Saturday, 3 March 2018

श्री जे. एन. टाटा को श्रद्धांजलि


३ मार्च ,१८३९ को गुजरात के नवसारी में जन्मे नुसरवान जी टाटा और जीवनबाई टाटा के बेटे जमशेदजी नुसेरवान जी टाटा ने आज से १५० साल पहले ही ‘मेक इन इंडिया’ की ऐसी मजबूत आधारशिला रखी थी कि आज वो एक बड़े फल-छायादार वृक्ष का रूप ले चुका है जिसकी शाखाएं देश विदेश में भी अब गहरी जड़ें जमा चुकीं हैं. इस साल टाटा साहब के १७९ वीं जयंती मनाई जा रही है. हालाँकि १९०७ में टाटा स्टील (तब-टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी यानि टिस्को के नाम से मशहूर) ने जमशेदपुर में मूर्त रूप लेना शुरू किया था उसके पहले १९ मई ,१९०४ में ही जमशेदजी नुसेरवान जी टाटा का जर्मनी में निधन हो चुका था लेकिन उनके अदम्य साहस, दूरदर्शिता और सपने को आगे बढ़ाते हुए उनके बेटे दोराबजी टाटा के नेतृत्व में विपरीत परिस्थितियों में १९१२ में पहली भारतीय स्टील कंपनी से जमशेदपुर में लौह उत्पादन शुरू हुआ.
देश के सफल औद्योगीकरण के लिए उन्होंने इस्पात कारखानों की स्थापना की महत्त्वपूर्ण योजना बनायी। ऐसे स्थानों की खोज की, जहाँ लोहे की खदानों के साथ कोयला और पानी की सुविधा प्राप्त हो सके। अंतत: आपने बिहार(वर्तमान झाड़खंड) के जंगलों में सिंहभूमि जिले में वह स्थान (इस्पात की दृष्टि से बहुत ही उपयुक्त) खोज निकाला। तब का ‘कालीमाटी’ स्थान आज जमशेदपुर, और टाटानगर के नाम से प्रसिद्ध है, जो अपने आप में सम्पूर्ण भारत कहा जा सकता है. यहाँ हर जाति, धर्म के लोग, स्त्री-पुरुष समभाव से अपना काम करते हैं और अपने काम को ही पूजा मानते हैं. अमेरिकी निबंधकार लेविस लैपहैप के शब्दों में -"कोई व्यक्ति औज़ार की तरह रोजगार का साधन भी बन सकता है, वह ईश्वर के अवतार जैसा अपनी अद्भुत लीलाएं प्रदर्शित कर सकता है, जिसने अपनी सम्पदा का उपयोग भारत और भारतवासियों को समृद्ध बनाने में किया. वह जमशेदजी ही हो सकता है."
टाटा स्टील अब तो भारत ही नहीं कई देशों में भी फैला हुआ है, पर संस्थापक श्री जे. एन. टाटा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि टाटा स्टील, जमशेदपुर के ही मुख्य द्वार पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर मनाया जाता है. इस कार्यक्रम में शामिल होने टाटा परिवार के सभी वरिष्ठ और कनिष्ठ सदस्य पधारते हैं. वैसे २ मार्च को ही कुछ मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत हो जाती है. इस बार भी सभी वरिष्ठ अधिकारी जो ज्यादा समय मुख्य दफ्तर मुंबई या विदेश में रहते हैं, २ मार्च को ही जमशेदपुर पधार गए. २ मार्च को ही ८० वर्षीय श्री रतन टाटा के साथ टाटा समूह के वर्तमान अध्यक्ष श्री एन. चंद्रशेखरन ने टाटा तार कंपनी मैदान स्थित नवल टाटा हॉकी अकादमी का उद्घाटन किया साथ ही शाम को जुबिली पार्क में विद्युत् सज्जा का उद्घाटन किया. इस उद्घाटन समारोह का जो फिल्मांकन दिखाया गया, उसे देखकर खुद उद्घाटनकर्ता भी आश्चर्यचकित रह गए. जुबिली पार्क भी टाटा स्टील के ५० साल पूरा होने के अवसर १९५७ में जमशेदपुर वासियों के लिए दिया गया उपहार है, जिसे बंगलोर के वृन्दावन गार्डेन के शैली में बनाया गया है. ३ मार्च के अवसर पर इसे परीलोक की तरह सजाया जाता है और विद्युत् सज्जा के माध्यम से ही विभिन्न प्रकार की झांकियां दिखाई जाती है. इस बार स्मार्ट सिटी की भी झलक दिखलाई गयी है. भारत के विभिन्न रूपों को यहाँ भली-भांति चित्रण किया गया है. टाटा समूह के चेयरमैन ने आश्वस्त किया है कि जमशेदपुर तकनीक के सहारे स्मार्ट से स्मार्टर स्टील सिटी बनेगा.
मुख्य प्रवेश द्वार पर संस्थापक को श्रद्धांजलि देने का कार्य सुबह साढ़े सात बजे से प्रारंभ हो जाता है. सर्वप्रथम टाटा मुख्य अस्पताल का टीम अपने जनरल मेनेजर के नेतृत्व में परेड करते हुए प्रतिमा पर पुष्पांजलि और माला अर्पित करता है. उसके बाद टाटा समूह की विभिन्न अनुषंगी इकाई अपने अपने ढंग से श्रद्धांजलि अर्पित करता है. साढ़े आठ बजे जमशेदपुर के ही वरिष्ठ नागरिकों की टीम अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है और 9 बजे टाटा समूह के निदेशक मंडल के सदस्य जिनमे इसबार श्री रतन टाटा, श्री एन चंद्रशेखरन, श्री जे जे इरानी, श्री टी वी नरेन्द्रन आदि ने माल्यार्पण किया. फिर विभिन्न यूनियन के पदाधिकारी गण भी अपने स्तर से श्रद्धासुमन अर्पित किये. यहाँ तक कि नाटस्टील, टाटा स्टील थाईलैंड, टाटा स्टील यूरोप के प्रतिनिधियों ने भी यहीं पर आकर श्रद्धासुमन अर्पित किए. हालाँकि हर साल यह समारोह होता है और कई बार मैं इसमे या तो प्रतिभागी के रूप में या दर्शक के  रूप में शामिल रहा हूँ. इसबार भी मुझे सपत्नीक नजदीक से इस समारोह का प्रत्यक्षदर्शी होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. इसबार मुझे उन सभी गणमान्य लोगों, जिनमे श्री रतन टाटा, एन चंद्रशेखरन आदि महान विभूतियों को नजदीक से दीदार करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.    
दोपहर बाद यहाँ के हृदयस्थल में स्थित गोपाल मैदान में खेलकूद की विभिन्न स्पर्धा का आयोजन हुआ जिसमे सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया. शाम को जुबिली पार्क में जमशेदपुर और आस-पास के नागरिकों का हुजूम जुटता है. जुबिली पार्क का कार्यक्रम ५ मार्च तक चलता है ताकि सभी ईच्छुक लोग खूबसूरत नजारा देख सकें. लाइट एंड साउंड पर आधारित बहुत सारे कार्यक्रम मनमोहक और मनोरंजक होते हैं.
अभी हाल ही में टाटा स्टील को बंगलोर में आयोजित फ़ास्ट सिक्योरिटी इंडिया एक्सपो के दौरान बेस्ट सिक्योर कंपनी का सम्मान मिला है. प्रधान मंत्री ट्राफी से लेकर बेस्ट एथिकल कंपनी का अवार्ड भी लगभग हर साल ही मिलता है. यह टाटा ही है जो हर सरकारों की नीतियों के साथ साथ सामंजस्य बिठाकर चलता है इसलिए यह दिन रात अपनी रफ़्तार से चलता रहता है. रुकने का नाम भी नहीं लेता.
टाटा घराने में काम करनेवाले सभी स्तर के कर्मचारी अधिकारी अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं. टाटा से ही जमशेदपुर है और जमशेदपुर तथा आस पास के लाखों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार एवं अन्य नागरिक सुविधाएँ प्रदान करता है. टाटा के ही बदौलत यह शहर साफ़ सुथरा और हर प्रकार के नागरिक सुविधाओं से सम्पन्न है. यहाँ के सभी व्यवसायी टाटा पर ही आधारित हैं. इसलिए वे सभी चाहते हैं टाटा दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की करता रहे. आम तौर पर यह शहर अमन पसंद है. बीच बीच में कभी-कभार अप्रिय घटना घट जाती है, जिससे सभी दुखी होते है. झारखण्ड सरकार के दो महत्वपूर्ण मंत्री श्री रघुवर दास(मुख्य मंत्री) और श्री सरयू राय जमशेदपुर के अमन का खास ख्याल रखते हैं. इसलिए भी यह शहर अपनी समरसता कायम रख पाता है. बीच-बीच में टाटा कम्पनी कुछ ऐसे सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करती रहती है, जिससे लोगों की प्रतिभा का विकास होता रहे. कई क्रिकेट खिलाड़ी, तीरंदाज और फ़िल्मी कलाकार भी इस जमशेदपुर से बने हैं, जिनका अपना नाम देश और पूरे दुनिया में है. कवि सम्मेलनों में आनेवाले कई कवियों का मानना है कि जमशेदपुर में लोहा बनानेवाले लोगों का दिल मोम का होता है. जैसे यहाँ लोहा पिघलता है दिल भी बहुत जल्द पिघलता है.   
पूरी दुनियां में अपना स्थान बनाने में स्वर्गीय श्री जे एन टाटा की दूरदर्शिता ही है, जिससे यहाँ के सभी लोग प्रभावित हैं और उनके जन्म दिन के अवसर पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं. टाटा यहाँ के लोगों के लिए भगवान से कम नहीं हैं. पुराने कर्मचारी जो साइकिल से ड्यूटी आते थे, टाटा साहब की मूर्ति के पास अपनी साइकिल रोककर, जूते उतारकर टाटा साहब को प्रणाम कर तब ड्यूटी को प्रस्थान करते थे. ऐसी महान विभूति को शत शत नमन!        – जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर     

Saturday, 24 February 2018

सदमा ही सदमा

सदमा तभी लगा जब आज के समाचार पत्र के मुख्य पृष्ठ पर खबर देखी – गिफ्ट पैक में आया बम दादी समेत दूल्हा उड़ा – ओड़िसा के बलांगीर की घटना, नववधू गंभीर रूप से घायल दूसरा सदमा तब लगा जब मैंने टी वी स्टार्ट किया – चांदनी ने दिया सदमा. श्रीदेवी की दुबई मे भांजे की शादी समारोह में ही दिल का दौरा पड़ने से निधन !
सुहावने मौसम का ऐसा मनहूस रविवार को काला रविवार ही कहा जाएगा.
हिंदी फिल्मों की जानी मानी अभिनेत्री श्रीदेवी का बीती रात(२४.०२.२०१८) दुबई में निधन हो गया. बताया जा रहा है कि दिल का दौरा पड़ने के कारण उनका निधन हुआ. श्रीदेवी के निधन की सूचना मिलते ही पूरा बॉलीवुड और उनके फैंस शोक में डूब गए. श्रीदेवी की जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु में हुआ था. उन्होंने बतौर बाल कलाकर अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. उसके बाद उन्होंने भारत की पहली महिला सुपरस्टार का सफर तय किया. श्रीदेवी का बॉलीवुड में प्रवेश 1978 के फिल्म सोलहवां सावन से हुआ था, लेकिन उन्होंने वर्ष 1983 की फिल्म हिम्मतवाला से खूब सुर्खियां बटोरीं. श्रीदेवी की सदमा, नागिन,निगाहें, मिस्टर इन्डिया, चालबाज़, लम्हे, खुदा गवाह, तोहफा और जुदाई फ़िल्में हैं. श्रीदेवी को अब तक पांच फिल्मफेयर अवार्ड मिल चुका है.
श्रीदेवी ने फिल्म प्रोड्यूसर बोनी कपूर से शादी की थी. श्रीदेवी और बोनी कपूर की दो बेटियां हैं. जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर.  श्रीदेवी के निधन पर गायक आदनान सामी ने दुख व्यक्त करते हुए लिखा कि मेरे पास कोई शब्द नहीं है..
बात उस समय है की है जब मैं भी जवान था और फ़िल्में देखा करता था. एक वरिष्ठ मित्र ने कहा एक ऐसी हीरोइन आई है जो जितेन्द्र को भी डांस में परास्त कर सकती है. तब जितेन्द्र ही ऐसे हीरो थे जो हीरोइनों के साथ जमकर डांस करते थे. ठीक उसी समय जयाप्रदा और श्रीदेवी का बॉलीवुड में अवतरण हुआ था. दोनों कई फिल्मों में एक साथ काम भी कर चुकी हैं पर कुछ फिल्मों में श्रीदेवी ने अपनी एक अलग पहचान बनाई. हिम्मतवाला से लेकर सदमा तक नागिन से लेकर मिस्टर इण्डिया में इनके किरदार गजब के हैं और इन्होने रोल ही नहीं किया बल्कि किरदार में खुद को समाहित कर दिया था.  
एक वो अभिनेत्री जो अपनी बेटी की पहली फिल्म के लिए खुद को इतना तैयार कर लिया था कि मानो यह उसकी अपनी पहली फिल्म हो लेकिन वह बेटी जाह्नवी को पर्दे पर देख पातीं नियति ने उनकी जिंदगी का ही पर्दा गिरा दिया. श्रीदेवी ने अपनी गजब की खूबसूरती, दिलकश अदाओं और दमदार अभिनय से दर्शकों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है. भारतीय फिल्मों की मशहूर अदाकारा ने हिंदी फिल्मों के अलावा तमिल, मलयालम, तेलुगू, कन्नड़ और में भी काम किया है. अपने बेहतरीन अभिनय के कारण उनकी गिनती बेहतरीन कलाकारों में की जाती है. वह अस्सी और नब्बे के दशक में सक्रिय रहीं.
श्रीदेवी की जिंदगी से जुड़ी 15 बातें
1.    चार साल की उम्र में ही तमिल फिल्मों से पर्दे पर आनी वाली श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त,1963 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव मीनमपट्टी में हुआ था. उनके पिता का नाम अय्यपन और मां का नाम राजेश्वरी था. उनके पिता एक वकील थे. उनकी एक बहन और दो सौतेले भाई हैं. 
2.    साल 1976 तक श्रीदेवी ने कई दक्षिणी भारतीय फिल्म में बतौर बाल-कलाकर के रूप में काम किया. अभिनेत्री के रूप में 1976 में उन्होंने तमिल फिल्म 'मुंदरू मुदिची' में काम किया.
3.    श्रीदेवी को मलयालम फिल्म 'मूवी पूमबत्ता'(1971) के लिए केरला स्टेट फिल्म अवार्ड से भी सम्मानित किया गया. उन्होंने इस दौरान कई तमिल-तेलुगू और मलायलम फिल्मों में काम किया, जिसके लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया. 
4.    श्रीदेवी ने हिंदी में अपने करियर की शुरुआत साल 1979 में फिल्म 'सोलवां सावन' से की थी. लेकिन उन्हें बॉलीवुड में पहचान फिल्म 'हिम्मतवाला' से मिली. इस फिल्म के बाद वह हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार अभिनेत्रियों में शुमार हो गईं.
5.    उन्होंने अपने करियर के दौरान कई दमदार रोल किए. उन्होंने हेमा मालिनी अभिनीत फिल्म 'सीता और गीता' की रीमेक 'चालबाज' में डबल रोल निभाया. पंकज पराशर द्वारा निर्देशित फिल्म में अंजू और मंजू के किरदार से उन्होंने सभी का मन मोह लिया. 
6.    साल 1983 में फिल्म 'सदमा' में श्रीदेवी दक्षिण सिनेमा के अभिनेता कमल हासन संग नजर आईं. इस फिल्म में उनके अभिनय को देख समीक्षक भी हैरान थे. 
7.    श्रीदेवी को फिल्मों में अपने मिथुन चक्रवर्ती से प्यार हो गया. दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा, हालांकि मिथुन पहले ही शादीशुदा थे.
8.    उन दिनों दोनों का फिल्मी करियर उन दिनों ऊंचाइयों पर था और उनके प्यार के चर्चे भी आम हो गए. इन सबसे मिथुन के गृहस्थ जीवन में भूचाल लाकर रख दिया था, जिसके बाद मिथुन ने सबको अपने और श्रीदेवी के रिश्ते की सफाई दी. 
9.    इसके बाद श्रीदेवी ने 1996 में अपनी उम्र से लगभग 8 साल बड़े फिल्म निर्माता बोनी कपूर से शादी कर सबको चौंका दिया था. इनकी दो बेटियां भी हैं- जाह्नवी और खुशी कपूर. फिलहाल इनकी बड़ी बेटी पूरी तरह से बॉलीवुड में आने को तैयार है.
10. साल 1996 में निर्देशक बोनी कपूर से शादी के बाद श्रीदेवी ने फिल्मी दुनिया से अपनी दूरी बना ली थी. लेकिन इस दौरान वह कई टीवी शो में नजर आईं. श्रीदेवी ने साल 2012 में गौरी शिंदे की फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश' से रूपहले पर्दे पर अपनी वापसी की. 
11. हिंदी सिनेमा से कई वर्षो तक दूर रहने के बाद भी फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश' में उन्होंने बेहतरीन अभिनय से आलोचकों और दर्शकों को चौंका दिया था. उन्हें भारत सरकार ने साल 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया. इसके अलावा उन्हें 'चालबाज' (1992) और 'लम्हे' (1990) के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है.
12.  उन्होंने 'जैसे को तैसा', 'जूली', 'सोलहवां साल', 'हिम्मतवाला', 'जस्टिस चौधरी', 'जानी दोस्त', 'कलाकार', 'सदमा', 'अक्लमंद', 'इन्कलाब', 'जाग उठा इंसान', 'नया कदम', 'मकसद'
13. 'तोहफा', 'बलिदान', 'मास्टर जी', 'सरफरोश','आखिरी रास्ता', 'भगवान दादा', 'धर्म अधिकारी', 'घर संसार', 'नगीना', 'कर्मा', 'सुहागन', 'सल्तनत', 'औलाद', 'हिम्मत और मेहनत', 'नजराना', 'जवाब हम देंगे', 'मिस्टर इंडिया', 'शेरनी', 'सोने पे सुहागा', 'चांदनी', 'गुरु', 'निगाहें', 'बंजारन', 
14. 'फरिश्ते', 'पत्थर के इंसान', 'लम्हे', 'खुदा गवाह', 'हीर रांझा', 'चंद्रमुखी', 'गुमराह', 'रूप की रानी चोरों का राजा', 'चांद का टुकड़ा', 'लाडला', 'आर्मी', 'मि. बेचारा', 'कौन सच्चा कौन झूठा', 'जुदाई', 'मिस्टर इंडिया 2' जैसी फिल्मों में काम किया.
15. श्रीदेवी ने अपने लंबे करियर में लगभग 200 फिल्मों में काम किया. इनमें 63 हिंदी, 62 तेलुगू, 58 तमिल और 21 मलयालम फिल्में शामिल हैं. 
सदमा का वह लोरी – सुरमई अंखियों में नन्हा मुन्ना एक सपना दे जा रे...तब से न जाने कितनी माताओं ने अपने बच्चे को सुलाने के लिए गाया होगा पर यह लोरी कमल हासन श्रीदेवी के लिए गाते हैं और उस समय श्रीदेवी का अल्ल्हड़पना का हर लमहा रोमांचित करता है.

कितनी अजीब बात है कि अमिताभ बच्चन ने कुछ मिनट पहले ट्वीट किया था – पता नहीं क्यों घबराहट सी हो रही है. उनकी आखिरी फिल्म ‘मॉम’ की मॉम बिना देखे ही चली गयी. अश्रुपूरित श्रद्धांजलि के साथ! भगवान उनकी आत्मा को शांति दें और उनकी दोनों बेटियों को इस सदमे से उबरने की शक्ति! – जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.