भी कौन देगा? ज्यादा ईमानदार बनते हैं. केवल ईमानदार बने रहने से पोलटिक्स नहीं होता.
अंतराष्ट्रीय मार्किट में पेट्रोलियम प्रोडक्ट की कीमत कम होने से पेट्रोल की कीमत और रसोई गैस की कीमत लगातार कम हो रही है, ये अच्छी बात है. कुछ दिनों बाद डीजल भी मार्केट के हवाले कर दिया जाएगा. यानी सीधा अंतराष्ट्रीय मार्केट में जब डीजल के दाम बढ़ेंगे /घटेंगे उसका सीधा असर यहाँ भी होगा.
अब एक नजर पी एम की पांच दिन की जापान यात्रा पर... भारतीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी  और जापानी प्रधान मंत्री शिंजो आबे का प्रोटोकॉल से अलग हटकर एक दूसरे के साथ गले मिलना और एक दूसरे की पीठ थपथपाना, अपने आप में आन्तरिक सम्बन्ध दर्शाते हैं. जापान के क्योटो शहर के जैसा काशी(बनारस) को विकसित करना, प्रधान मंत्री का दूरगामी सोच है. दोनों शहर धार्मिक है, मंदिरों का शहर है. काशी में आस्था ज्यादा पर साफ़ सफाई और सुविधाए कम है. क्योटो एक स्मार्ट सिटी है. मोदी को यह शहर पसंद है. वे काशी को वैसा ही देखना चाहते हैं.
इसके अलावा अहमदाबाद से मुंबई तक बुलेट ट्रेन के सपना को जापान की मदद से पूरा करना है. परमाणु उर्जा पर भी बात होगी. जापान और भारत एक दूसरे के साथ तकनीकी, ब्यवसायिक और सामाजिक रूप से कन्धा से कन्धा मिलकर काम करेंगे. ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है. प्रधान मंत्री के साथ उद्योगपतियों का भी एक दल जापान गया है. कुछ समझौते होंगे विकास के नए दरवाजे खुलेंगे. इसी उम्मीद के साथ जय हिन्द! जय भारत!

-    - जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर 


Sunday, 10 August 2014

डॉलर की औकात!

डॉलर की औकात बताये लाल टमाटर.
बांधे बहिना राखी घर से बाहर जाकर
खाते आलू भात तनिक न हम घबराए
आलू दादा देखो अब हिचकोले खाए
ममता दी ने आलू को फुसलाया
अपनी साड़ी के आँचल में उसे छुपाया
आम आदमी खास आदमी को यह भाए
आलू रोटी भात सभी जन इसको खाए
हरी सब्जियां नहीं मिले कोई बात नहीं है,
आलू संग ही प्याज की औकात वही है
बारिश हो घनघोर छिपे सब रहें घरों में
चाय की प्याली साथ चिप्स को लिए करों में
राजनीति और नेता चाहे जो करवा दें,
मोदी जी को सबके सर पे ही बैठा दें ,
होती कहाँ मुसीबत कम है आम जनों की
आलू प्याज टमाटर सुनते बड़े जनों की
आलू नहीं तो कोई सवारी नहीं चलेगी,
सड़कें होंगी जाम विपदा और बढ़ेगी.
होते खुश फिर जमाखोर गद्दी पर बैठे,
सर पे पगड़ी लाल मूंछ कुछ ऐसे ऐंठे.
पैंतीस चालीस या फिर पचास ही ले लो
आलू दादा तू अब दर्शन सबको दे दो
कहते बाबा रामदेव डॉलर से, सुन लो,
आए हो औकात में आ अब हमसे मिल लो.
कहा था मैंने तुमको हम पीछे छोड़ेंगे
आना मेरे पास टमाटर हम दे देंगे.
लाल टमाटर सुघर और मासूम सा दिखता
करके नित्य ही योग वह आश्रम में टिकता.
.……जमशेदपुर में आलू की किल्लत के बाद उपजे विचार पर आधारित रचना
आप सब सड़े-गले टमाटर डाल सकते हैं.

Monday, 4 August 2014

अच्छे दिन! बुरे दिन!

यह राजनीति भी अजीब चीज है. कहते हैं इसमें कोई स्थाई दुश्मन या दोस्त नहीं होता है. अच्छे दिन का वादा कर के मोदी जी तो कामयाब हो गए. वाकई उनके और भाजपा के अच्छे दिन तो आ ही गए. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वीजा देने से इंकार करने वाला अमेरिका वीजा साथ में लेकर निमंत्रण देने (कैरी) आ गया. उस ‘कैरी’ को भी ‘कौड़ी’ बनाकर वापस भेजा. इधर कांग्रेस से मुक्त भारत के निर्माण में भी मोदी जी सफल होते नजर आ रहे हैं. मोदी जी सचमुच जादूगर हैं. महज ४४ सीट जीतकर कांग्रेस विपक्ष की दावेदारी से भी बाहर हो गयी. अब संसद में विपक्ष नाम की चीज ही नहीं रह गयी है. ऊपर से सोनिया राहुल के ऊपर मनी लॉन्डरिंग का सुब्रमण्यम स्वामी का मुक़दमा और पेशी से परेशान सोनिया राहुल पर नटवर सिंह की किताब के साथ जुबानी हमला. करैला और नीम के साथ मिर्ची भी. कभी नेहरू गांधी परिवार के खासमखास कहे जाने वाले नटवर सिंह आज सबसे बड़े दुश्मन के रूप में नजर आ रहे हैं.  अब सोनिया गांधी भी किताब लिखेंगी 'वन लाइफ इज़ नॉट एनफ' ...सचमुच में अब इस लाइफ में वह भारत का प्रधान मंत्री बनने से रही, क्या पता उन्हें इटली वापस जाने का मौका भी मिलेगा या नहीं. सुख के सब सब साथी....दुःख में न कोय....
समय का और राजनीति का ही तकाजा है कि एक दुसरे को बर्दाश्त नहीं करने वाले नितीश और लालू कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाने को मजबूर हुए. बकौल चिराग पासवान सांप बिच्छू की जोड़ी ... ऐसे ही पुत्र पिता का का नाम रोशन करते हैं. उधर ममता बाम दलों के साथ मिलना चाहती हैं.  यह सब अस्थाई है ..इस संसार में स्थाई क्या है? जो आया है, जायेगा ही जो चढ़ा है, कभी गिरेगा ही....जय हो पशुपति नाथ की! जीत बहादुर भी अपनी माँ से मिलकर कितना खुश है. सोमनाथ की धरती से पशुपति नाथ की धरती तक. नेपाल की जनता का मन मोहा... भोले बाबा खुद भिखारी जैसे दिखते हैं, पर किसी पड़ोसी को देना हो तो हम दिल खोल देते हैं. आप भी हमसे मिलो, कारोबार करो...
मोदी जी ने कहा था - जन प्रतिनिधियों पर मुकदमों का निपटारा एक साल के अंदर किया जाय, पर सुप्रीम कोर्ट के पास सिर्फ वही काम तो नहीं है... और भी सीरियस मुकदमे होते हैं. तब तक जन प्रतिनिधि सांसद या विधायक बने रह ही सकते हैं. देखते-देखते तो पांच साल गुजर ही जाते हैं..फिर अगली बार कौन सत्ता में आता है, कौन जानता है? जब तक चार्जेज साबित नहीं होते, तबतक सभी क्लीन ही कहे जायेंगे न! चार्जेज लगाएगा कौन जो चार्ज लगाने की हिम्मत करेगा उस पर मान हानि का मुक़दमा ठोक देंगे कि नहीं. सबूत कहाँ से लाओगे...???
भारत में ‘संचार क्रांति’ तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी की देन थी. उसका इतना बड़ा नुकसान उनके ही परिवार को उठाना पड़ेगा, शायद उन्होंने सोचा भी नहीं होगा. अब मनमोहन सिंह बकौल नटवर सिंह  'घटिया आदमी' हो गए और नटवर सिंह ‘नटवर लाल’ ...वाह रे समय की मार! मीडिया के तो पौबारह हैं, चटकारे लेकर ख़बरें बनाना और कमाना यही तो रह गया है मीडिया का काम. किसे उठाना है, किसे गिराना है, अब मीडिया और सोसल मीडिया के हाथ में है. मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाना भी हो, तो सनसनी खेज खबरें दिखाना भी इन्हे खूब आता है.
कभी बलात्कार, तो कभी, हाहाकार, कभी बरबादी तो कभी करतब बाजी, क्रिकेट में भारत हारा तो क्या हुआ कॉमन वेल्थ गेम में तो भारत को पदक मिल रहे हैं न! इंडिया 1स्वर्ण ३०  रजत,       और १९ कांस्य कुल ६४  पदक जीतकर भारत पांचवे स्थान पर है. वह भी पदक ऐसे खिलाड़ी ले रहे हैं, जो साधारण यानी आम घरों  में पले-बढे. यह क्या अच्छे दिन का आगाज नहीं है?  वही दो अधिकारी बेशर्मी का भी पदक लेने से नहीं हिचके ...
हम प्राकृतिक हादसों को नियंत्रण करने में कामयाब नहीं हो रहे हैं, पिछले साल उत्तराखंड के केदारनाथ में त्रासदी, तो इस बार पुणे के मालिण  गांव में तबाही. पूरा गांव पहाड़ की चपेट में आ गया... और अब कोशी की कहर का बिहार को खतरा. ख़राब मॉनसून की भविष्यवाणी को मोदी जी की प्रार्थना ने अच्छे मॉनसून में बदल दिया. हर जगह लगभग औसत बरसात हुई/हो रही है.
टमाटर लाल होने से क्या? आलू-प्याज तो नियंत्रण में है ही ..पेट्रोल के दाम कम हुए है ...और कैसा होता है, अच्छा दिन भाई! ...बेचारे ई रिक्शा वाले ...तुम लोग तो मिहनतकश इंसान थे. क्यों मिहनत से कतराने लगे? साइकिल रिक्शा के जगह ऑटो रिक्शा चलाने लगे. मिहनत करना सीखो ऐ मिहनत करने वालों. हाँ चोरी वगैरह मत करने लगना इन चौदह दिनों में. कुछ तो बचत करके रक्खे होगे ... नहीं तो ई रिक्शा को गिरवी रखो... दो सप्ताह के खाने का इंतजाम हो ही जायेगा... तब तक गडकरी जी नया कानून बनवा देंगे ... तुम लोगों को लाइसेंस मिल जायेगा. नहीं तो केजरीवाल फिर किस मर्ज की दवा है. इस बार विधान सभा के चुनाव में उसे ही वोट दोगे न! या पाला बदल लोगे?  पाला बदलने में ही होशियारी है. बड़े बड़े नेता अपनी पार्टी छोड़ भाजपा रूपी टाइटेनिक पर सवार हो रहे हैं. फिर तुम काहे को अपनी डोंगी डुबाओगे. समझ गए न?
बस अच्छे कपडे पहनो अच्छे दिन आ जायेंगे. बुलेट ट्रैन, ए. सी. स्लीपर, आधुनिक स्टेसन, आधुनिक शहर और विकसित गांव अच्छे दिन किसे कहते हैं भाई... और सब कुछ इस पांच साल में सम्भव नहीं है. अगली बार भी मुझे ही चुनना होगा, क्योंकि अब दूसरा बचा ही कौन है? अब प्रियंका राहुल का जमाना गया. ये लोग छुट्टी मनाने अपना ननिहाल ही चले जाएँ तो अच्छा है.  .
ई यु. पी. बिहार वाले... हर जगह माहौल ख़राब कर देते हैं, पहले मुंबई का माहौल ख़राब किया, अब दिल्ली को बिगाड़ रहे हैं. अरे आए थे, मजदूरी करने और बस गए यही आकर. तुम लोगों के लिए लोकल ट्रेन भी बुलेट ट्रैन की स्पीड से चला देंगे, रोज आरा, छपरा से ट्रेन में बैठकर नहीं ..नहीं लटक कर आना और दिन भर काम करके चले जाना. गलती से भी यहाँ घर बनाने की कोशिश मत करना और अगर घर बनाओगे तो वोट भाजपा को देना पड़ेगा, अन्यथा राज ठाकरे के बारे में सुना है न? यहाँ भी विजय गोयल है. डॉ. हर्षवर्धन को तो स्वास्थ्य मंत्री बना ही दिया है. अब गोयल को मुख्य मंत्री बनाने दो भाई. उसके भी तो अच्छे दिन आने ही चाहिए. ‘सी सैट’ का हल भी निकाल देंगे. आखिर हिंदी भाषियों की हम नहीं सुनेंगे तो कौन सुनेगा? गीता और महाभारत जैसे धर्मग्रन्थ हमारे पथ प्रदर्शक हैं. फिर अंग्रेजी की हिमायत क्यों?
और हाँ...इस बार १५ अगस्त को असली लाल किला से मेरा भाषण जरूर सुनना ... इस बार तो मेरा भाषण अमेरिका भी सुनेगा और चीन भी. पाकिस्तान को तो सुनना ही पड़ेगा. एक बार प्रेम से बोलो बाबा पशुपति नाथ की जय!

जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर